Bihar politics: राजनीति के बेहतर मानक पेश करते हुए सूबे में एक ऐसे भी विधायक हैं, जो मुफलिसी में जो सो शहीद के परिजनों को अपने निजी कोष से जीने के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे है. सारण जिले के अमनौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक कृष्ण कुमार उर्फ मंटू पटेल ने अपने विधानसभा क्षेत्र से बाहर सीतामढ़ी जिले में अमर शाहीद रामफल मंडल के परिजनों की माली हालत की देखते हुए मात्र 100 दिनों के अंदर उनके रहने के लिए पक्का मकान का निर्माण कराया है. अमर शहीद रामफल मंडल के परिजनों को उनके पैतृक गांव सीतामढ़ी के बाजपट्टी थाने के मधुरापुर में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर विधायक मंटू पटेल नवनिर्मित मकान का चाची सौंप दिया.
इस मौके पर विधानसभा क्षेत्र से विधायक कृष्ण कुमार उर्फ मंटू पटेल ने अपने विधानसभा क्षेत्र से बाहर सीतामढ़ी जिले में अमर शाहीद रामफल मंडल के परिजनों की माली हालत की देखते हुए मात्र 100 दिनों के अंदर उनके रहने के लिए पक्का मकान का निर्माण कराया है. अमर शहीद रामफल मंडल के परिजनों को उनके पैतृक गांव सीतामढ़ी के बाजपट्टी थाने के मधुरापुर में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर विधायक मंटू पटेल नवनिर्मित मकान का चाची सौंपेंगे. इस मौके पर शहीद के गांव में खुशी का माहौल है.
दरअसल, गत साल 23 अगस्त को अमर शहीद के शहादत दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में विधायक मंटू पटेल मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे. इस दौरान विधायक को जानकारी मिली कि शहीद के परिजन गरीबी का दंश झेल रहे हैं. देश की आजादी के लिए फांसी को गले लगानेवाले रामफल मंडल के परिजन आजादी के इतने वर्षों बाद भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं.
उनके परिजनों को एक अदद पक्का मकान भी नसीब नहीं हुआ, जबकि शहीद के नाम पर आजादी के बाद से बहुत सारे राजनीतिक नेताओं ने खूब रोटियां सेंकी. इस दौरान मंच से ही विधायक मंटू पटेल ने घोषणा की कि वे शहीद के परिजनों के लिए 100 दिनों के अंदर ही पक्का मकान का निर्माण कराएंगे. अपने वादा के पक्के विधायक मंटू पटेल ने मात्र 100 दिनों के मकान का निर्माण करा दिया. गणतंत्र दिवस के मौके पर गांव में एक कार्यक्रम आयोजित कर शहीद के परिजनों को नवनिर्मित मकान का चाबी सौंपा जायेगा.
मालूम हो कि साल 1942 में महात्मा गांधी के आह्वान पर अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया गया था. आंदोलन में शहीद रामफल मंडल ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था. 24 अगस्त, 1942 को शहीद रामफल मंडल ने बाजपट्टी चौक पर ब्रिटिश हुकूमत के सीतामढ़ी अनुमंडल पदाधिकारी एवं अन्य की हत्या कर दी, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गयी. 23 अगस्त, 1943 को रामफल मंडल को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा भागलपुर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गयी थी.





