ब्रेकिंग
पुलिस हेडक्वार्टर के सामने युवक की लाश मिलने से सनसनी, शव की पहचान करने में जुटी पुलिस धान खरीद में अनियमितता को लेकर EOU की जांच तेज, प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंपहोम्योपैथिक क्लिनिक की आड़ में चल रहा था अवैध स्प्रिट का काला खेल, उत्पाद विभाग संचालक को किया गिरफ्तारखराब सड़क-पुल पर ठेकेदारों की खैर नहीं, 82 अधिकारियों की टीम करेगी जांचKISHANGANJ: ठाकुरगंज में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: 4.04 लाख की निकासी पर घमासान, कागजों पर बनी सड़क, जमीन पर गायबपुलिस हेडक्वार्टर के सामने युवक की लाश मिलने से सनसनी, शव की पहचान करने में जुटी पुलिस धान खरीद में अनियमितता को लेकर EOU की जांच तेज, प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंपहोम्योपैथिक क्लिनिक की आड़ में चल रहा था अवैध स्प्रिट का काला खेल, उत्पाद विभाग संचालक को किया गिरफ्तारखराब सड़क-पुल पर ठेकेदारों की खैर नहीं, 82 अधिकारियों की टीम करेगी जांचKISHANGANJ: ठाकुरगंज में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: 4.04 लाख की निकासी पर घमासान, कागजों पर बनी सड़क, जमीन पर गायब

मुकेश सहनी ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र, मत्स्यजीवी सहयोग समिति का निर्वाचन खर्च माफ किए जाने की मांग

PATNA: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से मुकेश सहनी ने यह मांग की है कि मत्स्यजीवी सहयोग

मुकेश सहनी ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र, मत्स्यजीवी सहयोग समिति का निर्वाचन खर्च माफ किए जाने की मांग
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

PATNA: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से मुकेश सहनी ने यह मांग की है कि मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के चुनाव में लिया जाने वाला 5 हजार रुपये शुल्क सरकार वापस ले। 


वीआईपी संस्थापक मुकेश सहनी ने मुख्यमंत्री को अपने पत्र में पूर्व से बने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के चुनाव के लिए 7 सौ मतदाताओं पर सहयोग समितियों से 5 हजार रुपये की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा मत्स्यजीवी सहयोग समिति कमजोर वर्ग के व्यक्तियों का समूह है। 


निर्वाचन विभाग जून 2022 में मत्स्यजीवी सहयोग समितियों का चुनाव कराना चाहता है। निर्वाचन प्राधिकार वैसी समितियों के लिए चुनावी प्रक्रिया प्रारंभ करने जा रहा है जिन सहयोग समितियों ने शुल्क का भुगतान कर दिया है। लेकिन सबसे ज्यादा गरीब मछुआरों की संख्या हैं जो मत्स्यजीवी सहयोग समिति के चुनाव के शुल्क जमा करने की स्थिति में नहीं। 


इनकी माली हालत ऐसी नहीं कि पांच हजार रुपये का शुल्क अदा कर सकें। सहनी ने वर्ष 2027-17 का हवाला देकर कहा उक्त चुनाव में सरकार ने निर्धारित शुल्क के नियम को क्षांत कर दिया था। यह व्यवस्था सिर्फ एक वर्ष के लिए प्रभावी की गई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि 2017-18 की तरह यदि 2022 के चुनाव में भी शुल्क के नियमों को क्षांत किया जाए ताकि बड़ी संख्या में गरीब मछुआरा समूह चुनाव में भाग ले सके।

टैग्स
इस खबर के बारे में

रिपोर्टर / लेखक

Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

संबंधित खबरें