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Lalu Yadav birthday Controversy: बाबासाहब का अपमान पड़ा भारी, लालू यादव को हो सकती है जेल

Lalu Yadav birthday Controversy: राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ी कार्रवाई के संकेत देते हुए 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगने का आदेश जारी किया है.

Lalu Yadav birthday Controversy: बाबासाहब का अपमान पड़ा भारी, लालू यादव को हो सकती है जेल
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Viveka Nand
3 मिनट

Lalu Yadav birthday Controversy: राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ी कार्रवाई के संकेत देते हुए 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगने का आदेश जारी किया है। आयोग ने आरोप लगाया है कि हाल ही में अपने जन्मदिन के अवसर पर लालू प्रसाद यादव द्वारा सोशल मीडिया पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के एक फोटो का अपमान किया गया है, जो देशभर में व्यापक रूप से देखा और चर्चा का विषय बना हुआ है।


आयोग ने स्पष्ट किया है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल अनुसूचित जाति के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के संविधान निर्माता एवं समाज के सम्मानित नेता हैं। उनके प्रति की गई अपमानजनक हरकत पूरे देश की सामाजिक भावना को ठेस पहुंचाती है और यह संवैधानिक मूल्यों के भी विरुद्ध है।


राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष ने कहा, "डॉ. अंबेडकर के अपमान को सहन नहीं किया जाएगा। यह न केवल एक व्यक्ति के खिलाफ अपमान है, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ एक गंभीर चुनौती है। इसलिए आयोग ने लालू प्रसाद यादव से 15 दिन के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।" आयोग ने कहा है कि यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्यवाही की जाएगी।


इस मामले पर विपक्ष और समाजिक संगठनों की भी नजर है। कई दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की निंदा करते हुए सख्त कदम उठाने की मांग की है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता ने इस मामले में कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी है।


डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर भारत के संविधान निर्माता, समाज सुधारक और दलितों के महान नेता माने जाते हैं। उनका सम्मान भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की नींव है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अपमानजनक पोस्ट और वीडियो की बढ़ती संख्या ने सामाजिक विवाद को जन्म दिया है। ऐसे मामलों में न्यायालय और संबंधित आयोग संवैधानिक आदर्शों की रक्षा के लिए सतर्कता बरतते रहे हैं।