Munger News Today : मुंगेर में पिछले 16 वर्षों से बंद पड़े पत्थर खनन कारोबार को फिर से शुरू कराने की उम्मीद जगी है। अगर सबकुछ योजना के मुताबिक हुआ तो जमालपुर, धरहरा और खड़गपुर के पहाड़ों पर एक बार फिर पत्थर उत्खनन का रास्ता खुल सकता है। इससे हजारों मजदूरों को रोजगार मिलने के साथ क्रशर उद्योग और सरकारी राजस्व को भी बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। इस दिशा में जमालपुर विधायक नचिकेता मंडल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर बड़ी मांग रखी है।
बिहार के मुंगेर जिले के पहाड़ों में पिछले 16 साल से पसरा सन्नाटा अब टूटने की उम्मीद दिखाई देने लगी है। कभी पत्थर खनन और क्रशर उद्योग के लिए पहचाने जाने वाले इस इलाके में लंबे समय से कारोबार बंद है। पहाड़ों से पत्थर निकलना बंद हुआ तो इसका असर सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर भी पड़ा। मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हुआ और पत्थर कारोबार से जुड़े कई दूसरे छोटे-बड़े व्यवसाय भी प्रभावित हुए।
अब एक बार फिर मुंगेर के पहाड़ों में खनन शुरू कराने की कवायद तेज हो गई है। खास बात यह है कि इस बार मांग सिर्फ कुछ चुनिंदा खनन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के सभी प्रमुख पहाड़ों की सीमा का नए सिरे से निर्धारण कराकर खनन का रास्ता खोलने की पहल की जा रही है।
16 साल बाद क्या फिर शुरू होगा पहाड़ों पर पत्थर का कारोबार?
मुंगेर के जमालपुर, धरहरा और खड़गपुर प्रखंडों में पत्थर खनन बंद होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लंबे समय से नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में लोग खनन, पत्थर ढुलाई और क्रशर उद्योग से जुड़े हुए थे। लेकिन वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र की सीमा में पहाड़ों को शामिल किए जाने के बाद खनन गतिविधियों पर रोक लग गई।
अब सवाल यह है कि आखिर 16 साल बाद इस कारोबार को दोबारा कैसे शुरू किया जाए? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए जमालपुर के विधायक नचिकेता मंडल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने मुंगेर के पहाड़ों का मुद्दा उठाया है। विधायक ने पटना में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें मांग पत्र सौंपा। इसमें वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र की सीमा का नए सिरे से सीमांकन कराने और नियमों के दायरे में रहकर खनन की अनुमति देने की मांग की गई है।
सिर्फ पांच स्टोन ब्लॉक से नहीं बनेगी बात, सभी पहाड़ों पर नजर
दरअसल, मुंगेर में खनन शुरू कराने की दिशा में पहले से कुछ प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है। वन विभाग की ओर से फिलहाल पांच स्टोन ब्लॉक को वन क्षेत्र से बाहर किया गया है। इन पांच ब्लॉकों के लिए खनन विभाग डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट (DSR) तैयार कर रहा है।
लेकिन विधायक नचिकेता मंडल का मानना है कि केवल पांच स्टोन ब्लॉक से मुंगेर के खनन कारोबार को पुरानी रफ्तार नहीं मिल सकती। इन ब्लॉकों में पत्थर की उपलब्धता भी सीमित बताई जा रही है। ऐसे में अगर खनन की अनुमति सिर्फ इन्हीं क्षेत्रों तक सीमित रहती है तो स्थानीय मजदूरों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने की उम्मीद अधूरी रह सकती है।
इसीलिए विधायक ने पूरे इलाके का वैज्ञानिक तरीके से नए सिरे से सीमांकन कराने की मांग की है। उनका सुझाव है कि पहाड़ों के संवेदनशील अंदरूनी हिस्सों यानी कोर एरिया को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए, जबकि बाहरी हिस्सों यानी बफर और पेरिफेरल एरिया की अलग से पहचान कर वहां नियमानुसार खनन की संभावना तलाशी जाए। यानी मांग यह है कि जहां वन्यजीवों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है, उन क्षेत्रों को सुरक्षित रखते हुए दूसरे उपयुक्त इलाकों में खनन का रास्ता खोला जाए।
सीएम सम्राट चौधरी ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मुंगेर के इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सकारात्मक रुख दिखाया है। विधायक नचिकेता मंडल ने मुख्यमंत्री को खनन बंद होने से पैदा हुई आर्थिक और रोजगार संबंधी समस्याओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद विधायक ने राज्य के मुख्य सचिव और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात कर अपनी मांगों को सामने रखा। अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर लोगों की नजर टिकी है। अगर सीमांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है और खनन के लिए उपयुक्त क्षेत्र चिह्नित होते हैं तो मुंगेर के पत्थर कारोबार को नई जिंदगी मिल सकती है।
हजारों परिवारों को रोजगार, सरकार को भी मिलेगा राजस्व
मुंगेर में पत्थर खनन दोबारा शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय लोगों को मिलने की उम्मीद है। खनन गतिविधियां शुरू होने से मजदूरों को काम मिलेगा। इसके साथ ही ट्रैक्टर, ट्रक, ट्रांसपोर्ट, क्रशर प्लांट और निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबार में भी तेजी आ सकती है।
पत्थर खनन से जुड़े कारोबार का सीधा असर आसपास के बाजारों पर भी पड़ता है। मजदूरों की आमदनी बढ़ने से स्थानीय दुकानों और छोटे व्यवसायों को भी फायदा मिल सकता है। वहीं, सरकार को खनन से मिलने वाली रॉयल्टी और दूसरे राजस्व स्रोतों से आमदनी बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इस पूरी योजना के सामने पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा सबसे बड़ी शर्त होगी। इसलिए सीमांकन और खनन की अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया नियमों के मुताबिक पूरी करनी होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आश्वासन के बाद मुंगेर के सभी प्रमुख पहाड़ों पर खनन शुरू कराने का रास्ता खुलेगा? क्या 16 साल से रोजगार की तलाश में परेशान स्थानीय मजदूरों के दिन बदलेंगे और क्या जमालपुर, धरहरा व खड़गपुर का पत्थर कारोबार फिर अपनी पुरानी पहचान हासिल कर पाएगा? फिलहाल पांच स्टोन ब्लॉक से आगे बढ़कर पूरे इलाके के नए सीमांकन की मांग ने मुंगेर के लोगों की उम्मीदें जरूर बढ़ा दी हैं।





