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Gandhi Jayanti पर सम्राट सरकार का बड़ा फैसला, बिहार की जेलों से रिहा होंगे 44 कैदी; 93 साल के बंदी भी शामिल

गांधी जयंती पर बिहार की सम्राट सरकार ने बड़ा मानवीय फैसला लिया है। राज्य की अलग-अलग जेलों में लंबे समय से बंद 44 बुजुर्ग और बीमार कैदियों को रिहा किया जाएगा। इनमें 90 साल से ज्यादा उम्र के 2 बंदी भी शामिल हैं।

Gandhi Jayanti पर सम्राट सरकार का बड़ा फैसला, बिहार की जेलों से रिहा होंगे 44 कैदी; 93 साल के बंदी भी शामिल
Tejpratap
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6 मिनट

पटना: गांधी जयंती के मौके पर बिहार सरकार ने इस बार एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा मानवीय पहल के तौर पर हो रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने प्रदेश की अलग-अलग जेलों में लंबे समय से सजा काट रहे 44 कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया है। इन बंदियों में बड़ी संख्या उन कैदियों की है, जो उम्रदराज हो चुके हैं या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।

सरकार का यह फैसला 2 अक्टूबर यानी महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर लागू किया जा रहा है। खास बात यह है कि बिहार में गांधी जयंती के अवसर पर कैदियों को रिहा करने की परंपरा पहले भी रही है। वर्ष 2018 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर 43 कैदियों को जेल से मुक्त किया गया था। करीब आठ साल बाद एक बार फिर इस पहल को आगे बढ़ाते हुए 44 बंदियों की रिहाई का फैसला लिया गया है।

90 साल से अधिक उम्र के दो कैदी भी होंगे आजाद

जिन बंदियों को रिहा किया जा रहा है, उनमें सबसे अधिक संख्या बुजुर्ग कैदियों की है। आंकड़ों के मुताबिक, रिहाई पाने वालों में 2 बंदी 90 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। वहीं 8 कैदी 80 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, जबकि 20 बंदी 70 से 80 वर्ष की आयु के बीच हैं। यानी रिहाई पाने वाले 44 बंदियों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो अपनी जिंदगी का लंबा हिस्सा जेल में गुजार चुके हैं और अब उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं, जहां उन्हें परिवार के बीच लौटने का मौका दिया जा रहा है। इसके अलावा गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक बंदी को भी मानवीय आधार पर कारामुक्त करने का निर्णय लिया गया है। सरकार की ओर से इस फैसले को मानवीय संवेदना, सामाजिक पुनर्वास और जनकल्याण की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है।

93 साल के रामबृक्ष कोइरी की भी होगी रिहाई

रिहा होने वाले बंदियों में रोहतास जेल के रामबृक्ष कोइरी भी शामिल हैं। उनकी उम्र 93 वर्ष है। इसी तरह मधेपुरा से योगेश्वर यादव, हरिवंश राम और रामाशीष यादव समेत कई अन्य बंदियों को भी रिहा किया जाएगा।हरिवंश राम की उम्र 84 वर्ष और रामाशीष यादव की उम्र 82 वर्ष बताई गई है। वहीं सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। दोनों ने भी लंबे समय तक कारावास की सजा काटी है।इस सूची में पूर्णिया जेल में करीब 20 साल की सजा पूरी कर चुकी एक महिला बंदी भी शामिल हैं। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब उन्हें भी परिवार और समाज के बीच लौटने का अवसर मिलेगा।

राज्य बंदी परिहार कमेटी की अनुशंसा पर फैसला

इन कैदियों की रिहाई का फैसला अचानक नहीं लिया गया है। राज्य बंदी परिहार कमेटी की अनुशंसा के आधार पर इन बंदियों को कारामुक्त करने का निर्णय लिया गया है। इसमें बंदियों की उम्र, लंबे समय से जेल में रहने की अवधि और स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है।

सरकार के इस फैसले का एक अहम पहलू यह भी है कि लंबे समय तक जेल में रहने के बाद उम्रदराज हो चुके बंदियों को उनके परिवार के पास लौटने का मौका मिलेगा। ऐसे में गांधी जयंती के दिन होने वाली यह रिहाई सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पुनर्वास और मानवीय संवेदना से जुड़ा कदम भी मानी जा रही है।

अपराध पीड़ित परिवारों को भी मिलेगी आर्थिक मदद

गांधी जयंती के मौके पर सरकार की ओर से केवल बंदियों की रिहाई ही नहीं की जाएगी, बल्कि अपराध से पीड़ित परिवारों के परिजनों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। जानकारी के मुताबिक करीब 1,820 लाभार्थी परिवारों के बीच लगभग 3 करोड़ 86 लाख रुपये की राशि वितरित की जाएगी। सरकार की इस पहल का उद्देश्य अपराध से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहयोग देना है, ताकि मुश्किल परिस्थितियों में उन्हें कुछ राहत मिल सके।

गांधी जयंती पर जेल से घर तक पहुंचेगा संदेश

महात्मा गांधी की जयंती पर बुजुर्ग और बीमार बंदियों को जेल से बाहर लाने का फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब लंबे समय से जेल में बंद इन लोगों के लिए उम्र और स्वास्थ्य दोनों बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में सरकार ने सजा की अवधि, उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर देने का निर्णय लिया है।

वर्ष 2018 के बाद अब 2026 में एक बार फिर गांधी जयंती के अवसर पर कैदियों की रिहाई की यह पहल बिहार में मानवीय दृष्टिकोण से उठाए गए कदम के रूप में सामने आई है। 44 बंदियों की रिहाई और 1,820 पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता के जरिए सरकार ने इस दिन को सामाजिक सरोकार से जोड़ने की कोशिश की है।