Why Bihar Faced Flood: बिहार में इस साल बारिश सामान्य से करीब 33 प्रतिशत कम हुई है। अब तक राज्य में महज करीब 155 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद गंगा समेत कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं और कई इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। सवाल बड़ा है—जब बिहार में बारिश ही कम हुई, तो नदियों में इतना पानी आया कहां से? आखिर बिहार कम बारिश के बावजूद बाढ़ से क्यों जूझ रहा है?
इस सवाल का जवाब बिहार की भौगोलिक स्थिति, नेपाल और हिमालय से आने वाली नदियों तथा गंगा के विशाल जलग्रहण क्षेत्र में छिपा है। बिहार की बाढ़ को सिर्फ राज्य में हुई बारिश से समझना संभव नहीं है। इसके पीछे पड़ोसी नेपाल और उससे आगे हिमालयी क्षेत्र में होने वाली बारिश और वहां से आने वाला पानी भी बड़ी भूमिका निभाता है।
बिहार में अभी क्यों बढ़ा बाढ़ का खतरा?
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बिहार की चिंता बढ़ा दी है। कई जगह नदी खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रही है। गंगा के अलावा गंडक, सोन, कोसी, पुनपुन, बागमती और बूढ़ी गंडक जैसी नदियों का जलस्तर भी कई क्षेत्रों में चिंता बढ़ा रहा है।गंगा का पानी बढ़ने के साथ ही नदी किनारे बसे निचले इलाकों में दबाव बढ़ जाता है। खासकर पटना और उसके आसपास का क्षेत्र संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहां कई नदियों का जल तंत्र एक-दूसरे से जुड़ता है।
बिहार को 'बाढ़ का कटोरा' क्यों कहा जाता है?
बिहार की भौगोलिक बनावट बाढ़ को समझने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। राज्य का बड़ा हिस्सा अपेक्षाकृत समतल और निचला मैदान है। उत्तर में हिमालय और नेपाल का क्षेत्र है, जबकि दक्षिण की तरफ झारखंड और मध्य भारत के पठारी इलाके हैं।गंगा बिहार के बीच से होकर गुजरती है और इसमें उत्तर तथा दक्षिण दोनों दिशाओं से आने वाली कई नदियां मिलती हैं। यही वजह है कि बिहार में किसी एक इलाके में हुई भारी बारिश का असर दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच सकता है।
उत्तर दिशा यानी नेपाल और हिमालय से आने वाली प्रमुख नदियों में गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा शामिल हैं। वहीं दक्षिण दिशा से सोन, पुनपुन, कर्मनाशा और फल्गु जैसी नदियां गंगा तंत्र में योगदान करती हैं। यानी बिहार में बारिश कम होने के बावजूद अगर नेपाल या हिमालयी क्षेत्र में भारी बारिश होती है, तो उसका पानी नदियों के जरिए बिहार में पहुंच सकता है।
नेपाल में बारिश का बिहार पर कैसे पड़ता है असर?
बिहार की सबसे बड़ी भौगोलिक चुनौती यही है कि राज्य की कई प्रमुख नदियों का उद्गम या जलग्रहण क्षेत्र नेपाल और हिमालय में है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में जब तेज बारिश होती है तो पहाड़ों से पानी तेजी से नीचे की ओर आता है। छोटी नदियां और नाले भरते हैं और उनका पानी बड़ी नदियों में पहुंचता है। इसके बाद गंडक, बागमती, कमला, कोसी और दूसरी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
इसका सीधा असर बिहार के मैदानी इलाकों पर पड़ता है।यही वजह है कि बिहार में बारिश कम होना यह गारंटी नहीं है कि यहां बाढ़ नहीं आएगी। अगर नेपाल में भारी बारिश हुई और नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ा, तो बिहार में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
पटना में क्यों बढ़ जाती है चिंता?
पटना की स्थिति भी खास है। शहर के आसपास गंगा के साथ सोन, पुनपुन और गंडक नदी तंत्र का प्रभाव पड़ता है। जब गंगा का जलस्तर पहले से ऊंचा हो और दूसरी नदियों से भी पानी पहुंच रहा हो, तो नदी का दबाव बढ़ जाता है।ऐसे समय में निचले इलाकों में पानी पहुंचने और जल निकासी की समस्या गंभीर हो सकती है। यही कारण है कि गंगा के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी भी पटना समेत नदी किनारे बसे इलाकों के लिए बड़ी चिंता बन जाती है।
बैराज और बांध भी क्यों महत्वपूर्ण हैं?
नेपाल सीमा के आसपास और बिहार में नदी तंत्र से जुड़े बैराज भी बाढ़ की स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में पानी तेजी से बढ़ता है, तो बैराजों में जल प्रवाह और गेट संचालन की स्थिति पर लगातार नजर रखनी पड़ती है। गंडक नदी पर स्थित वाल्मीकिनगर बैराज इसका प्रमुख उदाहरण है। ऊपरी क्षेत्र से अचानक ज्यादा पानी आने पर नदी का प्रवाह बढ़ सकता है, जिसका असर नीचे की तरफ बिहार के कई इलाकों में दिखाई देता है।हालांकि बाढ़ को केवल बैराज या बांध से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। वास्तविक स्थिति कई कारकों—बारिश, नदी का प्रवाह, जलग्रहण क्षेत्र, मिट्टी, नदी की क्षमता और जल निकासी—पर निर्भर करती है।
क्या ग्लेशियर न होने से बिहार में फ्लैश फ्लड नहीं आ सकती?
बिहार में हिमालयी ग्लेशियर नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि राज्य फ्लैश फ्लड या अचानक बढ़ने वाले नदी प्रवाह से पूरी तरह सुरक्षित है। नेपाल और हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक बारिश, पहाड़ी नदियों में अचानक बढ़ा प्रवाह और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी घटनाओं का असर नीचे के मैदानी क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। यानी बिहार में बाढ़ पैदा करने वाला पानी हमेशा बिहार में हुई बारिश से ही आए, यह जरूरी नहीं है।
बिहार की बाढ़ का असली गणित क्या है?
बिहार की बाढ़ को समझने के लिए सिर्फ मौसम विभाग के स्थानीय बारिश के आंकड़े देखना पर्याप्त नहीं है। नेपाल में बारिश कितनी हुई, हिमालयी नदियों में कितना पानी आया, बैराजों में कितना प्रवाह है और गंगा का जलस्तर किस स्थिति में है—इन सभी चीजों को एक साथ देखना पड़ता है। इसलिए इस साल बिहार में बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
सीधी भाषा में समझें तो बिहार की बाढ़ सिर्फ 'बारिश' की कहानी नहीं है, बल्कि यह भूगोल और नदी तंत्र की कहानी है। ऊपर नेपाल और हिमालय में पानी बढ़ता है, नदियां उसे लेकर बिहार के मैदानी इलाकों में आती हैं और नीचे गंगा में पहले से मौजूद पानी के साथ मिलकर हालात को गंभीर बना सकती हैं। यही वजह है कि बिहार में कम बारिश के बावजूद गंगा, गंडक, कोसी, बागमती और दूसरी नदियों का बढ़ता जलस्तर राज्य के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।





