पटना: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के छात्र-छात्राओं के लिए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 अगस्त से पूरे बिहार में ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ की शुरुआत की जाएगी। इस पोर्टल के जरिए छात्र अपनी पढ़ाई, संस्थान, छात्रावास और कोचिंग से जुड़ी समस्याओं की शिकायत सीधे दर्ज करा सकेंगे। सरकार का दावा है कि पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का 30 दिनों के भीतर निष्पादन किया जाएगा।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “परीक्षाओं की निष्पक्षता के लिए हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी, जो परीक्षाओं की निगरानी करेगी। विद्यार्थी पोर्टल की शुरुआत होगी, जिसमें स्कूल, कॉलेज और कोचिंग से जुड़ी शिकायतों का निपटारा किया जाएगा।”
गांधी मैदान में स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों को अक्सर यह चिंता रहती है कि उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अब इस समस्या का समाधान करने के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसके तहत छात्र अपनी परेशानी सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे।
17 अगस्त से शुरू होगा नया पोर्टल
मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 तारीख से पूरे बिहार में विद्यार्थी सहयोग पोर्टल की स्थापना की जाएगी। इस पोर्टल पर राज्य का कोई भी छात्र या छात्रा अपनी समस्या दर्ज करा सकेगा। इसके लिए विद्यार्थियों को अपनी शिकायत ऑनलाइन रजिस्टर करनी होगी, जिसके बाद संबंधित विभाग या अधिकारी के स्तर पर उसके समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सम्राट चौधरी ने छात्रों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि यदि किसी विद्यार्थी को अपने संस्थान में परेशानी हो रही है, छात्रावास में कोई समस्या है या कोचिंग संस्थान से जुड़ी कोई दिक्कत सामने आ रही है, तो वह विद्यार्थी सहयोग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शिकायतों के निष्पादन के लिए 30 दिनों की समयसीमा तय की जाएगी। यानी छात्रों को अपनी समस्या के समाधान के लिए लंबे समय तक कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कॉलेज, हॉस्टल और कोचिंग की शिकायत भी कर सकेंगे दर्ज
विद्यार्थी सहयोग पोर्टल को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य केवल किसी एक तरह की शिकायत का समाधान करना नहीं है। विद्यार्थी अपनी शिक्षा और छात्र जीवन से जुड़ी अलग-अलग समस्याओं को इस प्लेटफॉर्म पर दर्ज करा सकेंगे। अगर किसी छात्र को अपने इंस्टीट्यूट में परेशानी, छात्रावास में समस्या, कोचिंग से संबंधित शिकायत या पढ़ाई से जुड़ी कोई अन्य समस्या है, तो वह इसकी जानकारी पोर्टल के माध्यम से सरकार तक पहुंचा सकेगा।
इस घोषणा के बाद छात्रों के बीच उम्मीद जगी है कि छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब शिकायत दर्ज कराने से लेकर उसके समाधान तक की प्रक्रिया को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी है।
युवाओं के लिए रोजगार पर भी बड़ा दावा
स्वतंत्रता दिवस के मंच से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सिर्फ विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान की बात नहीं की, बल्कि रोजगार और सरकारी नौकरी को लेकर भी बड़ा लक्ष्य सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की आने वाली पीढ़ी के छात्र ही राज्य को आगे ले जाने का काम करेंगे। इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में इससे पहले भी बड़े स्तर पर सरकारी नौकरी और रोजगार देने का काम किया गया है। उन्होंने नीतीश कुमार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2025 तक 10 से 12 लाख सरकारी नौकरी और करीब 50 लाख रोजगार देने का काम किया गया था। इसके आगे मुख्यमंत्री ने बिहार के युवाओं के लिए और बड़ा लक्ष्य घोषित किया। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि 2030 से पहले बिहार में एक करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी और रोजगार देने का काम किया जाए।
छात्रों के बाद युवाओं के भविष्य पर फोकस
मुख्यमंत्री के इस ऐलान को बिहार में शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सरकार की बड़ी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ विद्यार्थी सहयोग पोर्टल के जरिए छात्रों की रोजमर्रा की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने की बात कही गई है, तो दूसरी तरफ रोजगार के मोर्चे पर एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। दरअसल, बिहार में बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरी और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की तैयारी करते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की ओर से रोजगार को लेकर किए गए इस बड़े ऐलान पर युवाओं की नजर रहेगी।
30 दिन की डेडलाइन बनी सबसे बड़ी बात
विद्यार्थी सहयोग पोर्टल की घोषणा में सबसे अहम बात 30 दिनों में शिकायत के निष्पादन का आश्वासन है। यदि यह व्यवस्था तय समयसीमा के भीतर प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो छात्रों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक नया और सीधा माध्यम मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में साफ संदेश दिया कि सरकार विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से लेगी और उन्हें समाधान उपलब्ध कराने की कोशिश करेगी। अब सबकी नजर 17 अगस्त से शुरू होने वाले विद्यार्थी सहयोग पोर्टल पर है कि इसकी प्रक्रिया किस तरह काम करती है और छात्रों की शिकायतों का निपटारा किस स्तर पर किया जाता है।
कुल मिलाकर, स्वतंत्रता दिवस पर बिहार के छात्रों को दो बड़े संदेश मिले हैं—पहला, 17 अगस्त से विद्यार्थी सहयोग पोर्टल के जरिए शिकायतों के समाधान की नई व्यवस्था और दूसरा, 2030 से पहले एक करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी और रोजगार देने का बड़ा लक्ष्य।





