Saraswati Puja 2026: 23 जनवरी को मनाई जाएगी बसंत पंचमी, सरस्वती पूजा की तैयारी में जुटे छात्र, जानिए मां शारदे की पूजा का महत्व?

बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा के लिए छात्र-छात्राएं और मूर्तिकार पूरी तैयारी में जुटे हैं। पटना-मुंगेर सहित जिले भर में भव्य पूजा पंडाल सजाए जा रहे हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 22 Jan 2026 01:09:59 PM IST

bihar

बिहार में सरस्वती पूजा की धूम - फ़ोटो social media

 Saraswati Puja 2026: बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा विद्यार्थी धूमधाम के साथ करेंगे। जिसके तैयारी में छात्र जुटे हुए हैं। सरस्वती पूजा को लेकर जिले भर में तैयारियां जोरों पर हैं। 23 जनवरी को होने वाली सरस्वती पूजा को लेकर मां शारदे की एक से बढ़कर एक मुर्तियां बनायी गयी है। जिसे कल की पूजा के लिए लोग खरीद कर घर और शिक्षण संस्थानों में ले जाते दिख रहे हैं। वही मां सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में मूर्तिकार जुटे हैं। 


इस वर्ष बसंत पंचमी का पर्व शुक्रवार, 23 जनवरी को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या की देवी मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है और इसी दिन मां सरस्वती का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। हंसवाहिनी और वीणावादिनी के रूप में मां सरस्वती की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से पूजा आराधना करने से बुद्धि का विकास होता है और ज्ञान में वृद्धि होती है, साथ ही शिक्षा, कला और संगीत के क्षेत्र में अपार सफलता मिलती है।


 बिहार में सरस्वती पूजा का विशेष महत्व है, यहां स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और मोहल्लों में जगह-जगह भव्य पूजा पंडाल सजाए जाते हैं और पूरी आस्था और विश्वास के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है और माता की पूजा की जाती है। इस दिन शिक्षा जगत से जुड़े लोग खासतौर पर छात्र-छात्राएं और शिक्षक मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। बता दें कि मुंगेर के विभिन्न इलाकों में मूर्तिकार दो माह पहले से ही मां की प्रतिमा को बनाने में जुट जाते है, अब सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं। कहीं रंग-रोगन और साज-सज्जा की बारीक से नक्काशी की जा रही है। मूर्तिकारों का कहना है कि पूजा समितियों और ग्राहकों की मांग के अनुसार समय पर प्रतिमाएं तैयार करना बड़ी चुनौती बन जाती है। मुंगेर में कई परिवार ऐसे हैं, जिनकी आजीविका प्रतिमा निर्माण पर ही निर्भर है। 


सरस्वती पूजा, दुर्गा पूजा और काली पूजा जैसे पर्व इनके लिए सबसे व्यस्त समय होते हैं। सुबह से देर रात तक काम कर ये लोग मां सरस्वती की आकर्षक और मनोहारी प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। मूर्तिकारों के अनुसार इस बार महंगाई के कारण मिट्टी, रंग और अन्य सामान की लागत बढ़ी है, फिर भी श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए वे पूरी लगन से काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि मां सरस्वती की प्रतिमा जब पूजा पंडालों में स्थापित होती है और श्रद्धालु पूजा करते हैं, तब उनकी सारी थकान दूर हो जाती है।।कुल मिलाकर, सरस्वती पूजा से पहले मुंगेर के मूर्तिकारों की मेहनत और कला इन दिनों अपने चरम पर है, ताकि कल पूजा के दिन हर पंडाल में मां सरस्वती विराजमान हो सकें।

पटना से सिद्धी और मुंगेर से मोहम्मद इम्तियाज की रिपोर्ट