Bihar New Building Rules: बिहार के ग्रामीण इलाकों में बड़े मकान, अपार्टमेंट और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट बनाने वालों के लिए नियमों में बदलाव की तैयारी है. शहरों की तरह अब गांवों में भी बड़े निर्माण को लेकर निगरानी और स्वीकृति की व्यवस्था मजबूत करने का प्रस्ताव है. खासतौर पर बड़े और बहुमंजिला भवनों के निर्माण को जिला स्तर की निगरानी व्यवस्था के दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है.
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बड़े निर्माण से जुड़े मामलों की जांच और स्वीकृति में जिला स्तर पर गठित विशेष कमेटी की भूमिका होगी. इस कमेटी की अध्यक्षता डीडीसी कर सकते हैं. इसमें पंचायती राज, जिला परिषद, विधि और राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल होंगे. बड़े निर्माण प्रस्तावों की जांच और उनसे जुड़ी स्वीकृति प्रक्रिया में कमेटी की महत्वपूर्ण भूमिका तय की जा सकती है.
500 वर्गमीटर से अधिक की परियोजनाओं पर बढ़ेगी निगरानी
प्रस्तावित नियमों के अनुसार 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में विकसित होने वाली रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण जरूरी हो सकता है. ऐसे प्रोजेक्ट में बिल्डर को लेआउट, जरूरी स्वीकृतियों और निर्माण से संबंधित जानकारी उपलब्ध करानी होगी.
इसका सीधा असर उन ग्रामीण इलाकों में तेजी से विकसित हो रहे बड़े प्रोजेक्ट पर पड़ेगा, जहां जमीन पर अपार्टमेंट या अन्य व्यावसायिक भवनों का निर्माण किया जा रहा है.
बिल्डरों के लिए भी तय होगी जवाबदेही
प्रस्तावित व्यवस्था में बिल्डरों की जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया गया है. खरीदारों से मिलने वाली रकम का 70 प्रतिशत अलग बैंक खाते में रखने का प्रावधान बताया गया है. इस राशि का इस्तेमाल संबंधित परियोजना के निर्धारित निर्माण और जमीन से जुड़े खर्च में ही किया जा सकेगा.
इस व्यवस्था का उद्देश्य परियोजना के लिए जमा रकम के दूसरे कामों में इस्तेमाल को रोकना और निर्माण कार्य को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी तय करना है.
समय पर घर नहीं मिला तो खरीदार को मिल सकती है राहत
अगर बिल्डर तय समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी नहीं करता है तो खरीदारों को राहत देने का भी प्रावधान प्रस्तावित है. देरी की स्थिति में ब्याज और मुआवजे से जुड़ी व्यवस्था लागू हो सकती है.
ग्रामीण इलाकों में अपार्टमेंट या फ्लैट खरीदने वाले लोगों के लिए यह प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे परियोजना में देरी होने की स्थिति में खरीदार के हितों की सुरक्षा हो सकेगी.
निर्माण में गंभीर खामी मिली तो पांच साल तक जिम्मेदारी
प्रस्तावित नियमों में निर्माण पूरा होने के बाद भी बिल्डर की जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है. पांच साल के भीतर गंभीर निर्माण या संरचनात्मक दोष सामने आने पर बिल्डर को उसे बिना अतिरिक्त शुल्क ठीक करना पड़ सकता है.
इससे निर्माण की गुणवत्ता को लेकर बिल्डरों पर जवाबदेही बढ़ेगी और खरीदारों को निर्माण संबंधी गंभीर खामियों की स्थिति में राहत मिल सकेगी.
कार्पेट एरिया की जानकारी देना होगा जरूरी
फ्लैट की बिक्री के दौरान बिल्ट-अप एरिया और कार्पेट एरिया की जानकारी स्पष्ट रूप से देने का प्रावधान भी प्रस्तावित है. इससे खरीदार को यह पता चल सकेगा कि उसे वास्तव में कितना उपयोगी क्षेत्र मिल रहा है.
कार्पेट एरिया को लेकर खरीदारों और बिल्डरों के बीच होने वाले विवाद को कम करने में भी यह व्यवस्था मददगार हो सकती है.
छोटे मकानों को प्रस्तावित नियमों से राहत
प्रस्तावित व्यवस्था में हर तरह के ग्रामीण मकान को अनिवार्य नक्शा स्वीकृति के दायरे में लाने की बात नहीं है. 500 वर्गमीटर तक की छोटी परियोजनाओं और सामान्य ग्राउंड प्लस दो मंजिला मकानों को इससे बाहर रखने का प्रावधान बताया गया है.
यानी सामान्य ग्रामीण मकान बनाने वालों पर बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट जैसी शर्तें लागू नहीं होंगी. बड़े क्षेत्र में बनने वाली परियोजनाओं या अधिक मंजिल वाले निर्माण पर नियमों का दायरा बढ़ सकता है.
शहरों से सटे ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में बड़े भवनों और अपार्टमेंट का निर्माण तेजी से बढ़ा है. कई जगह बिना पर्याप्त पार्किंग, सड़क और जल निकासी की व्यवस्था के निर्माण होने से स्थानीय स्तर पर समस्याएं सामने आती रही हैं.
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े निर्माण को व्यवस्थित करने और उनकी निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है.
फिलहाल यह व्यवस्था प्रस्तावित स्तर पर है. विस्तृत नियमावली और अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस तरह के निर्माण पर कौन-कौन से नियम लागू होंगे, आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी और नक्शा स्वीकृति के लिए किन शर्तों को पूरा करना होगा.





