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Chhath Puja: लोक आस्था का महापर्व छठ, खरना का शुभ मुहूर्त जानिए

लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा आज नहाय-खाय के साथ आरंभ हो गया है। कल 26 अक्टूबर को खरना (लोहंडा) का व्रत रखा जाएगा, जो सूर्य उपासना और शुद्ध आहार का प्रतीक माना जाता है।

बिहार
चार दिवसीय महापर्व की शुरुआत
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

Chhath Puja: नहाय-खाय के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत आज से हो गयी। चार दिवसीय इस महापर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। कल 26 अक्टूबर को खरना है जिसे लोहंडा भी कहते हैं। 


खरना के प्रसाद का भी अलग महत्व होता है। जिस घर में छठ व्रत होता है, वहां प्रसाद को ग्रहण करने के लिए लोग पहुंचते हैं और छठव्रति का पैर छूकर आशीर्वाद मांगते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन छठव्रती की भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य भगवान और छठी मईया परिवार के सदस्यों को आरोग्य रहने का आशीर्वाद देते हैं। पूजा और प्रसाद अर्पण का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 6 मिनट तक है। 


चार दिवसीय महापर्व छठ के पहले दिन छठव्रतियों ने गंगा नदी में स्नान करने के बाद भगवान सूर्य की अराधना करती हैं और घर पहुंचकर नहाय-खाय का प्रसाद बनाती हैं। अरवा चावल का भात, चना दाल, कद्दू की सब्जी, आलू-गोभी की सब्जी, चटनी और पकौड़ी को पहले भगवान को भोग लगाने के बाद ही उसे खुद ग्रहण करती हैं और पूरे परिवार और रिश्तेदार को खाने के लिए छठव्रती देती हैं। फिर अगले दिन खरना पूजा की तैयारी में लग जाती हैं। खरना पूजा को लोहंडा भी कहते हैं, जो 26 अक्टूबर रविवार की शाम को है। खरना पूजा और प्रसाद अर्पण शाम 5:41 के बाद कर सकते हैं। खरना का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 41 मिनट से शाम 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। 


इस दिन छठव्रति गुड़ और चीनी का खीर मिट्टी के चूल्हे पर बनाती है। वही गेहूं की रोटी और केला को खीर के साथ पहले भगवान को चढ़ाती हैं फिर पूजा-अर्चना के बाद खरना के प्रसाद को छठव्रती खुद ग्रहण करती हैं, उसके पूरे परिवार और रिश्तेदारों को खरना का प्रसाद दिया जाता है। खरना पूजा के साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत की शुरुआत होता है। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के लिए लोग दूर-दराज के क्षेत्र से भी आते हैं। खरना पूजा के बाद अगले दिन छठव्रति शाम में अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देगी फिर अगले दिन सुबह में उदयगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगी। भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण के साथ ही महापर्व छठ का समापन होगा।  

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