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Bihar में अब नहीं बन पाएगा राशन कार्ड? 11 लाख नए कार्ड के टारगेट पर अधिकारियों का आंदोलन

बिहार में 11,04,425 नए राशन कार्ड बनाने के लक्ष्य को लेकर आपूर्ति अधिकारी आंदोलन पर हैं। 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर विरोध करेंगे, फिर हड़ताल की चेतावनी।

Bihar में अब नहीं बन पाएगा राशन कार्ड? 11 लाख नए कार्ड के टारगेट पर अधिकारियों का आंदोलन
Tejpratap
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7 मिनट

पटना: बिहार में नए राशन कार्ड बनाने को लेकर सरकार के बड़े अभियान पर अब विभागीय अधिकारी और कर्मचारी ही सवाल उठाने लगे हैं। राज्य में 11,04,425 नए राशन कार्ड जोड़ने के लक्ष्य को लेकर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग और बिहार आपूर्ति सेवा संघ आमने-सामने आ गए हैं। संघ का आरोप है कि सरकार ने बिना जरूरी संसाधन और बजटीय व्यवस्था किए अधिकारियों पर असंभव लक्ष्य थोप दिया है। विरोध इतना बढ़ गया है कि अब चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया गया है।

संघ ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार और विभाग ने उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया तो आने वाले दिनों में राशन कार्ड से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं। पहले सांकेतिक विरोध, फिर सामूहिक अवकाश और इसके बाद पूर्ण हड़ताल तक की चेतावनी दी गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार में नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया पर असर पड़ने वाला है?

20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर करेंगे विरोध

बिहार आपूर्ति सेवा संघ के निर्णय के अनुसार राज्यभर के आपूर्ति अधिकारी और कर्मचारी 20 अगस्त से 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर सांकेतिक विरोध करेंगे। इस दौरान विभागीय कार्य सामान्य रूप से जारी रखने की बात कही गई है, लेकिन संघ ने चेतावनी दी है कि यह आंदोलन केवल पहला चरण है।

यदि विभाग उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करता है तो अगले चरण में अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर जा सकते हैं। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो पूर्ण हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा। संघ ने अपने आंदोलन और मांगों की जानकारी विभाग के साथ-साथ मुख्य सचिव और विभागीय मंत्री को भी दे दी है। इस संबंध में विस्तृत ज्ञापन और आंदोलन की पूर्व सूचना सौंपकर सरकार को पहले ही चेतावनी दे दी गई है।

बिना सर्वे के 11 लाख राशन कार्ड का लक्ष्य तय करने का आरोप

बिहार आपूर्ति सेवा संघ के अध्यक्ष श्रीराम मिश्रा ने नए राशन कार्ड के लक्ष्य तय करने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि 11,04,425 नए राशन कार्ड बनाने का लक्ष्य किसी जमीनी सर्वे के आधार पर नहीं, बल्कि गणितीय फॉर्मूले के आधार पर तय किया गया है।

संघ के मुताबिक विभागीय आंकड़ों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम यानी एनएफएसए के तहत बिहार में लाभुकों की अधिकतम सीमा करीब 8.71 करोड़ है। इनमें से लगभग 8.24 करोड़ लाभुक पहले से आच्छादित हैं। इस हिसाब से लगभग 46.93 लाख लाभुकों की शेष सीलिंग बचती है।

इसी शेष संख्या को औसत परिवार आकार 4.25 से विभाजित कर करीब 11.04 लाख नए राशन कार्डों का लक्ष्य तय किया गया है। लेकिन संघ का कहना है कि यह गणना जमीनी वास्तविकता को ध्यान में रखकर नहीं की गई है।अधिकारियों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सीलिंग का आधार ही लगभग 15 साल पुराने जनसंख्या आंकड़े हैं, तो आज की स्थिति में केवल गणितीय फॉर्मूले से लाखों नए कार्डों का लक्ष्य कैसे तय किया जा सकता है।

नहीं है कंप्यूटर, स्कैनर और इंटरनेट

आपूर्ति सेवा संघ ने अभियान के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ का दावा है कि राज्य के कई आपूर्ति कार्यालयों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। संघ के अनुसार कई कार्यालयों में कंप्यूटर, स्कैनर और इंटरनेट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा राशन कार्ड आवेदन की जांच और अन्य फील्ड वेरिफिकेशन के लिए विभागीय वाहन भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने स्तर से संसाधनों की व्यवस्था करनी पड़ रही है। संघ का आरोप है कि प्रिंटआउट, दस्तावेजों की जांच और फील्ड सत्यापन के लिए वाहन भाड़े पर लेने में प्रति कार्ड औसतन 250 से 300 रुपये तक का खर्च हो रहा है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई अधिकारी यह खर्च अपनी जेब और अपने वेतन से उठा रहे हैं। संघ का कहना है कि जब सरकार करोड़ों रुपये के स्तर पर अभियान चला रही है तो उसके लिए जरूरी बजटीय प्रावधान और संसाधन उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है।

एक कॉल नहीं उठाने पर काट दिया गया वेतन

विरोध की एक बड़ी वजह अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई भी है। संघ का आरोप है कि 17 जुलाई को सीयूजी नंबर पर कॉल रिसीव नहीं होने या जीपीएस की लाइव लोकेशन उपलब्ध नहीं होने के आधार पर दर्जनों अधिकारियों का एक दिन का वेतन काट लिया गया।

संघ ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा है कि फील्ड में काम करने वाले अधिकारियों को कई बार नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद केवल कॉल रिसीव न होने या लाइव लोकेशन नहीं मिलने के आधार पर वेतन काटना अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने जैसा है। संघ का कहना है कि पहले संसाधन उपलब्ध कराए जाएं और उसके बाद जवाबदेही तय की जाए। बिना सुविधा के सिर्फ लक्ष्य और कार्रवाई का दबाव बनाना कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

क्या नए राशन कार्ड बनने पर पड़ सकता है असर?

फिलहाल 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर विरोध के दौरान सामान्य कामकाज जारी रहेगा। इसलिए तत्काल राशन कार्ड की प्रक्रिया बंद होने की स्थिति नहीं है। लेकिन यदि सरकार और विभाग ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो अगले चरण में सामूहिक अवकाश और पूर्ण हड़ताल हो सकती है। ऐसी स्थिति में नए राशन कार्ड के आवेदन, जांच, सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी। सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो सकती है जो लंबे समय से नए राशन कार्ड बनने का इंतजार कर रहे हैं।

अब सबकी नजर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग पर है। सरकार एक तरफ 11 लाख से अधिक नए राशन कार्ड जोड़ने का बड़ा अभियान चला रही है, जबकि दूसरी तरफ इस अभियान को जमीन पर लागू करने वाले अधिकारी संसाधनों और कार्रवाई के दबाव को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। आने वाले दिनों में विभाग और आपूर्ति सेवा संघ के बीच बातचीत से ही तय होगा कि बिहार में नए राशन कार्ड बनाने का अभियान रफ्तार पकड़ेगा या आंदोलन की वजह से इसकी रफ्तार थम जाएगी।