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Bihar News : ऑफिस नहीं आए पंचायत सचिव, मोबाइल से बना ली हाजिरी! मुखिया ने लगाया वेतन लेने का गंभीर आरोप

मधुबनी के पंडौल प्रखंड की सरसोपाही पूर्वी पंचायत में पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप लगा है। मुखिया का दावा है कि सचिव कार्यालय आए बिना मोबाइल में मौजूद फोटो से हाजिरी बनाकर वेतन ले रहे हैं, जिससे पंचायत का कामकाज प्रभावित है।

Bihar News : ऑफिस नहीं आए पंचायत सचिव, मोबाइल से बना ली हाजिरी! मुखिया ने लगाया वेतन लेने का गंभीर आरोप
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

Bihar News : मधुबनी जिले के पंडौल प्रखंड की सरसोपाही पूर्वी पंचायत में पंचायत सचिव की कार्यशैली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पंचायत के मुखिया केदार झा ने पंचायत सचिव लालू प्रसाद यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मुखिया का आरोप है कि पंचायत सचिव नियमित रूप से पंचायत कार्यालय नहीं आते हैं, इसके बावजूद मोबाइल में उपलब्ध अपनी तस्वीर का इस्तेमाल कर कथित तौर पर हाजिरी बना लेते हैं और वेतन का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं।

मुखिया के इस आरोप के बाद पंचायत के कामकाज को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। उनका कहना है कि पंचायत सचिव के कार्यालय नहीं आने की वजह से पंचायत से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं और ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं एवं जरूरी सेवाओं का लाभ लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कार्यालय नहीं आने से पंचायत का कामकाज प्रभावित होने का आरोप

सरसोपाही पूर्वी पंचायत के मुखिया केदार झा के अनुसार, पंचायत सचिव की अनुपस्थिति का सीधा असर पंचायत के दैनिक कामकाज पर पड़ रहा है। पंचायत स्तर पर होने वाली बैठकों और ग्राम सभा के आयोजन में भी परेशानी आ रही है। पंचायत के विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को लेकर आवश्यक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। मुखिया का कहना है कि पंचायत में ग्रामीणों से जुड़े कई ऐसे काम होते हैं, जिनमें पंचायत सचिव की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उनके नियमित रूप से कार्यालय नहीं आने से व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।

विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी उठे सवाल

मुखिया ने आरोप लगाया कि पंचायत सचिव की अनुपस्थिति के कारण केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े काम भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आवास योजना, मनरेगा समेत कई योजनाओं के संचालन में पंचायत स्तर पर प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है।इसके अलावा पंचायत के वित्तीय प्रबंधन से संबंधित कार्यों, बजट, आय-व्यय और फंड के उपयोग से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करने में भी परेशानी होने का दावा किया गया है।मुखिया के अनुसार, पंचायत में होने वाले विकास कार्यों की निगरानी और उनसे जुड़ी जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

सड़क, नाली और पेयजल जैसे कामों पर भी असर

पंचायत में सड़क, नाली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों की देखरेख भी पंचायत स्तर पर होती है। मुखिया का आरोप है कि पंचायत सचिव के कार्यालय नहीं आने के कारण इन कार्यों से जुड़े कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों को जन्म, मृत्यु और विवाह जैसे आवश्यक पंजीकरण कार्यों के लिए भी पंचायत कार्यालय से संबंधित प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। आरोप है कि पंचायत सचिव की नियमित अनुपस्थिति के कारण इन सेवाओं में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों में आक्रोश, बीडीओ को दी गई जानकारी

पंचायत सचिव के कथित तौर पर कार्यालय नहीं आने को लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी की बात सामने आई है। मुखिया केदार झा का कहना है कि इस मामले की जानकारी पंडौल प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को भी दी गई है।हालांकि, मुखिया के अनुसार शिकायत और जानकारी दिए जाने के बावजूद पंचायत सचिव अब तक पंचायत कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इससे पंचायत के कामकाज को लेकर ग्रामीणों के बीच असंतोष बढ़ रहा है।

मोबाइल में फोटो से हाजिरी बनाने का आरोप

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप पंचायत सचिव की हाजिरी को लेकर लगाया गया है। मुखिया केदार झा का दावा है कि पंचायत सचिव पंचायत कार्यालय में मौजूद हुए बिना ही मोबाइल में पहले से उपलब्ध अपनी तस्वीर के माध्यम से हाजिरी बना लेते हैं।

यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो मामला गंभीर हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पंचायत सचिव की ओर से इस संबंध में उनका पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

पंचायत सचिव की कथित अनुपस्थिति, हाजिरी बनाए जाने के तरीके और पंचायत के कामकाज पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर अब प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की शिकायत के बाद यदि मामले की जांच होती है तो पंचायत सचिव की उपस्थिति, हाजिरी रिकॉर्ड और संबंधित सरकारी दस्तावेजों की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल सरसोपाही पूर्वी पंचायत में पंचायत सचिव को लेकर उठे सवालों ने पंचायत स्तर पर सरकारी कामकाज और कर्मचारियों की उपस्थिति की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।