Bihar News : शादी-विवाह के बढ़ते सीजन के बीच प्रशासन ने गैस सिलिंडर की आपूर्ति को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब वैवाहिक कार्यक्रमों के लिए घरेलू गैस सिलिंडर के बजाय कमर्शियल सिलिंडर का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि, मांग के मुकाबले कम आपूर्ति के कारण इसे प्राप्त करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है।
प्रशासन के अनुसार, कमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति फिलहाल जरूरत के मुकाबले करीब 70 प्रतिशत ही हो पा रही है। ऐसे में यह सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है कि सिलिंडर सिर्फ वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे और इसका दुरुपयोग न हो। अब सिर्फ आवेदन करने से सिलिंडर नहीं मिलेगा, बल्कि आवेदनकर्ता को कई स्तर की जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा।
नई व्यवस्था के तहत आवेदन करने वाले व्यक्ति की पूरी जानकारी की पुष्टि की जाएगी। इसमें शादी के कार्ड की सत्यता, आयोजन स्थल, मेहमानों की वास्तविक संख्या और कार्यक्रम की प्रकृति जैसे पहलुओं की गहन जांच की जाएगी। संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) खुद आवेदक से मिलकर इन सभी तथ्यों का सत्यापन करेंगे।
एडीएम आपूर्ति आरके दिवाकर ने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि शादी के नाम पर कमर्शियल सिलिंडर की कालाबाजारी और दुरुपयोग को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि कई मामलों में यह सामने आया है कि लोग फर्जी शादी कार्ड छपवाकर या मेहमानों की संख्या बढ़ाकर ज्यादा सिलिंडर हासिल कर लेते हैं, जिसे बाद में गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है।
इसी को देखते हुए प्रशासन ने अब पात्रता जांच को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत मेहमानों की संख्या का आकलन किया जाएगा और उसी के आधार पर गैस कंपनियों को सिलिंडर आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति इस प्रक्रिया में गड़बड़ी करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में एशेंशियल सर्विसेस मेंटिनेंस एक्ट (ESMA) के तहत भी केस दर्ज हो सकता है।
फिलहाल कमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति पर राशनिंग लागू है। उपलब्ध कुल आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा होटल और रेस्टोरेंट्स को दिया जा रहा है, जबकि 10 प्रतिशत स्ट्रीट वेंडर्स के लिए निर्धारित है। इसी 10 प्रतिशत हिस्से से ही कैटरर्स और आम लोगों को शादी के लिए सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे संकट और गहरा गया है।
प्रशासन को सूचना मिली थी कि कुछ लोग इस स्थिति का फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अधिक सिलिंडर हासिल कर रहे हैं। इसके बाद से सख्ती और बढ़ा दी गई है। अब आवेदन के साथ सभी जरूरी दस्तावेज देना अनिवार्य कर दिया गया है।
यदि कोई व्यक्ति अपने घर में शादी कर रहा है, तो उसे शादी का कार्ड, आधार कार्ड की प्रति, गैस कनेक्शन बुक की कॉपी और मेहमानों की अनुमानित संख्या देनी होगी। वहीं कैटरर्स के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। उन्हें जीएसटी, फूड सेफ्टी या एसडीओ कार्यालय से प्राप्त पंजीयन संख्या के साथ आवेदन करना होगा।
बताया जा रहा है कि अब तक करीब 125 लोगों ने शादी के लिए कमर्शियल सिलिंडर लेने के लिए आवेदन किया है। हालांकि, गैस कंपनियों को भेजे गए इन आवेदनों में सिलिंडर की संख्या तय नहीं की जा रही है। कंपनियां उपलब्धता के आधार पर ही डिलिवरी करेंगी। गैस कंपनी के मार्केटिंग अधिकारी खुद इन आवेदनों की जांच कर सिलिंडर आपूर्ति का निर्णय ले रहे हैं।
कमर्शियल सिलिंडर की कीमत भी आम लोगों के लिए चुनौती बन रही है। 19 किलोग्राम वाले एक सिलिंडर की कीमत 2,353.50 रुपये है, वहीं इसके साथ 2400 रुपये सिक्योरिटी मनी भी जमा करनी पड़ती है, जो सिलिंडर वापस करने पर लौटा दी जाती है।
इस सख्ती का असर कैटरिंग व्यवसाय पर भी साफ दिख रहा है। कई कैटरर्स और होटल संचालकों ने गैस संकट का हवाला देते हुए अपने शुल्क बढ़ा दिए हैं। हालांकि, बढ़ती कीमतों के बावजूद उन्हें अब पहले से ज्यादा जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि गैस की उपलब्धता अनिश्चित बनी हुई है।
अनुमंडल पदाधिकारी कृतिका मिश्रा ने बताया कि जिन कैटरर्स ने अब तक पंजीकरण नहीं कराया है, वे तेजी से आवेदन कर रहे हैं। प्रशासन उनकी समस्याओं को देखते हुए गैस कंपनियों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।
कुल मिलाकर, शादी के इस सीजन में गैस सिलिंडर को लेकर सख्ती ने आम लोगों और व्यवसायियों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम जरूरी है ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो और जरूरतमंदों को समय पर सुविधा मिल सके।






