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Bihar News : क्या टूटेगा बिहार का 1967 का पुराना राजनीतिक रिकॉर्ड? डिप्टी CM से सीधे CM बनने की रेस में सम्राट चौधरी

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। डिप्टी सीएम से सीधे मुख्यमंत्री बनने की पुरानी परंपरा को सम्राट चौधरी तोड़ सकते हैं, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।

Bihar News : क्या टूटेगा बिहार का 1967 का पुराना राजनीतिक रिकॉर्ड? डिप्टी CM से सीधे CM बनने की रेस में सम्राट चौधरी
Tejpratap
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Bihar News : बिहार की राजनीति में एक दिलचस्प और अनोखी परंपरा दशकों से चली आ रही है—यहां उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) की कुर्सी तक पहुंचने वाले नेता शायद ही कभी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच पाए हैं। इस परंपरा को तोड़ने वाले अब तक केवल एक ही नेता रहे हैं—कर्पूरी ठाकुर। लेकिन अब सियासी गलियारों में एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या सम्राट चौधरी इस इतिहास को बदल पाएंगे?


क्या बदलने वाली है परंपरा?

मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में सम्राट चौधरी का नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है। उनके आवास पर भाजपा के शीर्ष नेताओं का लगातार पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।


सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर भी कम दिलचस्प नहीं है। वे बिहार सरकार में मंत्री रहे शकुनी चौधरी के बेटे हैं और 1990 के दशक से राजनीति में सक्रिय हैं। 1999 में उन्हें राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री बनाया गया था, लेकिन उम्र विवाद के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने लगातार राजनीतिक मजबूती हासिल की—2000 और 2010 में परबत्‍ता से विधायक बने और 2014 में फिर मंत्री पद संभाला।


2018 में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। इसके बाद उनका कद तेजी से बढ़ा—प्रदेश अध्यक्ष बने, मंत्री बने और फिर डिप्टी सीएम की कुर्सी तक पहुंचे। अब वे मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।


बिहार में डिप्टी सीएम की परंपरा

बिहार में उप मुख्यमंत्री का पद हमेशा से सत्ता संतुलन का प्रतीक रहा है। 1957 में श्रीकृष्ण सिंह की सरकार में पहली बार इस पद का निर्माण हुआ, जब अनुग्रह नारायण सिन्हा को उप मुख्यमंत्री बनाया गया।तब से लेकर अब तक करीब 10 नेता इस पद पर रह चुके हैं, लेकिन उनमें से केवल कर्पूरी ठाकुर ही ऐसे नेता रहे, जो आगे चलकर मुख्यमंत्री बने।


नीतीश युग में डिप्टी सीएम की भरमार

नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक कार्यकाल में सबसे ज्यादा उप मुख्यमंत्री बनाए गए। इस सूची में प्रमुख नाम हैं:

सुशील कुमार मोदी

तारकिशोर प्रसाद

रेणु देवी

विजय कुमार सिन्हा

तेजस्वी यादव

सम्राट चौधरी

इनमें से सुशील कुमार मोदी का कार्यकाल (2005–2013) सबसे लंबा रहा, लेकिन वे भी मुख्यमंत्री नहीं बन सके।


क्यों नहीं बन पाते डिप्टी सीएम, सीएम?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सत्ता का केंद्र हमेशा मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द ही रहा है। डिप्टी सीएम का पद आमतौर परजातीय और सामाजिक समीकरण साधने के लिए,गठबंधन में संतुलन बनाए रखने के लिए और राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे भविष्य के मुख्यमंत्री के तौर पर तैयार करने का मंच कम ही माना गया है।


क्या सम्राट चौधरी तोड़ेंगे रिकॉर्ड?

अब सवाल यही है कि क्या सम्राट चौधरी इस दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ पाएंगे? मौजूदा हालात और भाजपा के भीतर उनकी बढ़ती पकड़ को देखते हुए यह संभावना मजबूत मानी जा रही है। अगर वे मुख्यमंत्री बनते हैं, तो वे कर्पूरी ठाकुर के बाद दूसरे ऐसे नेता होंगे, जिन्होंने डिप्टी सीएम से सीएम तक का सफर तय किया।


रिकॉर्ड पर एक नजर

बिहार में अब तक लगभग 10 उप मुख्यमंत्री बने। इसके बाद भी केवल कर्पूरी ठाकुर ही मुख्यमंत्री बने। इसमें सबसे लंबा कार्यकाल: सुशील कुमार मोदी (2005–2013) रहा। बिहार की राजनीति इस वक्त एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। अगर सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनते हैं, तो यह सिर्फ एक पद परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि एक राजनीतिक परंपरा का अंत भी होगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की राजनीति इतिहास दोहराती है या नया इतिहास लिखती है।