सीमांचल और उत्तर बंगाल को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की अटकलों का क्या है सच? केंद्र सरकार का आया जवाब; जानिए..

बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की अटकलों को केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है। पीआईबी फैक्ट चेक और गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने इसे पूरी तरह अफवाह बताया है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mar 07, 2026, 12:58:59 PM

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Bihar News: बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की अटकलों पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार ने ऐसे किसी भी प्रस्ताव से इनकार करते हुए इसे पूरी तरह अफवाह बताया है।


दरअसल, हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमांचल क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने बिहार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें की थीं। इसके बाद यह अटकलें लगने लगीं कि बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी चल रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इन अटकलों को लेकर कहा था कि केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बंगाल को बांटने की कोशिश कर रही है।


इन दावों को प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के फैक्ट चेक ने सिरे से खारिज कर दिया है। पीआईबी ने कहा है कि भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और इस तरह की खबरें पूरी तरह अफवाह हैं। गृह मंत्रालय या किसी भी आधिकारिक संस्था ने इस तरह की किसी योजना की पुष्टि नहीं की है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी अपुष्ट और संवेदनशील खबरों को साझा न करें, जो क्षेत्रीय भावनाओं या राजनीतिक तनाव को भड़का सकती हैं।


बताया जा रहा था कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र के जिलों—पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया—को पश्चिम बंगाल के मालदा, उत्तर दिनाजपुर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जोड़कर नया प्रशासनिक क्षेत्र बनाया जा सकता है। हालांकि सरकार ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।


केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने भी इन अटकलों को निराधार बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि बिहार और बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना पूरी तरह तथ्यहीन है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।


दरअसल, यह अफवाह उस समय और तेज हो गई जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सीमांचल और उत्तर बंगाल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था, घुसपैठ और ड्रग तस्करी जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी। इसी बीच भारतीय सेना ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किशनगंज (बिहार) और पश्चिम बंगाल में नई चौकियां भी स्थापित की हैं।


बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित लगभग 20 से 22 किलोमीटर चौड़ी भूमि की संकीर्ण पट्टी है, जो मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है। यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। सरकार यहां 40 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेलवे परियोजना की योजना बना रही है, ताकि युद्ध या आपदा की स्थिति में पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क बना रहे। हालांकि इसके लिए किसी भी तरह के भौगोलिक या प्रशासनिक बदलाव की कोई योजना नहीं है।