1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 09 Feb 2026 12:31:06 PM IST
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Bihar government : बिहार में नए अनुमंडल, प्रखंड या जिले बनाने को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर सरकार ने स्पष्ट रूप से मोर्चा संभाल लिया है। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने हाल ही में विधानसभा में यह स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल सरकार के पास नए जिले या अनुमंडल बनाने का कोई योजना या प्रस्ताव नहीं है। यह जवाब उन्होंने पारू के विधायक शंकर प्रसाद द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दिया।
विधायक शंकर प्रसाद ने सवाल किया था कि राज्य के कई क्षेत्रों में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है और प्रशासनिक कार्यों में सुविधा के लिए क्या सरकार नए अनुमंडल या जिले बनाने का विचार कर रही है। इस सवाल के जवाब में मंत्री ने विस्तार से प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि बिहार में नए जिलों या अनुमंडल बनाने की एक निर्धारित और सख्त प्रक्रिया होती है।
मंत्री ने बताया कि इस प्रक्रिया में सबसे पहले सचिवों की समिति सक्रिय होती है। सचिवों की समिति उन प्रस्तावों की समीक्षा करती है जो विभिन्न जिलों से संबंधित अधिकारी जैसे कि जिला पदाधिकारी (DM) और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) की अनुशंसा पर आते हैं। ये प्रस्ताव प्रमंडल के आयुक्त और आईजी के माध्यम से सचिवों की समिति तक पहुंचते हैं, जो इसके सभी पहलुओं का विश्लेषण करती है।
इसके बाद, सचिवों की समिति अपनी समीक्षा और सुझावों के साथ मंत्रियों के समूह यानी ‘ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ के पास इसे भेजती है। मंत्री समूह इस पर विचार करता है और सभी जरूरी पहलुओं पर चर्चा करने के बाद अंतिम निर्णय लेता है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस प्रक्रिया का कोई भी चरण सक्रिय नहीं है क्योंकि अभी तक किसी भी जिले से नए अनुमंडल या जिले बनाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव नहीं आए हैं।
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि जब तक सभी जिलों से ऐसे प्रस्ताव नहीं आते, तब तक किसी नए अनुमंडल, प्रखंड या जिले के गठन का कोई विचार या निर्णय नहीं लिया जा सकता। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया काफी व्यवस्थित और समय लेने वाली है, और यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी जिले या अनुमंडल के गठन से पहले सभी जरूरी पहलुओं का पूरा अध्ययन किया जाए।
मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि नए जिलों और अनुमंडलों का निर्माण केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि इसके लिए भूगोलिक स्थिति, प्रशासनिक सुविधाओं, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों का भी अध्ययन किया जाता है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि नए जिले या अनुमंडल के निर्माण से प्रशासनिक कामकाज और नागरिक सेवा में सुधार हो।
संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का प्रयास यह है कि मौजूदा जिलों और अनुमंडलों में प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि जब समय आएगा और सभी जिलों से औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त होंगे, तब ही सरकार इस विषय पर विचार करेगी। फिलहाल, कोई नया जिला या अनुमंडल बनाने का कोई योजना या प्रस्ताव नहीं है।
इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि बिहार सरकार प्रशासनिक विस्तार के मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहती और सभी पहलुओं का गहन अध्ययन करने के बाद ही किसी भी निर्णय पर पहुँचेगी। मंत्री के इस स्पष्टीकरण के बाद यह भी साफ हो गया कि श्रोताओं और आम जनता को फिलहाल किसी नए जिला या अनुमंडल के गठन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।