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बिजली आपूर्ति व्यवस्था के निजीकरण का मसौदा तैयार, केंद्र ने राज्यों से मांगी राय

PATNA : बिजली सप्लाई के निजीकरण के लिए एक बार फिर केन्द्र सरकार ने कवायद शुरु कर दी हैं। सरकार ने इसका ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। केन्द्र सरकार ने बिहार समेत तमाम राज्यों से इसपर

FirstBihar
Anurag Goel
2 मिनट

PATNA : बिजली सप्लाई के निजीकरण के लिए एक बार फिर केन्द्र सरकार ने कवायद शुरु कर दी हैं। सरकार ने इसका ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। केन्द्र सरकार ने बिहार समेत तमाम राज्यों से इसपर उनकी राय मांगी है। बिजली का निजीकरण होते ही मिलने वाला अनुदान खत्म हो जाएगा। इसके बाद लोगों को अभी के मुकाबले अधिक महंगी बिजली मिलेगी।


केन्द्र सरकार के उर्जा मंत्रालय के चीफ इंजीनियर घनश्याम प्रसाद की ओर से सभी राज्यों के बिजली कंपनियों के एमडी-सीएमडी को पत्र भेजा गया है। निजीकरण  को लेकर तैयार 22 पन्ने के प्रस्ताव में कहा गया है कि यह कानून पूरे देश में लागू होगा। इसमें अनुदान का प्रावधान नहीं होगा। निजीकरण के लिए एजेंसी या संस्था का चयन डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां करेंगी। राज्य या राज्य के बाहर बिजली भेजने का निर्णय भी कंपनी ही करेगी। गैर परम्परागत ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भी एक राष्ट्रीय नीति बनाने का प्रस्ताव मसौदा में है।


बता दें कि अभी बिहार सरकार हर साल हजारों करोड़ का अनुदान देकर लोगों को सस्ती बिजली देती है। बिहार में मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर में बिजली आपूर्ति की  व्यवस्था निजी एजेंसियों को 2013 में दी गयी थी। निजीकरण के तौर पर हुआ यह प्रयोग तीनों शहरों में फेल रहा था। बिजली आपूर्ति से जुड़ी तमाम सेवाएं बद से बदतर हो गयी थी। वहीं बीते 13 फरवरी को बिहार के उर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने केन्द्रीय उर्जा राज्य मंत्री  पत्र भेजकर निजीकरण का विरोध किया था।