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Bihar Transport: बिहार में ATS का बड़ा झोल...MoRTH के सबसे बड़े आरोप- 'गाड़ियों की भौतिक उपस्थिति' की जांच' हुई क्या..? CCTV फुटेज ही नहीं मिला और परिवहन विभाग ने 3 एटीएस को खोलने की कर दी सिफारिश

Bihar Transport News: मोर्थ के गंभीर आरोप—बिना भौतिक उपस्थिति के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी—की जांच पूरी हुए बिना ही बिहार सरकार ने तीन बंद ATS को खोलने की सिफारिश कर दी है. जानिए पूरी रिपोर्ट और विवाद.

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Viveka Nand
6 मिनट

Bihar Transport: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बिहार के तीन स्वचालित वाहन जांच केंद्रों (ATS) को तत्काल प्रभाव से बंद किया था. साथ ही परिवहन कमिश्नर को जांच करने को कहा था. मोर्थ ने अपने पत्र में कहा था कि बंद किए गए एटीएस ने वाहनों की भौतिक उपस्थिति के बिना ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए हैं, साथ ही वाहनों के परीक्षण के दौरान परीक्षण परिणामों में हेरफेर किया है। इसकी जांच करें. क्यों कि एटीएस के खिलाफ मिले रिपोर्टों/शिकायतों के विश्लेषण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है. सड़क परिवहन मंत्रालय ने 1 सितंबर 2025 को यह पत्र जारी किया था.

सबसे बड़े आरोप की जांच ही नहीं हुई, 15 जनवरी को भेज दी गई रिपोर्ट 

सड़क परिवहन मंत्रालय के सबसे बड़े आरोप बिना भौतिक उपस्थिति के ही गाड़ियों के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए गए, सबसे बड़े आरोप की जांच पूर्ण हुई ही नहीं और बिहार ने अपनी जांच रिपोर्ट परिवहन मंत्रालय को भेज दिया. रिपोर्ट में मोर्थ द्वारा बंद किए तीनों स्वचालित परीक्षण केंद्रों को खोलने का आग्रह किया गया है. बिहार के परिवहन कमिश्नर ने 15 जनवरी 2026 को सड़क परिवहन मंत्रालय को पत्र भेजा है. Morth को भेजे पत्र में बिहार के परिवहन कमिश्नर ने सभी बंद एटीएस को चालू करने की वकालत की है. मोर्थ को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि  तीन एटीएस केंद्रों में से, एक केंद्र पर जीएसआर 652ई मानदंडों का अनुपालन नहीं पाया गया। जबकि अन्य दो एटीएस केंद्रों पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट और विभागीय निरीक्षण दल को नियमों का कोई स्पष्ट उल्लंघन नहीं मिला। यह भी उल्लेख करना उचित होगा कि राज्य में स्थित एटीएस द्वारा किसी भी प्रकार की अनियमितता के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने का एकमात्र अधिकार पंजीकरण प्राधिकारी के पास है। ऐसे में हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इन तीनों एटीएस के एएफएमएस एक्सेस को बहाल करें। बिहार के परिवहन विभाग की तरफ से विस्तृत रिपोर्ट परिवहन मंत्रालय को भेजी गई है. 

एटीएस संचालकों को छह माह तक सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखना है  

बता दें, मोर्थ ने 1 सितंबर 2025 को फर्जीवाड़े के आरोप में तीन स्वचालित वाहन फिटनेस जांच केंद्रों को बंद कर दिया था. साथ ही राज्य सरकार के परिवहन विभाग को आदेश दिया था कि जांच टीम गठित कर वैसे सभी केंद्रों की जांच कर रिपोर्ट MORTH को दें. दरअसल, इन एटीएस पर आरोप हैं कि गाड़ी के सेंटर्स पर पहुंचे बिना फिटनेस का प्रमाण पत्र जारी किया गया. मंत्रालय के राजपत्र में कहा गया है कि एटीएस सीसीटीवी से लैश होंगे, साथ ही फुटेज को छह माह तक सुरक्षित रखना है. इतना ही नहीं राज्य या केंद्र सरकार की एजेंसी को अगर जरूरत पड़ी तो संग्रहित सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराना होगा. लेकिन यहां के एटीएस संचालक जांच टीम को सीसीटीवी फुटेज ही नहीं दे रहे.

बिना गाड़ी जांच ही सर्टिफिकेट देने पर तीन एटीएस हैं बंद

सड़क परिवहन मंत्रालय का जो राजपत्र है, उसमें एटीएस संचालन को लेकर जारी गाइडलाइन का जिक्र है. सड़क परिवहन मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि प्रत्येक सुविधा केंद्र के प्रवेश द्वार और प्रत्येक कंसोल के अंत में सीसीटीवी कैमरे लगाना है. ताकि वाहन के संपुर्ण परीक्षण की सुस्पष्ट दृश्यता और व्यापक कवरेज सुनिश्चित हो सके. साथ ही डेटा को छह माह की अवधि तक  संग्रहित किया जाना चाहिए. इसके अतिरिक्त राज्य या संघ राज्य क्षेत्र सरकार द्वारा आवश्यकतानुसार, सुविधा में संस्थापित सीसीटीवी फुटेज तक पहुंच अधिकृत एजेंसियों को प्रदान की जा सकती है.

सबसे बड़े आरोप की नहीं हुई जांच..सीसीटीवी फुटेज ही नहीं था.. और रिपोर्ट भेज दी गई

सड़क परिवहन मंत्रालय ने बिहार की तीन व दो अन्य राज्यों के 1-1- एटीएस को गाड़ियों का भौतिक परीक्षण किए बिना सर्टिफिकेट देने की शिकायत,प्रमाण मिलने के बाद बंद करने का आदेश जारी किया था. साथ इस बिंदु की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा था. मोर्थ के पत्र के आलोक में परिवहन विभाग में एडिशनल सेक्रेट्री के नेतृत्व में कमेटी बनाई गई. जांच टीम रिपोर्ट तैयार करने के लिए दिसंबर 2025 में बंद पड़े एक एटीएस पर गई. टीम ने सीसीटीवी फुटेज की मांग की तो बताया गया कि स्वचालित परीक्षण केंद्र का AFMS एक्सेस सितंबर 2025 से ही बंद है. साथ ही सीसीटीवी फुटेज की स्टोरेज क्षमता 8 टीबी ही है. लिहाजा संचालक जांच कमेटी को सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखा पाए. कमेटी जब सीसीटीवी फुटेज ही नहीं देख पाई तो पूर्व में जिस गाड़ियों के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए गए, वो गाड़ियां एटीएस तक पहुंची या नहीं, इसकी जांच ही नहीं हो पाई. यानि सबसे बड़े आरोप (गाड़ियों का भौतिक परीक्षण किया गया या नहीं) इसका कोई निष्कर्ष नहीं निकला. हालांकि सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से स्पष्ट गाइडलाइन है कि एटीएस संचालक को सीसीटीवी फुटेज को छह महीने तक संग्रहित रखना है. हालांकि जांच टीम ने भले ही सीसीटीवी फुटेज नहीं देखा,इसके बाद भी बंद पड़े सभी एटीएस को क्लीनचिट देते हुए एक्सेस देने की मांग की है. 

बता दें, बिहार में संचालित स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्रों पर बड़ा खेल हो रहा है. लगातार मिल रही शिकायतों के बाद फर्जीवाड़ा करने वाले तीन एटीएस पर मोर्थ का डंडा चला है. इसके बाद भी फर्जीवाड़ा रूकने का नाम नहीं ले रहा. वर्तमान में संचालित अन्य एटीएस के बारे में भी इस तरह की शिकायत मिल रही है कि सेंटर तक गाड़ी पहुंचे ही, फिटनेस का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जा रहा.

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

Viveka Nand

FirstBihar संवाददाता

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