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बिहार में जमीन सर्वे को लेकर सरकार का बड़ा फैसला: बंटवारा नहीं होने पर भी जारी रहेगा सर्वे, जानें नियम और शर्तें

Bihar Land Survey: बिहार में जमीन सर्वे को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत अब बंटवारा न होने पर भी सर्वे कार्य नहीं रुकेगा। राज्य सरकार ने साफ किया है कि तय समय सीमा के भीतर हर हाल में सर्वे पूरा किया जाएगा और इसके लिए नई व्यवस्था...

बिहार में जमीन सर्वे को लेकर सरकार का बड़ा फैसला: बंटवारा नहीं होने पर भी जारी रहेगा सर्वे, जानें नियम और शर्तें
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar Land Survey: बिहार में जमीन सर्वे को लेकर राज्य सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि दिसंबर 2027 तक हर हाल में जमीन सर्वे का काम पूरा कर लिया जाएगा। खास बात यह है कि जिन परिवारों में अब तक जमीन का बंटवारा नहीं हुआ है, वहां भी सर्वे की प्रक्रिया नहीं रुकेगी। ऐसे मामलों में जमीन उसी पुराने मालिक या पूर्वज के नाम पर दर्ज रहेगी, जिसके नाम से पहले से सरकारी रिकॉर्ड मौजूद है।


सरकार के इस फैसले के बाद उन लाखों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो वर्षों से आपसी बंटवारे के कारण जमीन के कागजात और सर्वे को लेकर परेशान थे। अब पारिवारिक विवाद या बंटवारा लंबित रहने की वजह से सर्वे कार्य प्रभावित नहीं होगा। सरकार का मानना है कि समय पर सर्वे पूरा होने से भविष्य में जमीन विवादों में कमी आएगी और लोगों को अपने अधिकार स्पष्ट रूप से मिल सकेंगे।


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सर्वे कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने कहा है कि जहां जरूरत होगी वहां अतिरिक्त अधिकारियों व कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी ताकि लंबित मामलों को तेजी से निपटाया जा सके।


दरअसल हाल के दिनों में कई अंचलों में कर्मचारियों की हड़ताल और कामकाज प्रभावित होने की वजह से दाखिल-खारिज और सर्वे से जुड़े हजारों मामले लंबित हो गए थे। अब सरकार ने इन मामलों को तेजी से खत्म करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत राजस्व कर्मचारी सुबह 6 बजे से 9 बजे तक और शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक अतिरिक्त ड्यूटी करेंगे। सरकार की कोशिश है कि किसी भी जिले में सर्वे कार्य धीमा न पड़े और तय समय सीमा के भीतर काम पूरा हो जाए।


सरकार का कहना है कि बिहार में होने वाले कई बड़े विवादों और आपराधिक घटनाओं की जड़ जमीन विवाद ही होते हैं। कई बार मामूली जमीन झगड़ा हत्या और खूनी संघर्ष तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि सरकार अब जमीन रिकॉर्ड को पूरी तरह अपडेट और पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि अगर जमीन का स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार हो जाएगा तो भविष्य में विवाद और मुकदमों में काफी कमी आएगी।


इस बार सर्वे प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है। सरकारी जमीन की पहचान और रिकॉर्ड की जांच के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। नई तकनीक की मदद से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की पहचान आसानी से हो सकेगी। इससे सर्वे प्रक्रिया पहले से ज्यादा सटीक और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।


सरकार ने जमीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी बड़ा बदलाव किया है। अब जमीन के कागजात और रिकॉर्ड सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से ही जारी किए जाएंगे। धीरे-धीरे ऑफलाइन व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। इसका मकसद रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाना और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाना है। इससे लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों का चक्कर भी नहीं लगाना पड़ेगा और वे घर बैठे अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे।