ब्रेकिंग
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर बोला हमला, धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे समेत रखीं तीन बड़ी मांगेंपटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर रोहिणी आचार्य ने बोला हमला, कहा..‘छात्रों की आवाज दबा रही है सरकार’बिहार में अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़, हथियारों का जखीरा और निर्माण सामग्री बरामद; एक गिरफ्तारमिड डे मील खाने के बाद 100 से अधिक स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ी, MDM में मरा हुआ बिच्छू मिलने का दावाघुमाने के बहाने बाहर ले गए... फिर दोस्तों संग मिलकर की दरिंदगी; नेपाल से आई महिला से रेपराहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर बोला हमला, धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे समेत रखीं तीन बड़ी मांगेंपटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर रोहिणी आचार्य ने बोला हमला, कहा..‘छात्रों की आवाज दबा रही है सरकार’बिहार में अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़, हथियारों का जखीरा और निर्माण सामग्री बरामद; एक गिरफ्तारमिड डे मील खाने के बाद 100 से अधिक स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ी, MDM में मरा हुआ बिच्छू मिलने का दावाघुमाने के बहाने बाहर ले गए... फिर दोस्तों संग मिलकर की दरिंदगी; नेपाल से आई महिला से रेप

बिहार में जमीन अधिग्रहण बनी बड़ी चुनौती, भूमि विवाद में फंसी 319 सड़क परियोजनाएं; पांच साल में इतने करोड़ खर्च करेगी सरकार

Bihar News: बिहार में ग्रामीण सड़क निर्माण परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति और बिजली पोल शिफ्टिंग जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। अगले पांच वर्षों में केवल जमीन अधिग्रहण पर 3600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार के ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण परियोजनाएं अब भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृति जैसी जटिल समस्याओं से जूझ रही हैं। स्थिति ऐसी है कि अगले पांच वर्षों में सिर्फ जमीन अधिग्रहण पर करीब 3600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।


ग्रामीण कार्य विभाग के आकलन के अनुसार, यह अनुमान हर साल लगभग 10 प्रतिशत लागत वृद्धि को जोड़कर तैयार किया गया है। विभाग का कहना है कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण में अब वही समस्याएं सामने आ रही हैं, जो पहले राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और राज्य उच्च पथ (SH) परियोजनाओं में देखी जाती थीं।


विभाग के अनुसार वर्तमान में 319 सड़क परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण की अड़चनों में अटकी हुई हैं। इनमें से 51 मामले स्थायी पट्टा (लीज/टाइटल) से जुड़े विवादों के हैं। ग्रामीण कार्य विभाग का कहना है कि इन समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा और हर महीने संयुक्त साइट मीटिंग आयोजित की जाएगी।


इसी तरह कई परियोजनाएं वन स्वीकृति (Forest Clearance) न मिलने के कारण भी रुकी हुई हैं। फिलहाल 47 सड़क परियोजनाएं ऐसी हैं जो वन विभाग की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। यह समस्या ठीक वैसी ही है जैसी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग परियोजनाओं में देखने को मिलती है, जहां वन भूमि से जुड़े मामलों में निर्माण कार्य प्रभावित होता है।


कई स्थानों पर सड़क एलाइमेंट के कारण बिजली पोलों को हटाने की आवश्यकता भी सामने आ रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो बिजली पोल सड़क के एलाइमेंट क्षेत्र से बाहर हैं, उनके स्थानांतरण पर कोई शुल्क देय नहीं होगा। वहीं पुराने और जर्जर पोलों के स्थानांतरण के लिए नई दरों का भुगतान लागू नहीं होगा।


ग्रामीण कार्य विभाग ने निर्णय लिया है कि नई सड़क परियोजनाओं के प्रस्तावों की गहन जांच और स्क्रीनिंग की जाएगी। किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारी की विधिवत अनुशंसा अनिवार्य होगी। इसके बाद ही किसी भी सड़क निर्माण परियोजना पर अंतिम स्वीकृति और कार्य शुरू किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य है कि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और अधूरी परियोजनाओं की संख्या कम की जा सके।


विभाग का मानना है कि भूमि, वन और बिजली विभागों के बीच बेहतर समन्वय से इन समस्याओं का समाधान संभव है। इसके लिए नियमित बैठकें और फील्ड स्तर पर समन्वय को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि ग्रामीण सड़क परियोजनाओं को गति मिल सके।

रिपोर्टिंग
F

रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता