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Bihar Sand Mining: बिहार में 52% से ज्यादा बालूघाटों की नीलामी अटकी, 650 करोड़ से अधिक राजस्व का नुकसान

बिहार में वित्तीय वर्ष 2026-27 के चार महीने बीत गए, लेकिन 52% से ज्यादा बालूघाटों की नीलामी अब तक पूरी नहीं हुई। करीब 600 घाटों के लंबित रहने से सरकार को 650 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व नुकसान का अनुमान है। विभाग ने जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

Bihar Sand Mining: बिहार में 52% से ज्यादा बालूघाटों की नीलामी अटकी, 650 करोड़ से अधिक राजस्व का नुकसान
Tejpratap
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पटना: वित्तीय वर्ष 2026-27 के चार महीने बीतने के बावजूद बिहार में आधे से अधिक बालूघाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। राज्य में करीब 52 फीसदी से ज्यादा बालूघाट अब भी अनिलामित हैं। समय पर बंदोबस्ती नहीं होने से राज्य सरकार को 650 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित राजस्व नुकसान का अनुमान है। वहीं, बंद बालूघाटों की प्रभावी निगरानी नहीं होने से अवैध खनन की आशंका भी बनी हुई है। वैध रूप से बालू की उपलब्धता कम होने का असर आने वाले दिनों में इसकी कीमतों पर भी पड़ सकता है।

खान एवं भूतत्व विभाग ने करीब 600 बालूघाटों के अब तक अनिलामित रहने पर चिंता जताई है। विभाग ने सभी सहायक निदेशकों और खनिज विकास पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में नीलामी लंबित रहने के कारणों की गहन समीक्षा करने का निर्देश दिया है। साथ ही जिलाधिकारियों के साथ समन्वय कर लंबित प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने और बालूघाटों की नीलामी के लिए अविलंब निविदा जारी करने को कहा गया है।

पीले और सफेद बालू के कितने घाटों की हुई नीलामी?

राज्य में पीले बालू के कुल 466 और सफेद बालू के 541 बालूघाट हैं। इनमें पीले बालू के 378 घाटों की नीलामी पूरी हो चुकी है, लेकिन इनमें से सिर्फ 199 घाटों का संचालन शुरू हो पाया है। दूसरी ओर सफेद बालू के कुल 541 घाटों में केवल 103 की नीलामी पूरी हुई है। इनमें भी महज 37 बालूघाट ही संचालित हो रहे हैं।

इस तरह सफेद बालू के 438 घाट अब भी अनिलामित हैं। नीलामी हो चुके कई घाट भी जरूरी अनुमतियां नहीं मिलने के कारण शुरू नहीं हो सके हैं। इनमें पर्यावरणीय स्वीकृति समेत अन्य प्रक्रियाएं शामिल हैं। फिलहाल मॉनसून के कारण राज्य में 15 अक्टूबर तक बालू खनन पर रोक लगी हुई है। हालांकि बंदोबस्तधारियों को पहले से खनन किए गए बालू का भंडारण और उसकी बिक्री करने का लाइसेंस दिया गया है।

लोक सुनवाई और पर्यावरणीय स्वीकृति बनी बाधा

बालूघाटों की बंदोबस्ती अलग-अलग चरणों में अटकी हुई है। कई स्थानों पर जिलावार लोक सुनवाई नहीं होने के कारण नीलामी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। औरंगाबाद के 12 और अरवल के 11 समेत कुल 36 बालूघाट इसी वजह से लंबित बताए जा रहे हैं। इन घाटों की बंदोबस्ती नहीं होने से करीब 250 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है। इसके अलावा 10 जिलों के 33 बालूघाटों की पर्यावरणीय स्वीकृति यानी ईसी लंबे समय से लंबित है। इस वजह से भी करीब 250 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व की प्राप्ति नहीं हो पा रही है।

टर्म ऑफ रेफरेंस और जिला खनन योजना भी बनी अड़चन

कुछ बालूघाटों की नीलामी प्रक्रिया टर्म ऑफ रेफरेंस तैयार नहीं होने के कारण अटकी हुई है। पटना के सात और बांका के चार सहित कुल 22 बालूघाट इस श्रेणी में शामिल हैं। इसके कारण करीब 150 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है। वहीं, 18 बालूघाट ऐसे हैं, जिनकी जिला खनन योजना अभी तक तैयार नहीं हो सकी है। इन घाटों की बंदोबस्ती पूरी होने पर सरकार को करीब 34.55 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति हो सकती है।

अवैध खनन पर भी बढ़ सकती है चिंता

बालूघाटों की नीलामी और संचालन में देरी का असर सिर्फ सरकारी राजस्व तक सीमित नहीं है। पर्याप्त संख्या में वैध बालूघाट संचालित नहीं होने पर निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे बाजार में बालू की कीमत बढ़ने की संभावना है।

वहीं, जिन घाटों की नीलामी नहीं हुई है, वहां नियमित निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण जरूरी है। विभाग ने लंबित प्रक्रियाओं की समीक्षा कर जल्द से जल्द नीलामी पूरी कराने पर जोर दिया है, ताकि राजस्व नुकसान को कम करने के साथ अवैध खनन की आशंका पर भी प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके।