Patna Collegiate School : शिक्षा विभाग में बड़ा झोल ! सरकारी आवास में रहते हुए लिया आवास भत्ता, जांच के आदेश

पटना कॉलेजिएट स्कूल से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सरकारी आवास में रहते हुए कर्मचारी को आवास भत्ता दिए जाने की बात उजागर हुई है। जिला शिक्षा कार्यालय ने जांच के आदेश दिए हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 23 Jan 2026 08:39:25 AM IST

Patna Collegiate School : शिक्षा विभाग में बड़ा झोल ! सरकारी आवास में रहते हुए लिया आवास भत्ता, जांच के आदेश

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Patna Collegiate School : राजधानी पटना में शिक्षा विभाग से जुड़ें एक बड़े झोल का पोल खुला है। इसके बाद अब हर तरफ इस पुरे मामले की काफी चर्चा हो रही है, तो आइए जानते हैं कि पूरी खबर क्या है ? दरअसल, सरकारी आवास में निवास करते हुए वेतन के साथ आवास भत्ता लेने का मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा कार्यालय, पटना ने सख्त रुख अपनाया है। यह पूरा मामला राजधानी के प्रतिष्ठित पटना कॉलेजिएट स्कूल से जुड़ा है, जहां नियमों की अनदेखी कर वर्षों तक आवास भत्ता भुगतान किए जाने की आशंका जताई गई है। मामले के उजागर होते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।


जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ), पटना ने इस संबंध में स्कूल के प्रभारी प्राचार्य को एक आधिकारिक पत्र जारी कर तत्काल जांच और स्पष्ट रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि पटना कॉलेजिएट गेट स्कूल में कार्यरत परीचारी श्री शंकर बहादुर को विद्यालय परिसर में स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया था। इसके बावजूद उनके वेतन में नियमित रूप से आवास भत्ता जोड़ा जाता रहा और उसका भुगतान भी किया गया।


जुलाई 2022 तक भुगतान की जानकारी

जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि जुलाई 2022 तक शिव शंकर बहादुर को आवास भत्ता दिया जाता रहा। यह तथ्य अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है, क्योंकि सरकारी नियमों के तहत यदि किसी कर्मचारी को सरकारी आवास आवंटित है तो उसे आवास भत्ता लेने का कोई अधिकार नहीं होता।


इतना ही नहीं, विभाग को यह जानकारी भी मिली है कि संबंधित कर्मचारी या अन्य कर्मचारियों द्वारा सरकारी आवास का बिजली बिल अलग से जमा किया जा रहा था। इस बिंदु ने मामले को और पेचीदा बना दिया है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि आवास का वास्तविक उपयोग और आवंटन स्पष्ट रूप से दर्ज था, फिर भी भत्ता भुगतान कैसे जारी रहा—यह बड़ा प्रश्न बन गया है।


दो अहम बिंदुओं पर मांगा गया जवाब

डीपीओ द्वारा जारी पत्र में प्रभारी प्राचार्य से दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट और दस्तावेजी रिपोर्ट मांगी गई है—श्री शिव शंकर बहादुर को सरकारी आवास कब और किस आदेश के तहत आवंटित किया गया?इसके साथ ही आवंटन से संबंधित आदेश की प्रति भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। यदि सरकारी आवास आवंटित था, तो फिर किस अवधि में और किन कारणों से उनके वेतन में आवास भत्ता जोड़कर भुगतान किया गया? इस बिंदु पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका भी स्पष्ट करने को कहा गया है।


तीन दिनों में जवाब अनिवार्य

जिला शिक्षा कार्यालय ने प्रभारी प्राचार्य को तीन दिनों के भीतर सभी साक्ष्यों और स्पष्टीकरण के साथ रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। पत्र में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि जांच में नियम विरुद्ध भुगतान की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें राशि की वसूली से लेकर विभागीय कार्रवाई तक की संभावना जताई गई है।


शिक्षा विभाग में बढ़ी सख्ती

इस पूरे मामले को शिक्षा विभाग में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में विभाग द्वारा अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के मामलों पर समय रहते कार्रवाई न की जाए तो सरकारी धन के दुरुपयोग को बढ़ावा मिलता है।


अब सभी की नजरें प्रभारी प्राचार्य की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट न केवल इस मामले की सच्चाई सामने लाएगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि आगे किस स्तर तक कार्रवाई होगी। शिक्षा विभाग ने साफ संकेत दे दिया है कि नियमों से समझौता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।