Vigilance Bureau Raid : असिस्टेंट डायरेक्टर परमजय सिंह के घर से 15 लाख कैश बरामद, जांच में खुल सकते हैं बड़े राज; नियोजन भवन की पार्किंग में रिश्वत लेते हुए हैं अरेस्ट

पटना में निगरानी ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए असिस्टेंट डायरेक्टर परमजय सिंह को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद कंकड़बाग स्थित घर से 15 लाख रुपये नकद बरामद हुए, जिससे मामले में बड़े खुलासे की संभावना बढ़ गई है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 07 Feb 2026 08:34:08 AM IST

Vigilance Bureau Raid : असिस्टेंट डायरेक्टर परमजय सिंह के घर से 15 लाख कैश बरामद, जांच में खुल सकते हैं बड़े राज; नियोजन भवन की पार्किंग में रिश्वत लेते हुए हैं अरेस्ट

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Vigilance Bureau Raid : बिहार की राजधानी पटना में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। नियोजन भवन में तैनात असिस्टेंट डायरेक्टर परमजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। निगरानी की टीम ने जब परमजय सिंह के कंकड़बाग स्थित आवास पर छापेमारी की, तो वहां से 15 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद किए गए। इस बरामदगी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है और अब जांच एजेंसियां इस रकम के स्रोत और संभावित नेटवर्क की पड़ताल में जुट गई हैं।


जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के बजट फंड से जुड़ा हुआ है। मुजफ्फरपुर निवासी ओम प्रकाश ने निगरानी विभाग को शिकायत दी थी कि आईटीआई संस्थानों के वेतन, कार्यालय खर्च और मशीनों की खरीद के लिए लगभग 1.70 करोड़ रुपये का फंड जारी होना था। आरोप है कि इस फंड को पास करने के बदले परमजय सिंह ने 10 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी।


शिकायतकर्ता के मुताबिक, परमजय सिंह ने दावा किया था कि रिश्वत की यह राशि विभाग के निदेशक सुनील कुमार के लिए मांगी जा रही है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि इस रकम का एक हिस्सा उनके निजी उपयोग के लिए भी रखा जाएगा। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पूरे मामले की गुप्त रूप से जांच शुरू की और ट्रैप टीम का गठन किया।


शुक्रवार को निगरानी विभाग ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। जैसे ही परमजय सिंह नियोजन भवन की पार्किंग में रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपये ले रहे थे, उसी दौरान निगरानी की विशेष टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद टीम ने उनसे पूछताछ शुरू की और इसके आधार पर उनके कंकड़बाग स्थित घर पर छापेमारी की गई।


छापेमारी के दौरान अधिकारियों को घर से 15 लाख रुपये से अधिक नकद मिले। इसके अलावा टीम को कई निवेश से जुड़े दस्तावेज भी हाथ लगे हैं। इन दस्तावेजों में संपत्ति और वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना जताई जा रही है। निगरानी विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह नकदी कहां से आई और क्या यह रिश्वत के जरिए इकट्ठा की गई रकम का हिस्सा है।


सूत्रों के अनुसार, बरामद कैश और दस्तावेज इस बात की ओर संकेत कर रहे हैं कि यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं हो सकता है। जांच एजेंसियां अब विभाग के अन्य अधिकारियों और संभावित नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं। इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


निगरानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग लगातार सरकारी योजनाओं और फंड के उपयोग की निगरानी कर रहा है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।