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Bihar News : अब नहीं चलेगी यूनिवर्सिटी में लेटलतीफी! बिहार में ‘समर्थ पोर्टल’ से बदलेगी पूरी शिक्षा व्यवस्था; परीक्षा और रिजल्ट सब होगा ऑनलाइन

बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में समर्थ पोर्टल लागू होगा। अब एडमिशन, परीक्षा, रिजल्ट, वेतन और उपस्थिति समेत सभी काम ऑनलाइन होंगे। राज्यपाल ने पारदर्शिता और समयबद्ध शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा फैसला लिया।

Bihar News :  अब नहीं चलेगी यूनिवर्सिटी में लेटलतीफी! बिहार में ‘समर्थ पोर्टल’ से बदलेगी पूरी शिक्षा व्यवस्था; परीक्षा और रिजल्ट सब होगा ऑनलाइन
Tejpratap
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Bihar News : बिहार के विश्वविद्यालयों में अब पढ़ाई से लेकर प्रशासन तक सबकुछ डिजिटल और पारदर्शी तरीके से संचालित होगा। उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शैक्षणिक सत्र को नियमित करने के उद्देश्य से लोकभवन (राजभवन) ने बड़ा फैसला लिया है। राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘समर्थ पोर्टल’ को मिशन मोड में लागू करने का निर्देश दिया है। इस फैसले को बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल सुधार माना जा रहा है।


राजभवन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अब विश्वविद्यालयों के अधिकांश प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य ऑनलाइन माध्यम से समर्थ पोर्टल पर ही किए जाएंगे। विद्यार्थियों के एडमिशन, परीक्षा फॉर्म भरने, एडमिट कार्ड जारी करने और रिजल्ट प्रकाशित करने तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित होगी। इससे छात्रों को बार-बार विश्वविद्यालय या कॉलेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और कामकाज में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।


केवल छात्र सेवाएं ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े कार्य भी अब इसी पोर्टल के माध्यम से निपटाए जाएंगे। शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति, अवकाश प्रबंधन, सेवा से संबंधित मामलों और वेतन भुगतान जैसी प्रक्रियाएं भी ऑनलाइन होंगी। इससे फाइलों के लंबित रहने और अनावश्यक देरी की समस्या कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।


राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं। अब सभी विश्वविद्यालयों में मुख्य सतर्कता अधिकारी यानी सीवीओ नियुक्त किए जाएंगे। ये अधिकारी विश्वविद्यालयों के दैनिक प्रशासनिक कामकाज और वित्तीय लेन-देन पर नजर रखेंगे। साथ ही सरकार से मिलने वाले अनुदान और खर्च का हिसाब भी समय पर देना अनिवार्य होगा। कुलाधिपति ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और विश्वविद्यालयों को समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करना होगा।


राजभवन ने विश्वविद्यालयों में वर्षों से चली आ रही शैक्षणिक लेटलतीफी पर भी चिंता जताई है। इसी वजह से अब अकादमिक कैलेंडर का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। परीक्षाएं तय समय पर आयोजित होंगी और रिजल्ट भी निर्धारित समय-सीमा के भीतर जारी करना होगा। इसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा, क्योंकि लंबे समय से सत्र में देरी के कारण लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता रहा है।


नई व्यवस्था के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा। समर्थ पोर्टल के प्रभावी संचालन और उत्कृष्ट कार्य करने वाले विश्वविद्यालयों को एक लाख रुपये तक की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की गई है। इससे विश्वविद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और डिजिटल व्यवस्था को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा छात्राओं को मिलने वाली विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं और छात्रवृत्ति राशि के भुगतान में भी तेजी आने की उम्मीद है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए रिकॉर्ड प्रबंधन आसान होगा और लाभार्थियों तक राशि समय पर पहुंच सकेगी।


राजभवन का मानना है कि यह पहल बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। पहली बार राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा बल्कि छात्रों को भी सुविधाजनक और समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी। आने वाले समय में यह बदलाव बिहार के विश्वविद्यालयों की तस्वीर बदलने वाला बड़ा सुधार माना जा रहा है।