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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन का हंटर, बेतहाशा फीस बढ़ोतरी करने वालों पर लगेगा लाखों का जुर्माना

मुजफ्फरपुर में निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर प्रशासन का शिकंजा कस गया है। 7% से अधिक फीस बढ़ाने पर स्कूलों पर लाखों का जुर्माना और मान्यता रद्द करने की कार्रवाई होगी।

बिहार न्यूज
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

MUZAFFARPUR: तिरहुत प्रमंडल के निजी स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि और नामांकन के नाम पर की जा रही मनमानी पर अब प्रशासन ने पूरी तरह से शिकंजा कस दिया है। प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। नियमों की अनदेखी करने वाले शिक्षण संस्थानों पर अब भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।


गुरुवार को प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह की अध्यक्षता में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और अभिभावक संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के किए जा रहे आर्थिक शोषण पर रोक लगाना और सरकारी गाइडलाइंस का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना था।


7 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि पर रोक

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने कहा कि सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी निजी विद्यालय एक शैक्षणिक सत्र में 7 प्रतिशत से अधिक फीस की बढ़ोतरी नहीं कर सकता है। यदि कोई स्कूल इससे अधिक फीस वसूलता पाया जाता है, तो उसे अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि स्कूल विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्ज), वार्षिक शुल्क और अन्य मदों के नाम पर भारी रकम वसूलते हैं, जो पूरी तरह गलत है।


जुर्माने का कड़ा प्रावधान

प्रशासन ने अब वित्तीय दंड का प्रावधान भी कड़ा कर दिया है। आयुक्त के अनुसार पहली बार नियम तोड़ने पर: यदि कोई स्कूल पहली बार शुल्क विनियमन अधिनियम का उल्लंघन करता पकड़ा जाता है, तो उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार उल्लंघन पर: यदि वही स्कूल दोबारा दोषी पाया जाता है, तो जुर्माने की राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी जाएगी। इसके बावजूद सुधार न होने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा भी की जा सकती है।


अभिभावकों को दी बड़ी राहत

नामांकन शुल्क, अर्धवार्षिक शुल्क और अन्य गुप्त शुल्कों के नाम पर होने वाली अवैध वसूली को भी जांच के दायरे में रखा गया है। आयुक्त ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में इस आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार करें और यह सुनिश्चित करें कि हर निजी स्कूल तक यह जानकारी पहुँच जाए।


निगरानी के लिए निर्देश:शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्कूलों के बैलेंस शीट और फीस स्ट्रक्चर की नियमित जांच करें। अभिभावक संघों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे आम जनता के लिए बड़ी राहत बताया है। आयुक्त ने साफ लहजे में कहा कि शिक्षा को व्यापार बनाने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी और नियमों की लक्ष्मण रेखा लांघने वाले स्कूलों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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