करप्शन पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति मिट्टी में मिली ? भ्रष्टाचार के आरोपी बेउर जेल अधीक्षक को निलंबन मुक्त कर फिर से 'काराधीक्षक' बनाया, EOU की रेड में अकूत संपत्ति मिलने का था दावा

आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार को निलंबन से मुक्त कर बेगूसराय मंडल कारा का अधीक्षक बना दिया गया है। EOU की छापेमारी और डीए केस के बावजूद सरकार द्वारा दी गई फील्ड पोस्टिंग से भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Mar 12, 2026, 12:32:39 PM

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Bihar News: नीतीश सरकार करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है, दूसरी तरफ करप्शन केस के आरोपियों को मनचाही पोस्टिंग देकर उपकृत किया जाता है. नया मामला कारा प्रशासन से जुड़ा है. भ्रष्टाचार के आरोपी जेल अधीक्षक को निलंबन मुक्त कर फिर से फील्ड पोस्टिंग दे दी गई। आरोपी जेल अधीक्षक को निलंबन मुक्त कर जेल अधीक्षक के रूप में ही पोस्टिंग किया है. इस संबंध में गृह विभाग(कारा) ने महीने भर पहले (0 फरवरी 2026) ही अधिसूचना जारी किया था. 

विधु कुमार को बेगूसराय का अधीक्षक बनाया गया 

आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपी बेउर केंद्रीय कारा के तत्कालीन जेल अधीक्षक विधु कुमार को पहले सस्पेंड किया गया. इसके बाद निलंबन मुक्त कर फिर से फील्ड पोस्टिंग दी गई. उन्हें बेगूसराय मंडल कारा का अधीक्षक बनाया गया है. इस तरह से फील्ड में जगह देकर सरकार ने करप्शन के प्रति जीरो टॉलरेंस का खुद ही माखौल उड़ा दिया. 

विधु कुमार पर आय से 146 फीसदी अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप 

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पटना के बेउर आदर्श केंद्रीय कारा के तत्कालीन अधीक्षक विधु कुमार के खिलाफ 3 जनवरी 2025 को डीए केस सं- 1/25 दर्ज किया था. ईओयू के केस आरोप लगाया गया था कि विधु कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग कर अकूत अवैध संपत्ति अर्जित की जो वैध स्रोत से हुई आय से 146 प्रतिशत अधिक है। बेउर केंद्रीय कारा के तत्कालीन अधीक्षक व वर्तमान में बेगूसराय के अधीक्षक विधु कुमार पर आरोप है कि ये जेल में बंद कैदियों का शोषण और मानसिक उत्पीडऩ कर उनसे पैसों की उगाही करते थे। उनकी काली कमाई में परिवार के कई सदस्यों के साथ ही विश्वसनीय कक्षपाल प्रफुल्ल कुमार भी शामिल थे। ईओयू की छापेमारी के बाद गृह विभाग ने 22 जनवरी 2025 को ही आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार को सस्पेंड कर दिया था. निलंबन अवधि में विधु कुमार का मुख्यालय केंद्रीय कारा, बक्सर निर्धारित किया गया था. 

विधु कुमार के कई करीबी के ठिकानों पर भी हुई थी छापेमारी 

विधु कुमार पर आरोप थे कि इन्होंने अपनी अवैध कमाई से 54 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात एवं बर्तन खरीदे. चार लाख रुपये चांदी के बर्तन खरीदने में भी काली कमाई का इस्तेमाल किया था। इनके यहां छापामारी के दौरान जमीन खरीद की छह डीड भी बरामद की गई थी. विधु कुमार के ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई ने पटना के सरकारी आवास के साथ ही इनके बेउर स्थित कार्यालय कक्ष, शगुना स्थित घर, बिशनपुरा बिहटा स्थित घर, आरा गार्डन रेसीडेंसी स्थित किराये के फ्लैट के साथ ही कक्षपाल प्रफुल्ल कुमार के घर, मोतिहारी में एक करीबी के घर और इनके सीए के कार्यालय में ईओयू की टीमों ने एक साथ छापा मारा था। जिसमें यह जानकारी सामने आई कि विधु कुमार ने वैध आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करते हुए पटना, मोतिहारी एवं अन्य स्थानों पर मां, पिता और पत्नी एवं अपने नाम पर कई अचल संपत्तियां खरीदी थी।

ईओयू ने मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से काले धन को सफेद बनाने के लगाए थे आरोप 

ये मनी लॉन्डरिंग कर यह अपने काले धन को सफेद भी बना रहे थे। इसके लिए उन्होंने मां और पत्नी के नाम पर कई शैल कंपनियां भी बनाई थी। मनी लॉन्डरिंग के इस काम में नजदीकी मित्र और इनके चार्टर्ड एकाउंटेंट की अहम भूमिका पाई गई। ईओयू की टीम ने बेउर जेल स्थिति इनके कार्यालय कक्ष से मां विंध्यवासनी ट्रेडिंग, छतौनी, मोतिहारी का बैंक स्टेटमेंट, उषा इंडस्ट्रीज बसवरिया, मोतिहारी का ब्लैंक बैंक एनवायस, विधु कुमार पर पूर्व में लगे आरोपों से संबंधित तीन आवेदन पत्र जिसमें विधु कुमार के अवैध धनार्जन का आरोप है।

मोतिहारी में भी जेल अधीक्षक रहे थे विधु कुमार 

मोतिहारी में विधु कुमार के करीबी मित्र के घर से टैक्स एनवायस के साथ 13 महंगी एसयूवी गाडिय़ां जबकि कमला मशकरा के ठिकानों से बैंक खातों के स्टेटमेंट और शैलजा देवी एवं गोपाल शरण के नाम जमीन क्रय से जुड़ी पांच डीड की छाया प्रति बरामद की गई थी. मामला अभी जांच में है. इधर सरकार ने विधु कुमार को फील्ड में जगह (जेल अधीक्षक) के रूप में पोस्टिंग दे दी.