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पटना: बिहार का पहला एकमो मशीन से लैस अस्पताल बना पारस HMRI, यह मशीन मरीज के फेफड़ों की तरह करता है काम, इसके लिए अब दूसरे प्रदेशों में जाने की जरूरत नहीं

PATNA: बीते 12 जून को अस्पताल में आईसीयू बेड बढ़ाने और एकमो मशीन लगाने का वादा पारस पारस हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. धर्मेंद्र नागर ने बिहारवासियों से किया था। उन्होंने

पटना: बिहार का पहला एकमो मशीन से लैस अस्पताल बना पारस HMRI, यह मशीन मरीज के फेफड़ों की तरह करता है काम, इसके लिए अब दूसरे प्रदेशों में जाने की जरूरत नहीं
Jitendra Vidyarthi
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PATNA: बीते 12 जून को अस्पताल में आईसीयू बेड बढ़ाने और एकमो मशीन लगाने का वादा पारस पारस हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. धर्मेंद्र नागर ने बिहारवासियों से किया था। उन्होंने अपने इस वायदे को पांच माह के अंदर ही पूरा करके दिखाया है। पारस अस्पताल में 16 आईसीयू बेड बढ़ा दिए गए हैं और इस तरह अब यहां 106 आईसीयू बेड हो गए हैं जो की सबसे अधिक क्षमता वाला क्रिटिकल यूनिट है। वहीं एकमो मशीन भी इंस्टाल कर दिया गया है।


डॉ. धर्मेंद्र नागर ने बताया कि बीमारी के कारण जब किसी मरीज़ के फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं तब एकमो मशीन लगाई जाती है। यह शरीर के बाहर रहकर भी मरीज के फेफड़ों की तरह काम करता है। पारस HMRI हॉस्पिटल बिहार का पहला एकमो मशीन से लैस अस्पताल हो गया है। लोगों को इसके लिए दिल्ली, महाराष्ट्र या दक्षिण भारत जाना पड़ता था। लेकिन अब इसके लिए लोगों को दूसरे प्रदेशों में जाना नहीं पड़ेगा। इसकी सुविधा अब पटना के पारस हॉस्पिटल में कर दी गयी है।


डॉ. धर्मेंद्र नागर ने बताया कि हमलोग कोविड की संभावित तीसरी लहर के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 50 से अधिक आईसीयू बेड कोरोना मरीज के लिए होंगे। 25 वेंटिलेटर भी होंगे। ज़रुरत पड़ने पर कोरोना मरीज़ो के लिए 50 आईसीयू बेड आरक्षित करने के बावजूद भी दूसरे रोगों  के गंभीर मरीजों के लिए 50 से अधिक आईसीयू बेड अस्पताल में उपलब्ध रहेंगे।  


पारस अस्पताल के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. तलत हलीम ने बताया कि हमलोग का अगला कदम अस्पताल में न्यूरो इंटरवेंसन की सुविधा उपलब्ध कराना होगा। इसमें बिना चिरा लगाए मस्तिष्क की सर्जरी की जाती है। अभी अस्पताल में इंडोस्कोपिक ब्रेन सर्जरी हो रही है। इन सुविधाओं के साथ ही अस्पताल क्वाटनरी केयर लेवल तक पहुंच चुका है। 


गौरतलब है कि प्राइमरी, सेकेंड्ररी और टरशरी स्तर के बाद क्वाटनरी स्तर होता है। चिकित्सा के विभिन्न विधाओं में उच्चतम स्तर प्राप्त करने के बाद इस स्तर में कोई अस्पताल पहुंचता है। अभी पारस अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट, गंभीर कार्डियक सर्जरी, किडनी ट्रांसप्लांट, कैंसर का इलाज आदि सुविधा उपलब्ध है।

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Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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