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Bihar News : अब नहीं होगी सरकारी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री! खरीद-बिक्री में फर्जीवाड़े को नया सिस्टम लगाएगा रोक; इस तरह पकड़ेगा जमीन घोटाला

बिहार में सरकारी और खास महल जमीन की फर्जी रजिस्ट्री पर जल्द सख्ती बढ़ने वाली है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग AI आधारित नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने जा रहा है, जिससे अवैध जमीन रजिस्ट्रेशन पर रोक लगेगी।

Bihar News : अब नहीं होगी सरकारी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री!  खरीद-बिक्री में फर्जीवाड़े को नया सिस्टम लगाएगा रोक; इस तरह पकड़ेगा जमीन घोटाला
Tejpratap
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Bihar News : बिहार में सरकारी और खास महल की जमीन की अवैध खरीद-बिक्री पर जल्द सख्ती बढ़ने वाली है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐसे मामलों को रोकने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का उद्देश्य सरकारी जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक लगाना है, ताकि भू-माफियाओं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए होने वाले घोटालों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।


जानकारी के अनुसार, विभाग ने उत्पाद एवं निबंधन विभाग की मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की समीक्षा शुरू कर दी है। समीक्षा पूरी होने के बाद निबंधन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके तहत खास महल, सरकारी और विवादित जमीनों की रजिस्ट्री तकनीकी स्तर पर ही रोकी जा सकेगी।


दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में बिहार के कई जिलों से सरकारी जमीनों की फर्जी खरीद-बिक्री के मामले सामने आए हैं। भू-माफियाओं ने दस्तावेजों में हेराफेरी कर सरकारी जमीन को निजी भूमि बताकर उसकी रजिस्ट्री करा ली। इससे न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि कई मामलों में लंबे कानूनी विवाद भी खड़े हो गए। इन घटनाओं के बाद विभाग ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला लिया है।


नई व्यवस्था के तहत जमीन की प्रकृति और स्वामित्व संबंधी जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। रजिस्ट्री से पहले जमीन का ऑनलाइन सत्यापन किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। यदि जांच में जमीन सरकारी, खास महल या विवादित श्रेणी में पाई जाती है तो उसका निबंधन स्वतः रुक जाएगा।


विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस तकनीकी व्यवस्था से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाली रजिस्ट्री पर काफी हद तक रोक लग सकेगी। साथ ही, जमीन खरीदने वाले लोगों को भी पहले से स्पष्ट जानकारी मिल जाएगी कि संबंधित जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है।


सिर्फ तकनीकी सुधार ही नहीं, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी तैयारी की जा रही है। नई एसओपी में जिला स्तर पर निबंधन पदाधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट की जाएगी। यदि किसी सरकारी जमीन की गलत तरीके से रजिस्ट्री होती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई का प्रावधान भी किया जा सकता है। विभाग चाहता है कि भविष्य में किसी भी सरकारी भूमि की अवैध बिक्री संभव न हो।


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। आम लोग जमीन खरीदने से पहले उसकी पूरी जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे। इससे धोखाधड़ी के मामलों में भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।


सूत्रों के मुताबिक, विभाग जल्द ही इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर सभी जिलों को निर्देश जारी कर सकता है। माना जा रहा है कि यह कदम बिहार में भूमि प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगा।