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Patna NEET student case : हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत पर 11 मार्च को सुनवाई, CBI से कोर्ट के तीखे सवाल

पटना NEET छात्रा रेप-मौत मामले में हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत पर सुनवाई। कोर्ट ने CBI से पूछे कड़े सवाल, अगली तारीख 11 मार्च।

Patna NEET student case : हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत पर 11 मार्च को सुनवाई, CBI से कोर्ट के तीखे सवाल
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Patna NEET student case : पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के रेप और संदिग्ध मौत मामले में सुनवाई तेज हो गई है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सोमवार को कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इससे पहले भी उनकी बेल पर दो घंटे तक लंबी बहस हो चुकी है, लेकिन अब तक उन्हें जमानत नहीं मिली है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 11 मार्च तय की है।


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच एजेंसी CBI से कड़े सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि जब मामला पॉक्सो से जुड़ा है तो आपने पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया? 17 जनवरी तक इस केस की जांच चित्रगुप्त नगर थाने की तत्कालीन थानेदार रौशनी कुमारी कर रही थीं। इसके बाद जांच SIT को सौंपी गई और फिर 12 फरवरी को CBI ने धारा 307 यानी अटेम्प्ट टू मर्डर के तहत केस दर्ज किया। कोर्ट ने CBI से सवाल किया कि मनीष रंजन की अब तक की जांच में क्या भूमिका सामने आई है? क्या उन्हें हिरासत में रखने की जरूरत है?


कोर्ट ने SIT से भी यही सवाल किया कि मनीष रंजन के खिलाफ ठोस आरोप और सबूत क्या हैं? SIT की ओर से कहा गया कि मनीष प्रभावशाली व्यक्ति हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था। हालांकि अब जांच CBI के पास है, इसलिए SIT को उनकी जरूरत नहीं है। सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार भी कोर्ट में मौजूद रहा।


कोर्ट ने प्रारंभिक जांच करने वाली थानेदार रौशनी कुमारी से भी कई तीखे सवाल पूछे। उनसे पूछा गया कि उन्होंने कब तक जांच की, क्या-क्या सबूत जुटाए, और जब्त किए गए मोबाइल व हॉस्टल के DVR को 24 घंटे के भीतर कोर्ट में क्यों पेश नहीं किया? FSL जांच क्यों नहीं कराई गई और कोर्ट की अनुमति क्यों नहीं ली गई? रौशनी ने बताया कि 17 जनवरी को सभी सबूत SIT को सौंप दिए गए थे, जबकि SIT ने कहा कि उन्हें 24 जनवरी को सामग्री मिली। दोनों के बयानों में अंतर सामने आया, जिस पर कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की।


पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि सबूतों से छेड़छाड़ की गई है। सचिवालय SDPO-1 डॉ. अन्नू कुमारी से भी पूछताछ हुई। उन्होंने बताया कि मनीष रंजन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कर लोकेशन मिलाई गई है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि घटना के समय मनीष कहां थे, बिहार से बाहर कब गए और कब पकड़े गए।


इधर, मामले की जांच कर रही CBI टीम प्रभात अस्पताल पहुंची और एक महिला स्टाफ से करीब पांच घंटे तक पूछताछ की। महिला स्टाफ ने बताया कि छात्रा अस्पताल लाई गई तो वह बेहोश थी और उसके शरीर पर खरोंच के निशान थे। अस्पताल में चर्चा थी कि उसके साथ गलत हरकत हुई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म का जिक्र है, जबकि अस्पताल की प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत की वजह नशीली दवा का ओवरडोज बताई गई थी। इस विरोधाभास पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। महिला स्टाफ ने कहा कि रिपोर्ट बदली गई या नहीं, यह लैब स्टाफ ही बता सकते हैं।अब 11 मार्च की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां CBI को कोर्ट के सवालों का स्पष्ट जवाब देना होगा। मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह अगली सुनवाई के बाद साफ हो सकेगा।