1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 08, 2026, 8:50:38 AM
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BIHAR NEWS : बिहार सरकार ने राज्य में शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए अहम कदम उठाया है। गृह विभाग ने सभी जिलों के डीएम और एसपी को निर्देश दिया है कि वे हर माह शस्त्र लाइसेंस से जुड़े आंकड़ों की विस्तृत रिपोर्ट विभाग को उपलब्ध कराएं। यह रिपोर्ट प्रत्येक माह की 7 तारीख तक अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस रिपोर्ट में यह जानकारी शामिल होगी कि जिले में कितने लोगों को हर माह शस्त्र लाइसेंस दिया गया, कुल कितने आवेदन प्राप्त हुए, और उनमें से कितनों का निष्पादन डीएम और एसपी स्तर पर किया गया। इसके लिए एक निर्धारित प्रपत्र (फॉर्मेट) भी जारी किया गया है, ताकि सभी जिलों से एक समान और स्पष्ट जानकारी मिल सके।
गृह विभाग के इस फैसले का उद्देश्य शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और लंबित मामलों की निगरानी को मजबूत करना है। कई जिलों में लंबे समय से आवेदन लंबित रहने की शिकायतें मिल रही थीं, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
इसके साथ ही विभाग ने शस्त्र लाइसेंस से जुड़े मामलों के निष्पादन में समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने का भी निर्देश दिया है। आदेश में कहा गया है कि आयुध नियम, 2016 के तहत निर्धारित नियम 13 और 14 का पूरी तरह अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इन नियमों के अनुसार, पुलिस रिपोर्ट प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर आवेदक की आवश्यकता का मूल्यांकन कर अंतिम निर्णय लेना अनिवार्य है।
वहीं, पुलिस विभाग को भी जिम्मेदारी दी गई है कि वे शस्त्र लाइसेंस या उसके नवीकरण से जुड़े आवेदनों पर अपनी रिपोर्ट अधिकतम 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं। इससे प्रक्रिया में देरी कम होगी और आवेदकों को समय पर निर्णय मिल सकेगा।
गृह विभाग द्वारा जारी किए गए नए प्रपत्र में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। इसमें ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की संख्या, ऑफलाइन आवेदनों का विवरण, कुल आवेदनों की संख्या, निष्पादित मामलों की संख्या, और 90 दिनों से अधिक समय से लंबित आवेदनों की संख्या का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य किया गया है। इससे विभाग को यह समझने में आसानी होगी कि किस जिले में प्रक्रिया धीमी है और कहां सुधार की जरूरत है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी गृह विभाग ने मार्च महीने में एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया था। इसमें पंचायत स्तर के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों—जैसे मुखिया, सरपंच और ग्राम कचहरी के सदस्यों—के शस्त्र लाइसेंस आवेदनों का निष्पादन 60 दिनों के भीतर करने का आदेश दिया गया था। इसका मकसद स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा संबंधी जरूरतों के आधार पर समय पर लाइसेंस उपलब्ध कराना था।
सरकार के इस नए निर्देश से उम्मीद की जा रही है कि शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी। नियमित मॉनिटरिंग और तय समय-सीमा के पालन से लंबित मामलों में कमी आएगी और आम लोगों को भी राहत मिलेगी।