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Bihar Politics : जीतन राम मांझी के ‘तेलचट्टा’ बयान पर चिराग पासवान का हमला, बोले- युवाओं को ऐसे शब्दों से संबोधित करना जायज नहीं, कुछ लोग ...

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी के ‘तेलचट्टा’ बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। चिराग ने कहा कि युवाओं को ऐसे शब्दों से संबोधित करना जायज नहीं है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर पर भी उन्होंने विपक्ष को घेरा।

Bihar Politics  :  जीतन राम मांझी के ‘तेलचट्टा’ बयान पर चिराग पासवान का हमला, बोले- युवाओं को ऐसे शब्दों से संबोधित करना जायज नहीं, कुछ लोग ...
Tejpratap
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पटना। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के युवाओं को ‘तेलचट्टा’ कहे जाने वाले बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए कुछ भी बोल देते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। युवाओं को ऐसे शब्दों से संबोधित करना कतई जायज नहीं है। चिराग के इस बयान से बिहार की राजनीति में एक नया सियासी संदेश भी निकल रहा है। एक तरफ उन्होंने मांझी के बयान पर नाराजगी जताई, तो दूसरी तरफ युवाओं के आंदोलन को लोकतंत्र की ताकत बताते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की।

चिराग पासवान ने युवाओं के आंदोलन, वोट चोरी के आरोप, एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उसे चुनावी प्रक्रिया या एसआईआर को लेकर इतना ही विरोध है, तो उसे अपनी सरकार वाले राज्यों में सामने आकर अपनी बात रखनी चाहिए। चिराग ने साफ किया कि लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन का अधिकार है, लेकिन इसका तरीका शांतिपूर्ण होना चाहिए।

मांझी के बयान पर चिराग ने क्यों जताई नाराजगी?

जीतन राम मांझी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चिराग पासवान ने कहा कि युवाओं को इस तरह के शब्दों से संबोधित करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, राजनीति करने के लिए किसी को भी ऐसी भाषा का सहारा नहीं लेना चाहिए, जिससे युवाओं का अपमान महसूस हो। नेताओं को अपने शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए, खासकर तब जब बात देश के युवाओं की हो रही हो।

चिराग का यह बयान ऐसे समय आया है, जब युवाओं के आंदोलन और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। युवाओं के प्रदर्शन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। ऐसे में चिराग ने एक ओर युवाओं के सम्मान की बात कही, वहीं दूसरी ओर आंदोलन के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया।

‘छात्र आंदोलन भारत को रास्ता दिखाता है’

चिराग पासवान ने कहा कि छात्र आंदोलन लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब छात्र अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते हैं, तो कई बार ऐसे आंदोलन देश को नई दिशा दिखाने का काम करते हैं। इतिहास में युवाओं और छात्रों के आंदोलनों ने कई महत्वपूर्ण बदलावों का रास्ता तैयार किया है। इसलिए किसी आंदोलन को केवल राजनीतिक चश्मे से देखना उचित नहीं है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। लोकतंत्र में अपनी बात रखने और सरकार से सवाल पूछने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके नाम पर अराजकता का माहौल नहीं बनना चाहिए। चिराग के मुताबिक, विरोध का उद्देश्य अपनी मांगों को सामने रखना होना चाहिए, न कि ऐसी स्थिति पैदा करना जिससे आम लोगों को परेशानी हो या कानून-व्यवस्था प्रभावित हो।

उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों का समर्थन करते हुए कहा कि व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार, आंदोलन और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन कायम रहना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर चिराग का तंज

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी चिराग पासवान ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हर समस्या का समाधान किसी व्यक्ति के इस्तीफे से ही निकल सकता है? इसी संदर्भ में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर हर चीज का हल इस्तीफा देने से निकलता, तो वह खुद भी कब का इस्तीफा दे चुके होते।

चिराग ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग मुद्दों पर सवाल उठाना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि वह खुद भी कई विषयों पर केंद्र सरकार के सामने अपनी बात रखते रहे हैं। उनका कहना था कि सरकार में रहते हुए भी वह केवल समर्थन करने की भूमिका में नहीं हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर सवाल उठाने का काम करते हैं।

उन्होंने अपनी भूमिका को ‘चौकीदार’ की तरह बताते हुए कहा कि सरकार के भीतर रहकर भी जनहित से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाई जा सकती है। चिराग का यह बयान इस बात पर जोर देता है कि किसी सरकार या व्यवस्था का हिस्सा होने का मतलब यह नहीं है कि हर मुद्दे पर बिना सवाल किए सहमति जताई जाए।

एसआईआर पर विपक्ष को दी चुनौती

एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक विवाद पर चिराग पासवान ने विपक्ष को घेरने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति है, तो उसे उन राज्यों में भी अपनी बात रखनी चाहिए, जहां उसकी सरकार है। उन्होंने विपक्षी दलों और सांसदों से सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की बात कही।

चिराग के मुताबिक, केवल आरोप लगाने या इस्तीफे की मांग करने से किसी समस्या का समाधान नहीं होता। विपक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने वालों को लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर रहकर अपनी मांगों को आगे बढ़ाना चाहिए।

एसआईआर और वोट चोरी के आरोपों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं। विपक्ष जहां चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं चिराग पासवान ने इस मुद्दे पर विपक्ष की रणनीति को कठघरे में खड़ा किया।

‘युवाओं ने देश की दशा और दिशा बदली है’

युवाओं के वोट चोरी के आरोपों को लेकर हो रहे प्रदर्शन पर चिराग पासवान ने कहा कि कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए युवाओं को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अराजकता का माहौल बनाने के प्रयासों पर भी आपत्ति जताई।

हालांकि, चिराग ने युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यही युवा समय-समय पर देश की दशा और दिशा बदलने का काम करते रहे हैं। छात्र और युवा आंदोलन ने कई मौकों पर देश को नई दिशा दिखाई है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया है।

उनके बयान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उन्होंने युवाओं के आंदोलन को पूरी तरह खारिज नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने आंदोलन के अधिकार और उसके तरीके के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की। उनका कहना था कि युवाओं को अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए।

मांझी पर हमले के राजनीतिक मायने

चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दोनों केंद्र सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में एक केंद्रीय मंत्री की ओर से दूसरे केंद्रीय मंत्री के बयान पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताना राजनीतिक रूप से अहम माना जा सकता है। खासकर तब, जब विवाद युवाओं की भूमिका और उनके आंदोलन से जुड़ा हो।

चिराग ने अपने बयान के जरिए युवाओं के सम्मान, शांतिपूर्ण आंदोलन और लोकतांत्रिक अधिकारों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की। वहीं, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर को लेकर विपक्ष पर हमला कर उन्होंने चुनावी विवाद पर भी अपना रुख स्पष्ट किया।

कुल मिलाकर, चिराग पासवान के बयान में दो संदेश साफ दिखाई देते हैं। पहला, युवाओं को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करने से नेताओं को बचना चाहिए। दूसरा, लोकतंत्र में विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन आंदोलन की मर्यादा और कानून-व्यवस्था का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।