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Nitish Kumar : 76 वें वर्ष के हुए CM नीतीश कुमार; जानें बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड की नौकरी छोड़ कैसे किया राजनीति में एंट्री; इस छवि के पीछे का राज जानें

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 76वें वर्ष में प्रवेश किया। जानें उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत, जेपी आंदोलन में योगदान, लालू यादव के साथ दोस्ती और दूरी, चुनावी संघर्ष, और उनके अनुशासित निजी जीवन की अनसुनी बातें।

Nitish Kumar : 76 वें वर्ष के हुए CM नीतीश कुमार; जानें बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड की नौकरी छोड़ कैसे किया राजनीति में एंट्री; इस छवि के पीछे का राज जानें
Tejpratap
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Nitish Kumar : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को अपने जीवन के 76वें वर्ष में प्रवेश किया। उनका जन्म एक मार्च 1951 को पटना जिले के बख्तियारपुर में हुआ था। मुख्यमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर रविवार को राजधानी समेत राज्यभर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक सफ़र की शुरुआत कैसे हुई नहीं तो आइए बेहद कम समय में आपको बताते हैं उनका यह सफ़र। 


दरअसल, नीतीश कुमार को आमतौर पर एक सख्त, संतुलित और कम बोलने वाले नेता के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी अनसुनी और दिलचस्प बातें हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं।


1. राजनीति से पहले इंजीनियर, लेकिन दिल समाज सेवा में

नीतीश कुमार ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (आज का NIT पटना) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। वे कुछ समय तक बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में काम भी किए, लेकिन उनका मन नौकरी में नहीं लगा। अंदर से वे समाज और राजनीति में बदलाव लाना चाहते थे, इसलिए नौकरी छोड़कर आंदोलन की राह पकड़ ली।


2. शादी के बाद भी सादगी की मिसाल

उनकी शादी मंजू सिन्हा से हुई थी, लेकिन खास बात यह है कि वे राजनीति में इतने व्यस्त रहे कि पारिवारिक जीवन बेहद सादा और सीमित रहा। कहा जाता है कि उन्होंने कभी अपने परिवार को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया—जो भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उदाहरण है।


3. जेपी आंदोलन से निकला नेता

नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा की असली शुरुआत जयप्रकाश नारायण के आंदोलन (JP आंदोलन) से हुई। उस दौर में वे युवा नेता के रूप में उभरे और यहीं से उनकी पहचान बनी।


4. लालू यादव से दोस्ती और फिर दूरी

एक समय था जब नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव बेहद करीबी साथी थे। दोनों ने साथ मिलकर राजनीति की शुरुआत की, लेकिन बाद में विचारधारा और नेतृत्व को लेकर मतभेद बढ़े और दोनों अलग रास्तों पर चल पड़े। यही राजनीतिक दूरी बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी।


5. मुख्यमंत्री बनने से पहले की संघर्ष भरी हार

आज वे कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं, लेकिन शुरुआत में उन्हें कई चुनावी हार का सामना करना पड़ा। 1977 और 1980 में वे चुनाव हार गए थे। इसके बाद 1985 में पहली बार विधायक बने—यानी सफलता उन्हें तुरंत नहीं मिली।


6. “पलटी मार” वाली छवि के पीछे की रणनीति

लोग अक्सर उन्हें “पलटी मार” नेता कहते हैं, क्योंकि उन्होंने कई बार गठबंधन बदले—जैसे भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के बीच। लेकिन उनके करीबी मानते हैं कि यह उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिससे वे सत्ता में रहकर काम कर सकें।


7. निजी जीवन में बेहद अनुशासित

नीतीश कुमार बेहद अनुशासित जीवन जीते हैं—सुबह जल्दी उठना, नियमित दिनचर्या और सीमित खान-पान। वे दिखावे और प्रचार से भी दूरी बनाकर रखते हैं। नीतीश कुमार को “सुशासन बाबू” का नाम यूं ही नहीं मिला—उनकी छवि एक ऐसे नेता की रही है जो चुपचाप काम करता है और ज्यादा बोलने से बचता है।