Bihar News: बेगूसराय में करीब आठ साल पुराने आर्म्स एक्ट मामले में एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया. बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को अवैध कारतूस रखने के मामले में दोषी करार देते हुए अदालत ने दोनों को 7-7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में लेकर सीधे बेगूसराय मंडल कारा भेज दिया गया.
जिला एवं सत्र न्यायाधीश-द्वितीय सह विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने दोनों को आर्म्स एक्ट की अलग-अलग धाराओं में दोषी माना. अदालत के फैसले के बाद मामले ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में चर्चा बढ़ा दी है.
दोनों पर लगा 90-90 हजार रुपये का जुर्माना
अदालत ने मंजू वर्मा और चंद्रशेखर वर्मा को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-ए) के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. अर्थदंड नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 26 के तहत दोनों को 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई है. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में 10 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. हालांकि अदालत ने दोनों धाराओं में दी गई सजाओं को एक साथ चलाने का आदेश दिया है. ऐसे में दोनों के लिए प्रभावी सजा 7 वर्ष के सश्रम कारावास की होगी.
2018 में CBI की छापेमारी में मिली थीं 50 गोलियां
यह मामला वर्ष 2018 का है. 16 अगस्त 2018 को मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच के सिलसिले में CBI ने चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र के श्रीपुर अर्जुन टोला स्थित मंजू वर्मा के आवास पर छापेमारी की थी.
तलाशी के दौरान घर में रखे स्टील के ट्रंक से 50 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे. बरामद कारतूसों में 15 गोलियां .32 बोर, 10 गोलियां 8 एमएम बोर, 19 गोलियां 7.62 बोर और 6 गोलियां .303 बोर की थीं.
कारतूस बरामद होने के बाद CBI के पुलिस उपाधीक्षक उमेश कुमार के आवेदन पर चेरिया बरियारपुर थाना में कांड संख्या 143/2018 दर्ज किया गया था. मामले में आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)(ए), 26 और 35 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
8 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राम प्रकाश यादव ने अदालत में पक्ष रखा. अभियोजन की ओर से अपने दावे के समर्थन में कुल आठ गवाहों की गवाही कराई गई.
वहीं, बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता विजय कुमार महाराज और ललन महतो ने मंजू वर्मा और चंद्रशेखर वर्मा का पक्ष रखा. दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य सुनने के बाद अदालत ने दोनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई.
मंजू वर्मा के इलाज के लिए जेल अधीक्षक को निर्देश
सजा सुनाए जाने के बाद मंजू वर्मा की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत में आवेदन देकर उनकी खराब तबीयत का हवाला दिया. आवेदन पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बेगूसराय मंडल कारा के अधीक्षक को मंजू वर्मा के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.
एमपी-एमएलए विशेष अदालत के फैसले के बाद पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को तत्काल जेल भेज दिया गया है. अब दोनों पक्षों के पास फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का रुख करने का विकल्प है. ऐसे में इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई पटना हाईकोर्ट तक पहुंचने की संभावना है.
बेगूसराय से हरेराम दास की रिपोर्ट





