NEET UG Scam : बिहार में नीट-यूजी परीक्षा में कथित धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई अब सिर्फ पहले से गिरफ्तार आरोपितों तक सीमित नहीं रहने वाली है। जांच एजेंसी को ऐसे कई मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के बारे में जानकारी मिली है, जिन पर स्कॉलर बनकर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने का आरोप है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में गिरफ्तारियों का दायरा बढ़ सकता है।
जांच के केंद्र में पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH), नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH), गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (ANMCH), बेतिया मेडिकल कॉलेज और पावापुरी मेडिकल कॉलेज समेत कई संस्थानों के MBBS छात्र हैं। EOU इन छात्रों की भूमिका की जांच कर रही है और संदिग्धों की तलाश में लगातार कार्रवाई कर रही है।
डॉक्टरों के बाद अब छात्रों तक पहुंची जांच
नीट-यूजी में कथित फर्जीवाड़े के मामले में डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट और डॉ. उज्ज्वल की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं। इसी आधार पर EOU को आशंका है कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए कुछ अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोग परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे थे।
जांच एजेंसी अब उन मेडिकल छात्रों की पहचान कर रही है, जिनके बारे में संदेह है कि उन्होंने पैसे या किसी अन्य लाभ के बदले स्कॉलर के तौर पर परीक्षा दी। इस नेटवर्क में सिर्फ MBBS छात्र ही नहीं, बल्कि नर्सिंग और डेंटल कॉलेज से जुड़े छात्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
बायोमीट्रिक सिस्टम पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में परीक्षा केंद्रों की बायोमीट्रिक प्रक्रिया भी जांच के घेरे में आ गई है। EOU ऐसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर इस नेटवर्क को तकनीकी या व्यवस्थागत मदद पहुंचाई। जांच एजेंसी बायोमीट्रिक मैनपावर सप्लायर, संबंधित वेंडर और फर्जी आधार कार्ड तैयार करने वाले लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। इनसे जुड़े संभावित ठिकानों पर छापेमारी और पूछताछ का सिलसिला जारी है।
रविशंकर और अश्विनी से फिर होगी पूछताछ
न्यायिक हिरासत में भेजे गए डॉ. रविशंकर और उसके भाई अश्विनी से EOU दोबारा पूछताछ की तैयारी में है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि दोनों से पूछताछ के जरिए नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े के तरीके के बारे में और जानकारी मिल सकती है।
इस बीच, अगले वर्ष होने वाली नीट परीक्षा में भी कथित धांधली की तैयारी से जुड़े एक मामले की जांच की जा रही है। ऑनलाइन परीक्षा केंद्र के साथ करार की बात सामने आने के बाद सनराइज इनोवेशन ऑनलाइन एग्जाम सेंटर के संचालक से भी पूछताछ की तैयारी है।
AKU की MBBS परीक्षा भी जांच के घेरे में
जांच का दायरा नीट-यूजी से आगे बढ़कर आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (AKU) की MBBS परीक्षा तक पहुंच गया है। EOU को पूछताछ के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि कथित गिरोह ने विश्वविद्यालय की MBBS परीक्षाओं में भी सेटिंग करने की कोशिश की थी।
अश्विनी के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान AKU MBBS परीक्षा की खाली बुकलेट मिलने की बात सामने आई है। अब EOU इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन से भी जानकारी मांग सकती है। खाली बुकलेट वहां कैसे पहुंची और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होना था, इसकी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कई परीक्षाओं के दस्तावेज मिले
छापेमारी के दौरान EOU को अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड, अंकपत्र, मूल प्रमाण-पत्र, ट्रांसफर सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज मिले हैं। इनमें नीट के अलावा विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े कागजात भी शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों के आधार पर संबंधित अभ्यर्थियों की पहचान और सत्यापन कर रही है। जिन लोगों से जुड़े एडमिट कार्ड, दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र या ब्लैंक चेक मिले हैं, उन्हें नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है।
जांच आगे बढ़ी तो और बड़े नाम सामने आ सकते हैं
EOU की जांच से संकेत मिल रहे हैं कि कथित नीट-यूजी धांधली का नेटवर्क एक-दो लोगों तक सीमित नहीं हो सकता। मेडिकल छात्रों से लेकर परीक्षा केंद्र से जुड़े लोगों और दस्तावेज तैयार करने वालों तक संभावित कड़ियों की जांच की जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि EOU की पूछताछ और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद कितने और लोगों की भूमिका सामने आती है। यदि जांच एजेंसी को आरोपों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल EOU की नजर उन सभी संदिग्ध छात्रों, डॉक्टरों और सहयोगियों पर है, जिनका नाम इस कथित परीक्षा फर्जीवाड़े से जुड़ रहा है।





