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Bihar News : फर्जी मेडल से सरकारी नौकरी का खेल बेनकाब! रग्बी खिलाड़ी सुधांशु रंजन सस्पेंड, वीडियो जांच में खुली बड़ी सच्चाई

बिहार में 'मेडल लाओ-नौकरी पाओ' योजना के तहत नौकरी पाने वाले रग्बी खिलाड़ी सुधांशु रंजन को फर्जी दस्तावेज, आपराधिक केस छिपाने और वीडियो जांच में खुलासे के बाद निलंबित कर दिया गया।

Bihar News : फर्जी मेडल से सरकारी नौकरी का खेल बेनकाब! रग्बी खिलाड़ी सुधांशु रंजन सस्पेंड, वीडियो जांच में खुली बड़ी सच्चाई
Tejpratap
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5 मिनट

Bihar News : बिहार में 'मेडल लाओ-नौकरी पाओ' योजना के तहत मिली एक सरकारी नौकरी अब बड़े विवाद में घिर गई है। नालंदा समाहरणालय में कार्यरत निम्नवर्गीय लिपिक और खुद को राष्ट्रीय स्तर का रग्बी खिलाड़ी बताने वाले सुधांशु रंजन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि उसने न सिर्फ अपने खिलाफ दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई, बल्कि जिस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के आधार पर नौकरी हासिल की, उसमें उसके खेलने के भी पुख्ता सबूत नहीं मिले।

जांच में खुला फर्जीवाड़े का पूरा खेल

बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) के महानिदेशक रवींद्रण शंकरण को इस मामले की शिकायत मिलने के बाद विस्तृत जांच शुरू कराई गई। जांच के दौरान सुधांशु रंजन के दस्तावेज, खेल उपलब्धियां और चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया दोबारा कराई गई। इसी दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।

जांच में पाया गया कि सुधांशु रंजन के खिलाफ पटना के अगमकुआं थाना में पहले से गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है। इसके बावजूद उसने सरकारी नौकरी के आवेदन के दौरान इस जानकारी को छिपाया। अधिकारियों के अनुसार, यह तथ्य अपने आप में सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया।

हथियार और शराब बरामदगी मामले में दर्ज है केस

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 25 सितंबर 2025 को अगमकुआं थाना में सुधांशु रंजन के खिलाफ आर्म्स एक्ट, बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। छापेमारी के दौरान हथियार, नकदी, मोबाइल फोन, लैपटॉप और कैश काउंटिंग मशीन जैसी कई वस्तुएं बरामद होने का भी उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया है।

खेल प्राधिकरण ने इस मामले में पटना एसएसपी और अगमकुआं थाना से एफआईआर, जांच रिपोर्ट और पर्यवेक्षण से जुड़े दस्तावेज भी मंगवाए थे, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की गई।

वीडियो जांच में सामने आया बड़ा खुलासा

मामला केवल आपराधिक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहा। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने भारतीय रग्बी फुटबॉल संघ से वर्ष 2022 की जूनियर नेशनल रग्बी-7 चैंपियनशिप से जुड़े सभी रिकॉर्ड, मैचों की वीडियो फुटेज और पुरस्कार वितरण समारोह की रिकॉर्डिंग भी मंगवाई।

जांच के दौरान यह सामने आया कि सुधांशु रंजन टीम की सूची में जरूर दर्ज था, लेकिन किसी भी मैच की वीडियो फुटेज में वह मैदान पर खेलता हुआ दिखाई नहीं दिया। इतना ही नहीं, पुरस्कार वितरण समारोह में भी उसकी मौजूदगी नहीं मिली।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस जर्सी नंबर-4 को सुधांशु अपना बताकर दावा कर रहा था, वीडियो जांच में उस जर्सी में कोई दूसरा खिलाड़ी खेलता हुआ दिखाई दिया। इससे यह संदेह और मजबूत हो गया कि नौकरी हासिल करने के लिए फर्जी प्रमाणपत्र और गलत जानकारी का इस्तेमाल किया गया।

डीजी ने की कड़ी कार्रवाई की सिफारिश

बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवींद्रण शंकरण ने स्पष्ट कहा कि जांच में यह साबित हुआ है कि संबंधित खिलाड़ी ने सच्चाई छिपाकर सरकारी नौकरी प्राप्त की। उनके अनुसार, सुधांशु ने न तो प्रतियोगिता में वास्तविक रूप से खेला और न ही उसे गोल्ड मेडल मिला, लेकिन उसने दस्तावेजों के आधार पर खुद को पात्र दिखाकर सरकारी नियुक्ति हासिल कर ली।

जांच पूरी होने के बाद 14 जुलाई को खेल प्राधिकरण ने अपनी रिपोर्ट, पुलिस दस्तावेज और एफआईआर की प्रतियां सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दीं।

तत्काल निलंबित, आगे हो सकती है बड़ी कार्रवाई

रिपोर्ट मिलने के बाद नालंदा के जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से सुधांशु रंजन को निम्नवर्गीय लिपिक के पद से निलंबित कर दिया। साथ ही बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने सामान्य प्रशासन विभाग से उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई करने की भी अनुशंसा की है।

अब इस मामले को बिहार में सरकारी नियुक्तियों की पारदर्शिता और खेल प्रमाणपत्रों के सत्यापन से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि आगे की जांच में दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा पूरी तरह साबित होता है तो सुधांशु रंजन की नौकरी समाप्त होने के साथ-साथ उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है। यह मामला अब राज्य की चर्चित प्रशासनिक और खेल संबंधी जांचों में शामिल हो गया है।