ब्रेकिंग
पश्चिम चंपारण बस हादसा: पांच लोगों की मौत के बाद सड़क पर उतरे परिजन, शव सड़क पर रखकर की मुआवजे की मांगलुंगी पहनकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे विधायक IP गुप्ता, पत्रकारों से बोले-‘मोदी जी मेरे सपने में आए थे’ पटना में डराने लगी गंगा: भद्र घाट और महावीर घाट की सड़क पर पानी; SDRF और NDRF को अलर्ट रहने के निर्देशस्कूल से लौट रही छात्रा पर धारदार हथियार से हमला, गर्दन पर गंभीर चोट; हालत नाजुक होमगार्ड जवान हत्याकांड: 9 साल बाद आया कोर्ट का फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद की सजापश्चिम चंपारण बस हादसा: पांच लोगों की मौत के बाद सड़क पर उतरे परिजन, शव सड़क पर रखकर की मुआवजे की मांगलुंगी पहनकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे विधायक IP गुप्ता, पत्रकारों से बोले-‘मोदी जी मेरे सपने में आए थे’ पटना में डराने लगी गंगा: भद्र घाट और महावीर घाट की सड़क पर पानी; SDRF और NDRF को अलर्ट रहने के निर्देशस्कूल से लौट रही छात्रा पर धारदार हथियार से हमला, गर्दन पर गंभीर चोट; हालत नाजुक होमगार्ड जवान हत्याकांड: 9 साल बाद आया कोर्ट का फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा

मुकेश सहनी ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र, मत्स्यजीवी सहयोग समिति का निर्वाचन खर्च माफ किए जाने की मांग

PATNA: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से मुकेश सहनी ने यह मांग की है कि मत्स्यजीवी सहयोग

मुकेश सहनी ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र, मत्स्यजीवी सहयोग समिति का निर्वाचन खर्च माफ किए जाने की मांग
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

PATNA: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से मुकेश सहनी ने यह मांग की है कि मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के चुनाव में लिया जाने वाला 5 हजार रुपये शुल्क सरकार वापस ले। 


वीआईपी संस्थापक मुकेश सहनी ने मुख्यमंत्री को अपने पत्र में पूर्व से बने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के चुनाव के लिए 7 सौ मतदाताओं पर सहयोग समितियों से 5 हजार रुपये की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा मत्स्यजीवी सहयोग समिति कमजोर वर्ग के व्यक्तियों का समूह है। 


निर्वाचन विभाग जून 2022 में मत्स्यजीवी सहयोग समितियों का चुनाव कराना चाहता है। निर्वाचन प्राधिकार वैसी समितियों के लिए चुनावी प्रक्रिया प्रारंभ करने जा रहा है जिन सहयोग समितियों ने शुल्क का भुगतान कर दिया है। लेकिन सबसे ज्यादा गरीब मछुआरों की संख्या हैं जो मत्स्यजीवी सहयोग समिति के चुनाव के शुल्क जमा करने की स्थिति में नहीं। 


इनकी माली हालत ऐसी नहीं कि पांच हजार रुपये का शुल्क अदा कर सकें। सहनी ने वर्ष 2027-17 का हवाला देकर कहा उक्त चुनाव में सरकार ने निर्धारित शुल्क के नियम को क्षांत कर दिया था। यह व्यवस्था सिर्फ एक वर्ष के लिए प्रभावी की गई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि 2017-18 की तरह यदि 2022 के चुनाव में भी शुल्क के नियमों को क्षांत किया जाए ताकि बड़ी संख्या में गरीब मछुआरा समूह चुनाव में भाग ले सके।

टैग्स