पटना : बिहार की राजधानी पटना में अब सड़क या किसी भी सार्वजनिक जगह पर अचानक धरना-प्रदर्शन करना संगठनों को भारी पड़ सकता है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बिना पूर्व अनुमति और सूचना के निर्धारित स्थल के अलावा कहीं भी प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। धरना-प्रदर्शन के लिए गर्दनीबाग को निर्धारित स्थल के रूप में इस्तेमाल करने की हिदायत दी गई है।
शनिवार को पटना के डीएम कुंदन कुमार और एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने कहा कि विभिन्न संगठनों के अचानक सड़क पर उतरने से शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। प्रदर्शन के कारण सड़कें जाम होने पर इसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।
प्रशासन के मुताबिक, सड़क जाम होने से स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों से लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और न्यायालय, सचिवालय व विभिन्न आयोगों में जरूरी काम से जाने वाले लोगों को परेशानी होती है। कई बार लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है, जिससे व्यावसायिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।
एंबुलेंस फंसी तो मरीज की जान पर बन सकती है
प्रशासन ने खास तौर पर सड़क पर होने वाले प्रदर्शन से एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के प्रभावित होने पर चिंता जताई है। जाम में एंबुलेंस फंसने से गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो सकती है। इसके अलावा बुजुर्गों, बीमार लोगों और स्कूली बच्चों को भी सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।
डीएम और एसएसपी ने कहा कि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाना और शहर की सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। संगठनों से अपील की गई है कि वे अपनी मांगों को रखने के लिए निर्धारित स्थल पर ही शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन करें।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्धारित स्थल के अलावा किसी अन्य स्थान पर धरना-प्रदर्शन करने या प्रशासन के निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित संगठन और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।यानी अब पटना की सड़कों पर अचानक प्रदर्शन कर यातायात रोकना आसान नहीं होगा। अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरने वाले संगठनों को पहले प्रशासन की अनुमति और निर्धारित प्रदर्शन स्थल का ध्यान रखना होगा।





