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बिहार जातीय गणना रिपोर्ट बनेगी किताब: जाति की आय, संपत्ति और आर्थिक स्थिति का होगा विस्तृत विवरण, सम्राट सरकार का बड़ा प्लान

Bihar News: बिहार सरकार जातीय गणना और आर्थिक सर्वे के आंकड़ों को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने जा रही है। 216 पन्नों की इस किताब में हर जाति की आय, संपत्ति और आर्थिक स्थिति का विस्तृत ब्यौरा होगा, जिससे नीति निर्माण और शोध कार्यों में मदद मिलेगी

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
© AI
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार सरकार अब राज्य में कराई गई जाति आधारित गणना और आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने जा रही है। इस दिशा में सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का उद्देश्य विभिन्न जातियों की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक स्थिति को व्यवस्थित रूप से सार्वजनिक करना है, ताकि विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए सटीक आधार उपलब्ध हो सके।


हर जाति की आय और संपत्ति का होगा ब्यौरा

प्रस्तावित पुस्तक में बिहार की सभी जातियों की आय, जमीन-जायदाद, संपत्ति और आर्थिक स्थिति से जुड़े आंकड़े शामिल किए जाएंगे। इन जानकारियों को क्रमबद्ध और विस्तृत रूप से प्रकाशित किया जाएगा, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों की आर्थिक स्थिति का स्पष्ट चित्र सामने आ सके। सरकार का मानना है कि इस प्रकाशन से सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को समझने में मदद मिलेगी, साथ ही नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।


पहले चरण में छपेंगी 500 प्रतियां

सरकारी योजना के अनुसार यह पुस्तक लगभग 216 पन्नों की होगी। प्रारंभिक चरण में इसकी 500 प्रतियां प्रकाशित की जाएंगी। पुस्तक के प्रकाशन कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए सरकार ने प्रकाशकों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।


टेंडर प्राप्त करने वाले प्रकाशक को आदेश मिलने के मात्र दो दिनों के भीतर पुस्तक छापकर सरकार को उपलब्ध करानी होगी। इसके लिए प्रकाशकों के पास कम से कम एक वर्ष का आयकर रिटर्न और जीएसटी पंजीकरण होना अनिवार्य रखा गया है।


2023 में जारी हुए थे जातीय गणना के आंकड़े

गौरतलब है कि बिहार सरकार ने 2 अक्टूबर 2023 को जातीय गणना के प्रमुख आंकड़े सार्वजनिक किए थे। रिपोर्ट के अनुसार राज्य की कुल आबादी 13.07 करोड़ से अधिक है। इनमें लगभग 12.53 करोड़ लोग बिहार में निवास करते हैं, जबकि करीब 53.72 लाख लोग राज्य के बाहर रहते हैं। इस सर्वेक्षण के दौरान राज्य के 2.83 करोड़ से अधिक परिवारों का आंकड़ा एकत्र किया गया था। रिपोर्ट में पिछड़ा वर्ग की आबादी 27.13 प्रतिशत दर्ज की गई थी।


नीति निर्माण और शोध कार्यों में मिलेगी मदद

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक सर्वेक्षण और जातीय गणना पर आधारित यह पुस्तक भविष्य में सरकार को गरीबों और वंचित वर्गों के लिए नई योजनाएं और नीतियां तैयार करने में मदद करेगी। साथ ही शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और सामाजिक अध्ययन से जुड़े लोगों को भी प्रमाणिक और विस्तृत आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता