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Bihar News : ‘ऑफिस में अकेले बुलाया… फिर बॉडी पार्ट छूकर समझाया!’स्कूल में छात्रा के आरोपों ने खोली हॉस्टल की पोल? डायरेक्टर पर गंभीर आरोप

जमुई के एक निजी स्कूल के हॉस्टल में छात्रा के गंभीर आरोपों से हड़कंप मच गया। छात्रा ने डायरेक्टर पर गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया है। परिजनों के हंगामे के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

Bihar News : ‘ऑफिस में अकेले बुलाया… फिर बॉडी पार्ट छूकर समझाया!’स्कूल में छात्रा के आरोपों ने खोली हॉस्टल की पोल? डायरेक्टर पर गंभीर आरोप
Tejpratap
Tejpratap
7 मिनट

Bihar News :  स्कूल को बच्चों के लिए सुरक्षित जगह माना जाता है। हॉस्टल को तो उससे भी ज्यादा सुरक्षित होना चाहिए, क्योंकि यहां बच्चे अपने परिवार से दूर रहकर पढ़ाई करते हैं। लेकिन जमुई के एक निजी स्कूल के हॉस्टल से सामने आए आरोपों ने इसी भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल सिर्फ एक छात्रा के आरोपों का नहीं है, सवाल यह भी है कि अगर हॉस्टल में सब कुछ ठीक था, तो फिर परिजनों को बच्ची से मिलने में परेशानी क्यों हुई?

टाउन थाना क्षेत्र के एक निजी स्कूल की छात्रा ने स्कूल के डायरेक्टर आशीष सिंह पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा का दावा है कि डायरेक्टर ने उसे अकेले ऑफिस में बुलाया और उसके शरीर को छूकर अलग-अलग बॉडी पार्ट के बारे में बताया। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि उसके चेस्ट पर टच किया गया।

सबसे गंभीर आरोप छात्रा ने यह लगाया कि डायरेक्टर ने उसे एक लड़के से बात करने के मामले में समझाने के लिए ऑफिस बुलाया था। छात्रा के मुताबिक,“डायरेक्टर घटिया इंसान है। हॉस्टल में लड़कियों के साथ रेप करता है। मुझे चेस्ट पर टच किया है। मंगलवार को जब मैं स्कूल में अकेली थी, तो मुझे ऑफिस में बुलाया था। बॉडी पार्ट को छू-छू कर बता रहे थे कि कौन-सा हिस्सा क्या कहलाता है।” अब सवाल यह है कि किसी छात्रा को अनुशासन समझाने का यह कौन-सा तरीका है? क्या किसी शिक्षक या स्कूल निदेशक को इस तरह छात्रा के शरीर को छूने का अधिकार है? और अगर नहीं, तो आखिर ऑफिस में उस समय हुआ क्या था?

‘हॉस्टल सुरक्षित है’ तो गेट पर ताला क्यों?

मामला तब खुलकर सामने आया जब रविवार को हॉस्टल में रहने वाली कुछ छात्राओं ने अपने परिजनों को वहां की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। इसके बाद दोपहर में परिजन स्कूल पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने डायरेक्टर से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, उनकी बच्ची से भी तत्काल मुलाकात नहीं कराई गई। परिजनों के मुताबिक हॉस्टल के गेट पर ताला लगा दिया गया था। यहीं से कहानी और गंभीर हो जाती है।अगर सब कुछ सामान्य था तो परिजनों को अपनी ही बच्ची से मिलने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी? हॉस्टल के गेट पर ताला क्यों लगाया गया? और आखिर ऐसा क्या था जिसे लेकर परिजनों को अपनी बच्ची से मिलने के लिए हंगामा करना पड़ा? हंगामे के बाद जब छात्रा से मुलाकात हुई तो उसने कथित तौर पर ऑफिस में हुई घटना के बारे में परिजनों को बताया।

लड़के से बात करने पर बुलाया, फिर शरीर पर ‘सबक’?

छात्रा के मुताबिक, वह एक लड़के से बात करती थी। इसी बात को लेकर डायरेक्टर ने उसे समझाने के लिए अपने ऑफिस बुलाया था। आरोप है कि उस समय ऑफिस में कोई और मौजूद नहीं था। छात्रा ने दावा किया कि पहले उसे हग किया गया और फिर उसके चेस्ट को टच किया गया। इसके बाद सेक्स और प्रेग्नेंसी के बारे में समझाने की बात भी सामने आई है। अब सवाल यह है कि अनुशासन के नाम पर किसी छात्रा को अकेले ऑफिस में बुलाकर उससे इस तरह की बातचीत करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? अगर छात्रा से बात करना जरूरी था तो वहां कोई महिला शिक्षक, वार्डन या अन्य कर्मचारी मौजूद क्यों नहीं था?

एक और छात्रा ने भी उठाए सवाल

मामला सिर्फ एक छात्रा के आरोपों तक सीमित नहीं है। एक अन्य छात्रा ने भी निदेशक के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। उसने दावा किया कि कई छात्राओं के साथ निदेशक का व्यवहार ठीक नहीं रहा। हालांकि, इन आरोपों की अभी पुलिस जांच कर रही है। इसलिए फिलहाल किसी भी आरोप को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। लेकिन इतने गंभीर आरोप सामने आने के बाद जांच का दायरा बड़ा होना स्वाभाविक है।

पुलिस पहुंची, डायरेक्टर को थाने ले गई

परिजनों के हंगामे की सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम स्कूल पहुंची। पुलिस डायरेक्टर आशीष सिंह को पूछताछ के लिए टाउन थाना ले गई। थानाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार के मुताबिक, पूरे मामले की जांच की जा रही है। छात्रा के अलावा हॉस्टल के कर्मचारियों और दूसरी छात्राओं से भी पूछताछ की जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। जमुई एसडीपीओ दीप्ति मोनाली ने भी मामले को संवेदनशील बताते हुए कहा है कि पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हर बिंदु की जांच की जा रही है।

डायरेक्टर बोले- ‘साजिश के तहत लगाए गए आरोप’

उधर, पुलिस हिरासत में लिए गए डायरेक्टर आशीष सिंह ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने इसे स्कूल की छवि खराब करने की साजिश बताया है। यानी एक तरफ छात्रा और उसके परिजनों के गंभीर आरोप हैं, तो दूसरी तरफ डायरेक्टर आरोपों को पूरी तरह गलत बता रहे हैं। अब असली सवाल पुलिस जांच से सामने आएगा। क्या हॉस्टल में छात्राओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों का पालन हो रहा था? छात्रा को अकेले ऑफिस में बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी? परिजनों को बच्ची से मिलने से रोकने की नौबत क्यों आई? क्या हॉस्टल में पहले भी ऐसी शिकायतें सामने आई थीं? और सबसे बड़ा सवाल—क्या स्कूल प्रशासन ने छात्राओं की शिकायतों को समय रहते गंभीरता से लिया?

फिलहाल पुलिस जांच कर रही है। आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—बच्चों को पढ़ाई के लिए हॉस्टल भेजने वाले माता-पिता आखिर किस भरोसे पर अपनी बेटियों को वहां छोड़ें, अगर सुरक्षा से जुड़े सवालों का जवाब ही साफ नहीं है?