पटना/लखीसराय : NEET री-परीक्षा 2026 में मूल परीक्षार्थियों की जगह स्कॉलर यानी फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठाने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। लखीसराय के किउल थाना कांड संख्या-64/2026 में EOU ने एक और नामजद आरोपी प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान प्रमोद ने पूरे खेल में अपनी भूमिका स्वीकार की है। उसके बयान से परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक सिस्टम के जरिए फर्जी परीक्षार्थियों की एंट्री कराने के नेटवर्क की कई अहम कड़ियां सामने आई हैं।
मामला 21 जून 2026 को आयोजित NEET री-परीक्षा 2026 से जुड़ा है। लखीसराय जिले के केंद्रीय विद्यालय, खगौर स्थित परीक्षा केंद्र पर मूल परीक्षार्थियों की जगह स्कॉलर के परीक्षा देने के लिए पहुंचने और पकड़े जाने के बाद इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच में परीक्षार्थियों, स्कॉलर, बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर समेत कुल 27 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला सामने आया।
बायोमेट्रिक टेंडर से शुरू हुआ खेल
EOU के अनुसंधान में गिरफ्तार प्रमोद कुमार की भूमिका बेहद अहम बताई जा रही है। करीब 25 वर्षीय प्रमोद कुमार, पिता महेंद्र यादव, ग्राम जहाना, पोस्ट बढ़हत, थाना हलसी, लखीसराय का रहने वाला है। उसे 9 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ में प्रमोद ने बताया कि उसने विकास कुमार और राहुल के माध्यम से लखीसराय में होने वाली NEET परीक्षा के बायोमेट्रिक कार्य का टेंडर लिया था। इसके बाद कथित तौर पर बायोमेट्रिक व्यवस्था से जुड़े लोगों की मदद लेकर परीक्षा केंद्र पर मूल परीक्षार्थियों की जगह स्कॉलर को प्रवेश दिलाने का रास्ता तैयार किया गया।
प्रमोद के बयान में मो. शहजाद, सुबोध और रोहित कुमार उर्फ मुरारी के नाम भी सामने आए हैं। EOU के मुताबिक, इन लोगों की मिलीभगत से बायोमेट्रिक ऑपरेटरों की मदद लेकर फर्जी परीक्षार्थियों को केंद्रीय विद्यालय, खगौर के परीक्षा केंद्र में प्रवेश कराया गया। यानी जिस बायोमेट्रिक व्यवस्था का मकसद परीक्षार्थी की पहचान पुख्ता करना था, उसी सिस्टम को कथित तौर पर फर्जीवाड़े के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई।
सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं जांच
EOU की जांच में यह मामला सिर्फ किउल थाना कांड संख्या-64/2026 तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। जांच एजेंसी के अनुसार प्रमोद कुमार और अन्य आरोपियों की संलिप्तता NEET परीक्षा से जुड़े लखीसराय जिले के कवैया थाना कांड संख्या-244/26 और 245/26 में भी पाई गई है।
इससे जांच एजेंसियों को आशंका है कि परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थियों को बैठाने का यह मामला किसी एक परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं हो सकता। इसी वजह से EOU अब आरोपियों के आपसी संपर्क, बायोमेट्रिक व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका और परीक्षा फर्जीवाड़े से जुड़े दूसरे मामलों के बीच कड़ियों की जांच कर रही है।
14 आरोपियों पर चार्जशीट, एक आरोपी दूसरे केस से रिमांड
इस मामले में EOU की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान पहले गिरफ्तार किए गए 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। वहीं, आरोपी रोहित कुमार उर्फ मुरारी को नवादा नगर थाना कांड संख्या-610/2026 से इस मामले में रिमांड पर लिया गया है। अब प्रमोद कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच में सामने आए उसके बयान और अन्य आरोपियों के साथ उसके कथित कनेक्शन की भी पड़ताल की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद प्रमोद कुमार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
EOU की नजर अब पूरे नेटवर्क पर
आर्थिक अपराध इकाई का फोकस अब सिर्फ परीक्षा केंद्र पर पकड़े गए स्कॉलर तक नहीं है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी परीक्षार्थियों को कौन उपलब्ध कराता था, मूल अभ्यर्थियों से संपर्क कैसे होता था, बायोमेट्रिक व्यवस्था में सेंध लगाने की योजना कैसे बनी और इस पूरे खेल से किसे आर्थिक फायदा पहुंच रहा था। EOU ने साफ किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक कराने, परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने और इस तरह के अपराध से आर्थिक लाभ कमाने वाले व्यक्ति या गिरोह के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
फिलहाल जांच के कई पहलू खुले हैं। EOU कांड में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का सत्यापन कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। NEET री-परीक्षा से जुड़े इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।




