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बिहार के पेंशनभोगियों को बड़ी राहत: अब घर बैठे बनेगा डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र, नवंबर में लगेंगे विशेष शिविर

Bihar Pensioners: बिहार के लाखों पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर है। अब जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए उन्हें बैंक या सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। केंद्र सरकार

Bihar Pensioners
प्रतिकात्मक तस्वीर
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Pensioners: बिहार के लाखों पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर है। अब जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए उन्हें बैंक या सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। केंद्र सरकार नवंबर में पांचवां राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान शुरू करने जा रही है। इसके तहत बिहार के विभिन्न जिलों और शहरों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे।




यह अभियान 1 से 30 नवंबर तक चलेगा। इसके माध्यम से बुजुर्ग और चलने-फिरने में असमर्थ पेंशनभोगी आसानी से अपना डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनवा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर ऐसे लोगों को घर पर ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे उम्र या बीमारी के कारण बाहर आने-जाने में परेशानी झेल रहे बुजुर्गों को बड़ी राहत मिलेगी।




डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अब पेंशनभोगियों को लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। वे अपने एंड्रॉयड या आईओएस स्मार्टफोन की मदद से भी यह प्रमाणपत्र तैयार कर सकेंगे। इसके लिए फेस ऑथेंटिकेशन यानी चेहरे की पहचान तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।





इस प्रक्रिया में मोबाइल के कैमरे से पेंशनभोगी के चेहरे की पहचान की जाएगी। पहचान की पुष्टि होने के बाद डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र तैयार हो जाएगा। इस सुविधा से पेंशनभोगियों को हर बार बैंक या पेंशन कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।





इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया को आसान और सुविधाजनक बनाना है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों को इसका लाभ मिलेगा। शारीरिक रूप से असमर्थ और चलने-फिरने में परेशानी का सामना कर रहे पेंशनभोगियों के लिए घर पर ही प्रमाणपत्र बनाने की व्यवस्था की जाएगी।





पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग की ओर से बिहार के सभी जिलों और शहरों में विशेष शिविर लगाने की तैयारी की जा रही है। इन शिविरों में पेंशनभोगियों को डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनाने में सहायता मिलेगी। अभियान का लक्ष्य अधिक से अधिक पेंशनभोगियों तक इस सुविधा को पहुंचाना है।





गौरतलब है कि पेंशन जारी रखने के लिए प्रत्येक वर्ष जीवन प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य होता है। इसे जमा करने के लिए बुजुर्गों को अक्सर बैंक और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में डिजिटल सुविधा और घर पर प्रमाणपत्र बनाने की व्यवस्था से उनकी परेशानी कम होगी। नवंबर में शुरू होने वाला यह अभियान बिहार के लाखों पेंशनभोगियों के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता