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Patna Student Protest: जंतर-मंतर के बाद बिहार बना आंदोलन का नया हॉटस्पॉट! आधी रात जज के सामने पेश हुए 87 प्रदर्शनकारी, कोर्ट से नहीं मिली राहत

पटना में छात्र आंदोलन के बाद पुलिस की सबसे बड़ी कार्रवाई। 24 FIR, 258 गिरफ्तार, 285 नामजद और 6 हजार अज्ञात आरोपी। जानिए कोर्ट में क्या हुआ और क्यों नहीं मिली जमानत?

Patna Student Protest: जंतर-मंतर के बाद बिहार बना आंदोलन का नया हॉटस्पॉट! आधी रात जज के सामने पेश हुए 87 प्रदर्शनकारी, कोर्ट से नहीं मिली राहत
Tejpratap
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7 मिनट

पटना: बिहार बंद और छात्र संगठनों के उग्र प्रदर्शन के बाद राजधानी पटना में पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज हो गई है। 22 और 25 जुलाई को हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस ने अब तक 24 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। इन मामलों में 285 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि करीब छह हजार अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब तक 258 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज चुकी है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बाकी लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी की तैयारी चल रही है।

इस बीच, रविवार को छज्जूबाग स्थित जजेज आवास के बाहर बेहद भावुक और तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। अदालत में छात्रों की पेशी चल रही थी, जबकि बाहर उनके परिजन घंटों से बच्चों के बाहर आने का इंतजार करते रहे।

कोर्ट में पेशी, लेकिन नहीं मिली जमानत

शनिवार को बिहार बंद के दौरान गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को कड़ी सुरक्षा के बीच कैदी वाहनों से जजेज आवास लाया गया। यहां न्यायिक प्रक्रिया के तहत छात्रों को अदालत में पेश किया गया। जानकारी के अनुसार 87 छात्रों को न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया गया, लेकिन उन्हें तत्काल राहत नहीं मिल सकी।

अदालत ने आरोपित छात्रों की जमानत याचिका स्वीकार नहीं की और सभी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस सभी छात्रों को बेउर केंद्रीय कारागार लेकर चली गई। वकीलों के मुताबिक छात्रों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 और धारा 121 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत दर्ज मुकदमे को देखते हुए अदालत ने तत्काल जमानत देने से इनकार कर दिया।

मां-बेटे की बातचीत ने नम कर दी आंखें

जजेज आवास के बाहर उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब कैदी वैन में बैठे एक छात्र की नजर अपनी मां पर पड़ी। उसने वैन के अंदर से ही अपनी मां से पूछा, "मां, तुमने कुछ खाया है कि नहीं? परेशान मत हो, सब ठीक हो जाएगा।"बेटे की यह बात सुनकर मां की आंखें भर आईं। वहां मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं। यह दृश्य पूरे घटनाक्रम की सबसे भावुक तस्वीर बनकर सामने आया।

"मेरा बेटा प्रदर्शन में शामिल ही नहीं था"

बाहर इंतजार कर रही एक महिला ने आरोप लगाया कि उनका बेटा किसी आंदोलन का हिस्सा नहीं था। उन्होंने बताया कि उनका बेटा नौकरी की तलाश में पटना सिटी जाने के लिए निकला था, लेकिन गांधी मैदान इलाके से पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। महिला ने कहा कि शनिवार दोपहर के बाद से उन्होंने अपने बेटे को 100 से अधिक बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। काफी खोजबीन के बाद उन्हें पता चला कि पुलिस उसे गिरफ्तार कर चुकी है। उनका दावा है कि उनका बेटा करीब 30 से 32 घंटे तक भूखा रहा, जिससे पूरा परिवार परेशान है। हालांकि, पुलिस की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दो वकीलों को भी अदालत में किया गया पेश

सुनवाई के दौरान एक और घटनाक्रम चर्चा का विषय बना। जानकारी के अनुसार दो वकीलों को भी पुलिस हथकड़ी के साथ अदालत में लेकर पहुंची। इस पर न्यायाधीश ने गंभीर नाराजगी जताई और गांधी मैदान थाना प्रभारी समेत एक अन्य पुलिसकर्मी से स्पष्टीकरण (शो-कॉज) मांगा है। इस घटनाक्रम के बाद अदालत परिसर में भी काफी हलचल रही।

24 FIR, 285 नामजद और छह हजार अज्ञात आरोपी

पटना पुलिस ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने और कानून-व्यवस्था बाधित करने के आरोप में अब तक कुल 24 प्राथमिकी दर्ज की हैं। इन मामलों में 285 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जबकि करीब 6,000 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की पहचान हो रही है, उनके खिलाफ भी आगे कार्रवाई की जाएगी।

CCTV और वीडियो फुटेज से हो रही पहचान

नगर एसपी (मध्य) ममता कल्याणी ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जांच तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। प्रदर्शन स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि गांधी मैदान थाना में दर्ज मामले में 137 लोगों को जेल भेजा गया है, जबकि कोतवाली थाना के मामले में 53 आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इसके अलावा सचिवालय, पाटलिपुत्र और अन्य थानों में दर्ज मामलों में पहले ही 68 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

30 छात्राओं को निजी मुचलके पर मिली रिहाई

पुलिस कार्रवाई के दौरान हिरासत में ली गई 30 छात्राओं को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार महिला प्रदर्शनकारियों के मामलों की अलग से समीक्षा की गई, जिसके बाद उन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी कर छोड़ दिया गया।

हिंसा में दोनों पक्षों के घायल होने का दावा

पुलिस के मुताबिक छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में 43 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इनमें आईजी, एसएसपी, कई थानाध्यक्ष, सब-इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं छात्र संगठनों का दावा है कि पुलिस कार्रवाई में 500 से अधिक छात्र घायल हुए, जिनमें करीब 100 छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं। कई छात्रों के सिर में गंभीर चोट लगने और हाथ-पैर टूटने की भी बातें सामने आई हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

जांच जारी, बढ़ सकती हैं गिरफ्तारियां

पुलिस का कहना है कि छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों की जांच अभी जारी है। तकनीकी साक्ष्यों और वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर छात्र संगठन और परिजन लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि कई निर्दोष छात्रों को भी गिरफ्तार किया गया है। ऐसे में यह मामला अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और कानूनी बहस का भी बड़ा विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और पुलिस जांच के आधार पर इस पूरे मामले में कई अहम घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।