NEET student death : नीट छात्रा की रहस्यमय मौत के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी मानी जा रही फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट 27 जनवरी को आने की उम्मीद है। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रा की मौत स्वाभाविक थी या इसके पीछे किसी साजिश की भूमिका रही है। पुलिस और एसआईटी (विशेष जांच दल) की निगाहें अब इसी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
इसी बीच शुक्रवार को ड्रग्स इंस्पेक्टर ने जहानाबाद के लाल मंदिर के पास स्थित रोहित मेडिकल हॉल की जांच की। जांच के दौरान मुख्य रूप से नींद की दवाओं की उपलब्धता और उनकी खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड को खंगाला गया। दुकान में कुछ नींद की दवाएं पाई गईं, हालांकि मेडिकल स्टोर संचालक ने उनके बिल भी दिखाए, जिससे यह साबित होता है कि वे दवाएं विधिवत तरीके से दूकान वाले खरीद कर लाते हैं। लेकिन संदेह यह है कि इन दवाओं का बिक्री दूकान के तरफ से बिना कैश मेमो के किया जा रहा है।
हालांकि, इस मामले में पीड़ित परिवार का दावा इससे बिल्कुल अलग है। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने मेडिकल शॉप से कभी भी नींद की दवा नहीं खरीदी थी। उनके अनुसार, वे हार्ट से जुड़ी बीमारी की दवाएं लेने गए थे। परिवार का यह भी कहना है कि न तो पीड़िता और न ही उनके साथ आए किसी व्यक्ति ने नींद की दवा की कोई मांग की थी। परिवार ने साफ शब्दों में कहा है कि नींद की दवा से जुड़ी बातें पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
इधर, छात्र की मौत की जांच कर रही एसआईटी ने अब तक तकनीकी और साक्ष्य आधारित जांच को काफी हद तक आगे बढ़ा लिया है। एसआईटी को अब तक करीब 100 जीबी सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। ये फुटेज पटना जंक्शन से लेकर मुन्ना तक के विभिन्न स्थानों के बताए जा रहे हैं। इन फुटेज की गहन जांच की जा रही है ताकि छात्र की अंतिम गतिविधियों और उसकी आवाजाही का सटीक ब्यौरा जुटाया जा सके।
इसके अलावा, जहानाबाद से लेकर पटना तक इलाज से जुड़े डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ, हॉस्टल वार्डन और छात्र के परिजनों के बयान भी रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, अब तक लगभग 105 जीबी के बयान एसआईटी द्वारा संकलित किए गए हैं। इन बयानों के जरिए जांच टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि छात्र की तबीयत बिगड़ने से लेकर उसकी मौत तक के दौरान किन-किन परिस्थितियों और व्यक्तियों की भूमिका रही।
सबसे अहम बात यह है कि अब पूरा मामला 27 जनवरी को आने वाली एफएसएल रिपोर्ट पर टिका हुआ है। इस रिपोर्ट से यह साफ हो जाएगा कि छात्र के शरीर में किसी तरह का जहरीला पदार्थ पाया गया था या नहीं, और यदि पाया गया तो उसकी मात्रा कितनी थी। इसी के आधार पर तय होगा कि मौत प्राकृतिक थी, दुर्घटना थी या फिर इसमें किसी तरह की आपराधिक साजिश शामिल थी।
वहीं, पटना एम्स के डॉक्टरों की एक टीम भी जल्द ही एसआईटी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर अपनी सेकंड ओपिनियन भेजने वाली है। इस मेडिकल राय से भी जांच को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट के मिलान के बाद ही जांच एजेंसियां किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंच पाएंगी।
फिलहाल, नीट छात्रा की मौत को लेकर परिवार और आम जनता के बीच कई सवाल बने हुए हैं। परिवार न्याय की मांग कर रहा है और चाहता है कि सच्चाई जल्द से जल्द सामने आए। वहीं, पुलिस और एसआईटी भी लगातार दावा कर रही है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
अब सबकी निगाहें 27 जनवरी पर टिकी हैं, जब एफएसएल रिपोर्ट सामने आएगी। माना जा रहा है कि इसी रिपोर्ट से इस रहस्यमय मौत की गुत्थी सुलझेगी और पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलने की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ेगा।






