1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 28 Jan 2026 08:50:34 AM IST
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NEET student death : जहानाबाद की एक नीट तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले में नए सबूत सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने इसे गंभीरतम आपराधिक साजिश मानते हुए जांच तेज कर दी है। पुलिस मुख्यालय ने घटना से जुड़े हॉस्टल, अस्पताल, छात्रा के परिवार और स्थानीय थाना एवं अनुमंडल पुलिस की भूमिका की विस्तार से जांच करने का निर्णय लिया है।
मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में एडीजी सीआईडी पारसनाथ और एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार के बीच लंबी बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, डीजीपी ने विधानसभा सत्र से पहले इस हाई-प्रोफाइल मामले का पूरी तरह खुलासा करने का निर्देश दिया है।
पुलिस मुख्यालय ने 59 बिंदुओं में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें से कम से कम 40 सवालों के जवाब तलाशने की जिम्मेदारी आईजी सेंट्रल और एसएसपी पटना को दी गई है। इसके लिए सिटी एसपी के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई है और टीम के प्रत्येक सदस्य को अलग-अलग स्पेशल टास्क सौंपा गया है। मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि हर बिंदु पर अलग टीम बनाएगी और हर पहलू की गहन जांच होगी।
जांच का एक महत्वपूर्ण केंद्र छात्रा के मोबाइल फोन से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट हैं। पुलिस अब छात्रा के मोबाइल नंबर से संचालित ऑनलाइन पेमेंट एप्स की जानकारी जुटा रही है। इसका मकसद यह समझना है कि लेन-देन किस प्रकार के थे, उनका समय क्या था और धन का स्रोत क्या था। जांच अधिकारियों के अनुसार, ये ट्रांजैक्शन छात्रा के जीवन के अंतिम चरण की परिस्थितियों को समझने में निर्णायक हो सकते हैं।
पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटना के दिन पीड़िता के कमरे में किसी का प्रवेश नहीं हुआ था। इस फुटेज की भी विस्तृत जांच का आदेश दिया गया है। वहीं, फॉरेंसिक सबूतों के मामले में यह देखना आवश्यक है कि घटनास्थल पर कोई प्रूफ नष्ट हुआ या उसका मूल स्वरूप नहीं रहा। इसी के लिए अब तक की पुलिस कार्यप्रणाली और थाना पुलिस द्वारा दर्ज किए गए रिकॉर्ड का मिलान भी किया जाएगा।मंगलवार को समिति ने पटना और जहानाबाद के चार लोगों से पूछताछ की। ये सभी छात्रा से किसी न किसी रूप से जुड़े हुए थे। हालांकि, पूछताछ के बाद सभी को घर जाने की अनुमति दे दी गई।
इस बीच पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पीड़िता के परिवार से पूछताछ क्यों कर रही है। इसके पीछे कारण प्रभात हॉस्पिटल के एक चिकित्सक के बयान में सामने आया कि छात्रा के मोबाइल से एक व्हाट्सएप संदेश भेजा गया था, जिसमें यह लिखा गया था कि परिवार इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं कराना चाहता। इस संदर्भ में औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कराया गया, लेकिन यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका कि वह संदेश किसने भेजा और किन परिस्थितियों में भेजा गया।
जांच के लिए विशेष टीमों को सभी संभावित पहलुओं की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें छात्रा के फोन, डिजिटल ट्रांजैक्शन, सीसीटीवी फुटेज, हॉस्टल रिकॉर्ड और अस्पताल रिकॉर्ड की जांच शामिल है। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा और हर सबूत की गंभीरता से पड़ताल की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह भी देख रही है कि क्या किसी तीसरे पक्ष की भूमिका इस मामले में है। इसके लिए पुलिस ने कई विशेषज्ञों की टीम बनाई है जो फॉरेंसिक, साइबर और वित्तीय लेन-देन के हर पहलू की जांच कर रही है।
इस मामले की संवेदनशीलता के कारण पुलिस ने सुरक्षा और गोपनीयता के कड़े प्रबंध किए हैं। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि सही और निष्पक्ष जांच के बाद ही घटना की वास्तविकता सामने आएगी। अधिकारियों का कहना है कि डीजीपी के निर्देशानुसार हाई-प्रोफाइल मामला जल्द से जल्द समाधान तक पहुंचाया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की अफवाह और गड़बड़ी को रोका जा सके।
इस मामले की जांच लगातार कई स्तरों पर चल रही है और पुलिस हर जानकारी को ध्यान से दस्तावेज कर रही है। छात्रों, परिवार और संबंधित संस्थानों से संपर्क के जरिए तथ्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि सभी संभावित पहलुओं पर गौर किया जा रहा है और जल्द ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में स्पष्ट निष्कर्ष सामने आएगा।