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Bihar News : 550 करोड़ का महासेतु खतरे में! 5 और दरारें मिलीं, 12 इंच का गैप; कई जगह क्रैक मिलने के बाद भारी वाहनों पर रोक

गोपालगंज को पूर्वी चंपारण से जोड़ने वाले जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में लगातार बढ़ रही दरारों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पुल के कई स्पैन में क्रैक मिलने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

Bihar News : 550 करोड़ का महासेतु खतरे में!  5 और दरारें मिलीं, 12 इंच का गैप;  कई जगह क्रैक मिलने के बाद भारी वाहनों पर रोक
Tejpratap
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Bihar News : गोपालगंज और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाले गंडक नदी पर बने जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में लगातार बढ़ रही दरारों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पहले जहां पुल के केवल एक हिस्से में समस्या सामने आई थी, वहीं अब पुल के कई स्पैन में दरारें मिलने के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। सुरक्षा के मद्देनजर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई है और पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है।


जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि पुल के पाया संख्या 12 और 13 के बीच करीब 12 इंच का गैप पाया गया है। शुरुआती जांच में पहले केवल पाया संख्या 5 के पास दरार दिखाई दी थी, लेकिन अब पांच अलग-अलग स्थानों पर स्पैन में क्रैक मिलने से खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों की टीम को मौके पर बुलाया है, ताकि पुल की विस्तृत जांच कर जल्द मरम्मत की प्रक्रिया शुरू की जा सके।


डीएम ने कहा कि अगर दरारें और बढ़ती हैं तो पुल की मरम्मत और अधिक जटिल हो सकती है। इसी वजह से एहतियातन बड़े और भारी वाहनों के प्रवेश पर तत्काल रोक लगाई गई है। फिलहाल छोटे वाहनों की आवाजाही सीमित रूप से जारी है, लेकिन प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।


बताया जा रहा है कि भागलपुर के विक्रमशिला पुल हादसे के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिहार के सभी बड़े पुलों की तकनीकी जांच कराई जा रही है। इसी क्रम में जादोपुर-मंगलपुर महासेतु की भी जांच हुई थी, जिसमें कई जगहों पर संरचनात्मक कमजोरी के संकेत मिले। इंजीनियरों की रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए यह बड़ा फैसला लिया।


यह महासेतु उत्तर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन का एक अहम मार्ग माना जाता है। इसी पुल के जरिए यूपी के गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, सीवान और गोपालगंज से होकर नेपाल तक बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। भारी वाहनों पर रोक लगने से व्यापार, परिवहन और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है। ट्रक चालकों और कारोबारियों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है।


करीब 550 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल का उद्घाटन मार्च 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। लेकिन निर्माण के लगभग एक दशक के भीतर ही पुल में गंभीर तकनीकी खामियां सामने आने लगी हैं। ऐसे में निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।


दरअसल, यह पहला मौका नहीं है जब जादोपुर-मंगलपुर पुल विवादों में आया हो। दो साल पहले भी गंडक नदी में तेज कटाव और लगातार बारिश के कारण पुल की एप्रोच सड़क कई जगहों पर धंस गई थी। सड़क किनारे बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे, जिससे पुल की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा था। उस दौरान स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण एजेंसियों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। विरोध बढ़ने के बाद प्रशासन ने कटाव निरोधी कार्य और गाइड बांध की मरम्मत कराई थी।


हाल के दिनों में जब पुल के दो खंभों के बीच पहला गैप मिला था, तभी प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया था। अब लगातार बढ़ती दरारों और पाया संख्या 5 के धंसने की खबर के बाद लोगों में भय का माहौल है। स्थानीय लोग पुल की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल जिला प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।