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Bihar News : ED और निगरानी विभाग को झटका! IAS के. सेंथिल कुमार समेत 4 लोग मनी लॉन्ड्रिंग केस में बरी, कोर्ट ने बंद किया पूरा ट्रायल

बिहार के चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वरिष्ठ IAS अधिकारी के. सेंथिल कुमार को बड़ी राहत मिली है। पटना की पीएमएलए विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें समेत चार आरोपियों को बरी करते हुए पूरे ट्रायल को बंद कर दिया।

Bihar News : ED और निगरानी विभाग को झटका! IAS के. सेंथिल कुमार समेत 4 लोग मनी लॉन्ड्रिंग केस में बरी, कोर्ट ने बंद किया पूरा ट्रायल
Tejpratap
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Bihar News :  बिहार में चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के. सेंथिल कुमार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। पटना सिविल कोर्ट स्थित पीएमएलए (धनशोधन निवारण अधिनियम) की विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद के. सेंथिल कुमार समेत चार आरोपियों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत के इस फैसले के साथ ही वर्षों से चल रही न्यायिक प्रक्रिया पर पूर्ण विराम लग गया है और मामले में ट्रायल को भी बंद कर दिया गया है।


अदालत के आदेश के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और निगरानी विभाग आरोपियों के खिलाफ ऐसे ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में सफल नहीं हो सके, जिनके आधार पर मुकदमे को आगे बढ़ाया जा सके। इसी कारण विशेष अदालत ने चारों आरोपियों को आरोपमुक्त करने का फैसला सुनाया। इस मामले में के. सेंथिल कुमार के अलावा उनके भाई के. अय्यप्पन, पटना नगर निगम के तत्कालीन अपर आयुक्त वैद्यनाथ दास और ठेकेदार विमल कुमार भी आरोपी बनाए गए थे। सभी को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में राहत प्रदान की है।


सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों की दलीलों को विस्तार से सुना। लंबी बहस के बाद न्यायालय ने पाया कि जांच एजेंसियों की ओर से प्रस्तुत सामग्री आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर मुकदमे को आगे बढ़ाने का कोई मजबूत आधार नहीं बनता है। इस पूरे मामले में पटना हाईकोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला भी निर्णायक साबित हुआ। दरअसल, हाईकोर्ट ने पहले ही इस मामले में पीएमएलए की विशेष अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द कर दिया था। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि मामले में कानूनी रूप से आगे की कार्रवाई उचित नहीं है। हाईकोर्ट के इसी निर्णय को आधार बनाकर विशेष अदालत ने अंतिम आदेश पारित किया।


जानकारी के अनुसार, पीएमएलए विशेष अदालत ने 15 सितंबर 2022 को ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट के आधार पर मामले में संज्ञान लिया था। इसके बाद चारों आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि, समय के साथ जांच एजेंसियां अदालत के समक्ष ऐसे प्रमाण पेश नहीं कर सकीं, जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके।


कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाएगा, जिनमें जांच एजेंसियों द्वारा पर्याप्त साक्ष्य जुटाने की आवश्यकता होती है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि केवल आरोप या आशंकाओं के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता, बल्कि आरोपों को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं।


इस फैसले के बाद के. सेंथिल कुमार और अन्य आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। वहीं, मामले के बंद होने के साथ ही कई वर्षों से चल रही कानूनी अनिश्चितता भी समाप्त हो गई है। अदालत के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धनशोधन का मामला साबित नहीं हो सका, इसलिए उन्हें आरोपमुक्त किया जाता है।पटना की विशेष अदालत के इस फैसले को बिहार के प्रशासनिक और कानूनी हलकों में एक महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।