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मुंगेर में करोड़ों की लागत से बना विद्युत शवदाह गृह बंद, लोग खुले में अंतिम संस्कार करने को मजबूर

मुंगेर के लालदरवाजा विद्युत शवदाह गृह में तकनीकी खराबी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण पिछले ढाई महीने से बंद। लोग खुले में दाह संस्कार कर रहे हैं, जिससे गंगा और पर्यावरण पर गंभीर असर।

बिहार न्यूज
हाथी का दांत बना विद्युत शवदाह गृह
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

MUNGER: मुंगेर में करोड़ों की लागत से बना विद्युत शवदाह गृह आज “शोपीस” बनकर रह गया है। तकनीकी खामियों और रखरखाव की कमी एवं प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह पिछले ढाई महीने से बंद पड़ा है। नतीजा यह है कि लोग खुले में शव का अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। जिससे गंगा और पर्यावरण दोनों पर गंभीर असर पड़ रहा है।


मुंगेर के लालदरवाजा श्मशान घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह की हालत बदहाल है। 7 अगस्त 2020 को करोड़ों की लागत से शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट ज्यादातर समय बंद ही रहा। पिछले 10 महीनों में यह मात्र 15 दिनों तक ही चालू रह सका। तकनीकी खराबी और मोटर फेल होने के कारण 16 जनवरी से यह पूरी तरह बंद पड़ा है। नगर निगम ने मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।


इस शवदाह गृह के बंद रहने से मुंगेर ही नहीं, बल्कि जमुई, शेखपुरा और लखीसराय से आने वाले लोगों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।लोग अब खुले में लकड़ी से शव जलाने को मजबूर हैं ।जिससे एक ओर हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गंगा प्रदूषित हो रही है और वातावरण में जहरीला धुआं फैल रहा है। 


दाह संस्कार करने आए लोगों ने बताया कि विद्युत शवदाह गृह बंद रहने से काफी परेशानी होती है। खुले में शव जलाना पड़ता है, जिसमें ज्यादा खर्च और मौसम की मार दोनों झेलनी पड़ती है । गंगा दूर चली गई है, लकड़ी ले जाने में भी परेशानी होती है। प्रशासन से मांग है कि इसे जल्द चालू कराया जाए ।


स्थिति इतनी खराब है कि यहां 10 कर्मियों की तैनाती के बावजूद शवदाह गृह बंद पड़ा है। शवदाह शुल्क 500 रुपये और मुखाग्नि शुल्क 400 रुपये तय है, लेकिन सुविधा शून्य है। 


वहीं वार्ड पार्षद अंशु वाला ने बताया कि यह शवदाह गृह चालू से ज्यादा बंद ही रहता है। कई बार शिकायत के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। अब नई मशीन लगाकर इसे स्थायी रूप से चालू किया जाए । सरकार गंगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े अभियान चला रही है । 


वहीं इस मामले में विद्युत शव दाह गृह के ऑपरेटर रूपेश ने बताया कि पिछले 8 - 9 माह में मात्र एक सप्ताह चालू था उसके बाद यह पुनः बंद हो गया । पर अब नया मोटर लगाया जा रहा है जो एक सप्ताह में शव दाह गृह शुरू हो जाने की उम्मीद है ।  लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अब सवाल यह है कि करोड़ों खर्च के बावजूद कब तक लोग इस समस्या से जूझते रहेंगे  और प्रशासन कब जागेगा ।

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