ब्रेकिंग
राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, रवि किशन की फिसली जुबान, बार-बार किया 'कोहनी' शब्द का यूज✦बिहार के इस एयरपोर्ट की बदलेगी सूरत... दो कंपनियों ने लगाई बोली, रनवे से टर्मिनल तक होगा बड़ा बदलाव✦'कई बच्चे घंटों तक जीवित थे लेकिन लापरवाही ने उनकी जान ले ली', राघोपुर नाव हादसे पर तेजस्वी यादव का सरकार पर आरोप✦अब ATM से पैसे की तरह निकलेगा राशन, डीलरों की मनमानी होगी खत्म✦गरबा में एंट्री से पहले गौमूत्र पिलाने की सलाह, बाबा बागेश्वर बोले- बेटियों दुर्गा बनना, बुर्के वाली नहीं✦राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, रवि किशन की फिसली जुबान, बार-बार किया 'कोहनी' शब्द का यूज✦बिहार के इस एयरपोर्ट की बदलेगी सूरत... दो कंपनियों ने लगाई बोली, रनवे से टर्मिनल तक होगा बड़ा बदलाव✦'कई बच्चे घंटों तक जीवित थे लेकिन लापरवाही ने उनकी जान ले ली', राघोपुर नाव हादसे पर तेजस्वी यादव का सरकार पर आरोप✦अब ATM से पैसे की तरह निकलेगा राशन, डीलरों की मनमानी होगी खत्म✦गरबा में एंट्री से पहले गौमूत्र पिलाने की सलाह, बाबा बागेश्वर बोले- बेटियों दुर्गा बनना, बुर्के वाली नहीं

Bihar railway news : दरभंगा से वाराणसी तक दौड़ेगी नई वंदे भारत! दो रूटों पर मंथन, बिहार–यूपी कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव

दरभंगा से वाराणसी के बीच नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की तैयारी तेज है। रेलवे दो रूटों पर मंथन कर रहा है, जिससे बिहार और यूपी की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

Bihar railway news : दरभंगा से वाराणसी तक दौड़ेगी नई वंदे भारत! दो रूटों पर मंथन, बिहार–यूपी कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar railway news : बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच रेलवे कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी पहल की तैयारी चल रही है। रेलवे जल्द ही दरभंगा से वाराणसी के बीच नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन शुरू करने पर विचार कर रहा है। इस प्रस्तावित ट्रेन के रूट और संचालन को लेकर रेलवे के अधिकारी स्तर पर गहन मंथन जारी है। यह सेमी हाई स्पीड ट्रेन उत्तर बिहार के यात्रियों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो काशी विश्वनाथ के दर्शन या व्यापारिक कार्यों के लिए वाराणसी की यात्रा करते हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस नई वंदे भारत एक्सप्रेस के लिए दो प्रमुख रूटों पर विचार किया जा रहा है। पहला विकल्प है कि ट्रेन को दरभंगा से मुजफ्फरपुर होते हुए हाजीपुर, छपरा और बलिया के रास्ते वाराणसी तक चलाया जाए। इस रूट को इसलिए प्राथमिकता मिलने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि इसमें ट्रैफिक अपेक्षाकृत कम है और परिचालन अधिक सुगम हो सकता है। रेलवे के समस्तीपुर मंडल ने इस रूट पर समय सारणी तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।


दूसरा प्रस्तावित रूट दरभंगा से समस्तीपुर होते हुए बरौनी, मोकामा और पटना के रास्ते वाराणसी तक का है। हालांकि यह मार्ग अधिक विकसित और प्रमुख है, लेकिन यहां ट्रेनों की भीड़ और रेल यातायात का दबाव अधिक होने के कारण इस रूट पर वंदे भारत के संचालन में तकनीकी और समय संबंधी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इसी कारण रेलवे अधिकारी इस विकल्प को लेकर अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं, लेकिन दोनों रूटों पर समानांतर रूप से अध्ययन किया जा रहा है।


सूत्रों के अनुसार, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी दोनों रूटों पर संभावित समय और संचालन व्यवस्था का विस्तृत खाका तैयार कर रहे हैं। अंतिम निर्णय रेलवे बोर्ड द्वारा सभी तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की समीक्षा के बाद लिया जाएगा। माना जा रहा है कि मुजफ्फरपुर-हाजीपुर रूट को अधिक प्राथमिकता मिल सकती है।


यदि यह ट्रेन मुजफ्फरपुर रूट से चलाई जाती है, तो यह इस क्षेत्र की तीसरी वंदे भारत एक्सप्रेस होगी। इससे पहले भी मुजफ्फरपुर होकर दो वंदे भारत ट्रेनें गुजर रही हैं। इनमें गोरखपुर से पाटलिपुत्र वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल है, जो बेतिया, बापूधाम मोतिहारी और मुजफ्फरपुर के रास्ते चलती है। इसके अलावा जोगबनी से दानापुर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन भी मुजफ्फरपुर होकर ही संचालित होती है।


रेलवे अधिकारियों का कहना है कि उत्तर बिहार और वाराणसी के बीच यात्रियों की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर के कारण धार्मिक यात्रियों की संख्या अधिक रहती है। वर्तमान में इस रूट पर सीमित ट्रेनें ही उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों को टिकट और यात्रा दोनों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।


मौजूदा समय में जयनगर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस पवन एक्सप्रेस और जयनगर-नई दिल्ली स्वतंत्रता सेनानी सुपरफास्ट एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें वाराणसी होकर गुजरती हैं, लेकिन ये ट्रेनें यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा कुछ साप्ताहिक ट्रेनें भी इस मार्ग से संचालित होती हैं।


अगर दरभंगा-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस को मंजूरी मिलती है तो यह यात्रा समय को काफी कम कर देगी और यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा। साथ ही सीटों की उपलब्धता भी बेहतर होगी, जिससे उत्तर बिहार के लाखों यात्रियों को सीधा लाभ पहुंचेगा।रेलवे के इस प्रस्ताव से उत्तर बिहार और पूर्वांचल के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।