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पति-पत्नी की आपसी सहमति के बावजूद तलाक नहीं आसान, पटना हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, जानिये क्या है पूरा मामला?

पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आपसी सहमति से तलाक के लिए पति-पत्नी का कम से कम एक साल तक अलग रहना जरूरी है। इस शर्त के बिना तलाक नहीं मिल सकता, कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

बिहार न्यूज
तालाक लेना आसान नहीं अब
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

PATNA: अगर पति और पत्नी दोनों राजी हों, तब भी तालाक लेना आसान नहीं है. इसके लिए जरूरी शर्तों को पूरा करना ही होगा. पटना हाईकोर्ट ने आपसी सहमति के आधार पर तालाक के मामले में अहम फैसला सुनाया है. 


पहले एक साल अलग रहिये फिर तलाक की अर्जी लगाइये

पटना हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए पति-पत्नी का कम से कम एक साल तक अलग रहना जरूरी है। अगर यह शर्त पूरी नहीं होती है, तो कोर्ट तलाक की अनुमति नहीं दे सकता।


पटना हाईकोर्ट की जस्टिस नानी तागिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की बेंच ने कुमारी वागीशा बनाम कुमार संगम मामले में ये फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने शिवहर जिले के फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना और तलाक की अपील खारिज कर दी।


दरअसल, पति-पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक के लिए आवेदन दिया था, लेकिन फैमिली कोर्ट ने इसे इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि दोनों एक साल से अलग नहीं रह रहे थे। पति ने खुद माना कि उनका विवाह 15 मार्च 2023 को हुआ था, जबकि तलाक की अर्जी 11 मई 2023 को ही दाखिल कर दी गई थी।  


अलग रहने का मतलब क्या है?

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “अलग रहना” का मतलब सिर्फ अलग-अलग जगह पर रहना नहीं है, बल्कि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध पूरी तरह खत्म होना चाहिए। अगर एक साल से पहले पति-पत्नी के बीच संबंध बने रहते हैं, तो इसे अलग रहना नहीं माना जाएगा।

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