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बिहार के सभी टोल प्लाजा पर होगी एंबुलेंस की व्यवस्था, सड़क हादसों में हो रही मौतों पर सरकार चिंतित

Bihar Road Safety: बिहार सरकार सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को कम करने के लिए सभी टोल प्लाजा पर एंबुलेंस तैनात करेगी। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर ट्रॉमा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जबकि छह जिलों को 'जीरो फैटेलिटी' जिला घोषित किया गया है।

Bihar Road Safety
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Road Safety: बिहार सरकार सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी टोल प्लाजा पर जल्द से जल्द एंबुलेंस की व्यवस्था करने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग का मानना है कि दुर्घटना के बाद तत्काल उपचार मिलने से मौतों की संख्या में कमी लाई जा सकती है।


सड़क हादसों में मौतों पर सरकार चिंतित

राज्य में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सड़क हादसों में मृत्यु दर 2024 की तुलना में 6.12 प्रतिशत बढ़ गई है। इसी को देखते हुए सरकार ने दुर्घटना प्रबंधन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में पहल तेज कर दी है।


एनएच-एसएच पर बनेंगे ट्रॉमा सेंटर

राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और राज्य राजमार्ग (SH) पर ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया को भी गति दी जाएगी। इन केंद्रों में सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों का तत्काल उपचार किया जाएगा। ट्रॉमा सेंटर बनने के बाद प्रत्येक टोल प्लाजा पर स्थायी रूप से एक-एक एंबुलेंस तैनात की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि उन्नत किए गए 11 ट्रॉमा सेंटरों में 15 जुलाई तक आईसीयू सुविधा शुरू कर दी जाए, ताकि गंभीर घायलों का बेहतर इलाज संभव हो सके।


तकनीक से जुड़ेगी एंबुलेंस सेवा

सड़क दुर्घटना प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए एनएच एंबुलेंस की टैगिंग हेतु विशेष तकनीक विकसित की जाएगी। इससे दुर्घटना की सूचना मिलते ही नजदीकी एंबुलेंस को अलर्ट किया जा सकेगा और घायल को जरूरत के अनुसार उचित अस्पताल तक पहुंचाया जा सकेगा।


राज्य में 3500 से अधिक एंबुलेंस पंजीकृत

बिहार में वर्तमान में 1500 से अधिक सरकारी और 2000 से ज्यादा निजी एंबुलेंस पंजीकृत हैं। सभी सरकारी एंबुलेंस की मैपिंग की जा चुकी है, जिससे जरूरत पड़ने पर उन्हें तेजी से मौके पर भेजा जा सके। वर्तमान व्यवस्था के तहत कॉल मिलने के बाद शहरी क्षेत्रों में औसतन 20 मिनट और ग्रामीण इलाकों में 30 मिनट के भीतर एंबुलेंस पहुंच रही है।


छह जिलों को बनाया गया 'जीरो फैटेलिटी' जिला

देश के सर्वाधिक सड़क दुर्घटना प्रभावित 100 जिलों में बिहार के छह जिले शामिल हैं। इनमें पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, सारण और पूर्वी चंपारण शामिल हैं। सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या को न्यूनतम या शून्य करने के उद्देश्य से इन जिलों को 'जीरो फैटेलिटी जिला' के रूप में चिह्नित किया गया है। सरकार इन जिलों में विशेष रणनीति के तहत सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रही है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता